योग एवं स्वास्थ्य Yoga & Health

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शरीर में मौजूद विभिन्न एक्यूपंचर पोइंट्स की जानकारी  

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नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है

एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख नहीं पायेंगे।…. मित्रो यह सम्भव नहीं है..

मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है…गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है।

गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है।

नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है

नाभी में गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।

1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय…

सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच गोलाई में फैला देवें।

2. घुटने के दर्द में उपाय

सोने से पहले तीन से सात बूंद इरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें।

3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :-
रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके
चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।

4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:-

नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।

*नाभी में तेल डालने का कारण*

हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है।

जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।बस यही काम है तेल का।

हार्ट अटैक : ना घबराये ….!!
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सहज सुलभ उपाय ….
99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता….

पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल, गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।

पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार …!!

इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः से लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती ! …

दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें …

* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।
* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।
* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें। …

तो अब समझ आया, भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप में क्यों बनाया !! …

प्रस्तुति –
डॉ. सी.एम. सिंघल, वरिष्ठ सर्जन
(पूर्व प्रोफ़ेसर व अध्यक्ष)
गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज,
कानपुर (उ.प्र.)
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फटी एड़ियों की ऐसे करें देखभाल

पैरों की एड़ियां फटने पर रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पीएं और साथ में कैफीन और एल्‍कोहल का सेवन न करें। पैरों को धोने के बाद अच्छी तरह सुखाएं। इन्हें गीला न रखें। इसे सुखाने के बाद कोई लोशन जरूर लगाएं। इससे पैर मुलायम बने रहेंगे। पैरों से डेड स्किन हटाने और पैरों को कीटाणुओं से बचाने के लिए एंटी-सेप्टिक साबुन काफी फायदेमंद है। इसलिए इससे अपने पैरों को साफ करें।

मूंग दाल का पानी पीने के इन फायदों से न रहे अनजान

मूंग की दाल ही खाने के फायदें नहीं होते है बल्‍कि मूंग की दाल का पानी पीने के भी कई तरह के फायदें होते है। इसे पीने से एनीमिया दूर होने के साथ ही वजन कम होता है। मूंग की दाल बॉडी को इम्‍यून रखने के साथ ही शरीर से हैवी मेटल्स जैसे पारा और सीसा को बाहर निकाल देता है। इसमें भारी मात्रा में कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम और सोडियम होता है।

वजन कम करना हैं तो पीएं ये खास आयुर्वेदिक चाय

अगर आपका वजन काफी ज्यादा हैं तो आपको इस प्राकृतिक चाय का सेवन दो बार करना चाहिए, एक सुबह और दूसरा रात को खाने के बाद। ये चाय आपका वनज कम करने में मदद करेगी। इस चाय को बनाने के लिए बस आपको हल्दी, दालचीनी और अदरक की आवश्यकता होगी। ये चाय महिलाओं के मासिक धर्म में होने वाले दर्द को भी काफी हद तक कम कर देती हैं।

सहज योग की शुरुआत कर रहे हैं तो ध्यान रखें ये 5 बातें

(source-www.onlymyhealth.com)

माता निर्मला देवी द्वारा विकसित सहज योग मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह मुख्य रुप से आत्म बोध का प्रचार है जिससे कुंडलिनी जागृत होकर व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार लाती है।
1 सहज योग

सहज योग की खोज निर्मला श्रीवास्तव ने की, उन्‍हें ‘श्री माता जी निर्मला देवी’ के नाम से भी जाना जाता हैं। सहज योगा में कुंडलिनी जागरण व निर्विचार समाधि, मानसिक शांति से लोगों को आत्मबोध होता है और अपने आप को जानने में मदद मिलती है। माता निर्मला देवी द्वारा विकसित इस योग को मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद फायदेमंद माना जाता है। image courtesy : getty images

सहज योग
 

सहज योग क्‍या है

सहज योग में आसान मुद्रा में बैठकर मेडिटेशन किया जाता है। इसका अभ्यास करने वाले लोगों को ध्‍यान के दौरान सिर से लेकर हाथों तक एक ठंडी हवा का एहसास होता है। सहज योगा केवल एक क्रिया का नाम नहीं हैं, बल्कि यह एक तकनीक भी है। यह मुख्य रुप से आत्म बोध का प्रचार है जिससे कुंडलिनी जागृत होकर व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार लाती है।   image courtesy : getty images

सहज योग क्‍या है
 

क्‍या कहते हैं शोध

यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी मेडिकल स्कूल में मनोचिकित्सा विभाग के वरिष्ठ व्याख्याता रमेश मनोचा ने सहज पर किए शोध में पाया कि सामान्य लोगों की तुलना में उन लोगों की मानसिक और शारीरिक सेहत ज्यादा अच्छी थी, जिन्होंने कम से कम दो वर्षों तक सहज योग को आजमाया था। image courtesy : getty images

क्‍या कहते हैं शोध
 
 

सहज शब्द की उत्पति

सहज शब्द संस्कृत के दो शब्दों को जोड़ कर बना है, ‘सह’ और ‘जा’। सह का अर्थ है ‘साथ’ और ‘जा’ का अर्थ है ‘जन्म’। जब यह दोनों शब्द एक साथ मिल जाते हैं तो इसको अर्थ प्रकृति के करीब हो जाता है। सहज योग के अनुयाईयों का विश्वास है कि इससे उनके अंदर कुंडलिनी का जन्म होता है और वे उन्हें स्वत: जागृत कर सकते हैं। इस स्‍लाइड शो में सहज योग से होने वाले फायदे के बारे में जानिए।  image courtesy : getty images

सहज शब्द की उत्पति
 

सामान्य स्वास्थ्य के लिए

चिकित्सकों ने सहज योगा के अन्य प्रभावों के बारे में भी बताया है। उनके अनुसार योग को करने से लोगों में शारीरिक व मानसिक तनाव से मुक्ति व आराम मिलता है। साथ ही शरीर में होने वाली बीमारियों को जड़ को खत्म किया जा सकता है।  image courtesy : getty images

सामान्य स्वास्थ्य के लिए
 

बीमारियों में लाभकारी

शोधकर्ताओं के मुताबिक मौन की यह प्रक्रिया कायिक और मानसिक स्वास्थ्य के कई रास्ते खोलती है। सहजयोग के नियमित अभ्यास से कैंसर, ब्लड प्रेशर, हाइपर टेंशन और हृदय के रोगियों को भी लाभ हुआ है। image courtesy : getty images

बीमारियों में लाभकारी
 

विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद

खासकर विद्यार्थियों के लिए तो योग अमृत के समान है। जो विद्यार्थी योग को अपने जीवन में नियमित रूप से शामिल करते हैं वे न केवल पढ़ाई में अव्वल आते रहते हैं, साथ ही अन्य गतिविधियों में भी उनका कोई मुकाबला नहीं रहता।  image courtesy : getty images

विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद
 

तनाव से मुक्ति

सहज योगा से दिमाग को शक्ति मिलती है। इस योगा से व्यक्ति को आसपास के तनाव, दिनभर की थकान व अपने गुस्से को नियंत्रित करने में आसानी होती है। जिससे नींद में भी सुधार होता है।  image courtesy : getty images

तनाव से मुक्ति
 

एकाग्रता

सहज योग से लोगों में एकाग्रता बढ़ती है और जो वे जीवन में हासिल करना चाहते है आसानी से कर सकते हैं। इसलिए नियमित रूप से अपनी दिनचर्या में सहज योग को शमिल करें।  image courtesy : getty images

एकाग्रता
 

संचार कौशल

सहज योगा के नियमित अभ्यास से संचार कौशल में सुधार होता है जिससे आप लोगों से अच्छी तरह से पेश आते हैं। साथ ही दूसरों के साथ बेहतर रिश्ते जोड़ने में मदद मिलती है। image courtesy : getty images

संचार कौशल
 
 

योग शुरू करने वालों के लिए 7 आसान मुद्राएं, और करने का तरीका

शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए योगासन सबसे बेहतर विकल्‍प है। हम 7 ऐसे योग मुद्राओं के बारे में बता रहे हैं जो योग की शुरूआत करने वालों के लिए सबसे आसान है।

सुखासन

योग में सुखासन सबसे आसान योग है। सुखासन का शाब्दिक अर्थ ही है सुख देने वाला आसन यानि इस आसन को करने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से आपको सुख और शांति का अनुभव होता है। इसे करने के लिए आप जमीन पर पैर मोड़ कर आराम से बैठ जाइए। दोनों हाथों की हथेलियों को खोल कर एक-के ऊपर एक रख दीजिए। इस आसन को करते समय अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा कर के बैठें। इस बात पर ध्यान दें कि आप अधिक झुके हुए न हों। अपने कंधों को ढीला छोड़ते हुए अपनी सांस को पहले अंदर की ओर लें फिर बाहर की ओर छोड़ें।

सुखासन
 

तड़ासन

ताड़ासान योग की ही एक क्रिया है। ताड़ासन जैसा की नाम से ही विदित है ताड़ के पेड़ के समान। ताड़ासन एक ऐसी स्थिति हैं जब आपका शरीर ताड़ के पेड़ की तरह सीधा खड़ा होता है। इसे करने के लिए हाथों को ऊपर ले जाकर हथेलियों को मिलाएं और हथेलियां आसमान की तरफ होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में दोनों हाथों की अंगुलियां भी आपस में मिली होनी चाहिए। ताड़ासन के दौरान कमर सीधी और नजरें भी सामने की तरफ और गर्दन सीधी होती हैं और शरीर का पूरा भार पंजों पर आ जाता हैं और पूरे शरीर की ताकत शरीर को एक तरफ खींचने में लगती हैं।

तड़ासन
 

वृक्षासन

वृक्षासन यानी पेड़ के समान। यह आसन करने से मनुष्य की आकृति पेड़ के समान हो जाती है। यही कारण है कि इसे वृक्षासन कहते हैं। इसे करने के लिए सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं। अब दोनों पैरों के बीच कुछ दूरी बनाकर खड़े रहें। फिर हाथों को सिर के ऊपर उठाते हुए सीधा कर हथेलियों को मिला दें। अब दाहिने पैर को मोड़ते हुए उसके तलवे को बाईं जांघ पर टिका दें। बाएं पैर पर संतुलन बनाते हुए हथेलियां, सिर और कंधे एक ही सीध में हों। जब तक संभव हो ऐसे रहें। कुछ देर बाद अन्य पैर से भी यह दोहराएं।

वृक्षासन
 
 

त्रिकोणासन

त्रिकोणासन योग का ऐसा आसन है जो पेट की बीमारियों को दूर करता है। यह जांघों को मजबूत बनाता है और शरीर को शेप में लाता है। सर्वाइकल के मरीज ध्‍यान देकर इसे करें। इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े हों, फिर पैरों के बीच में 2 फिट गैप करें। दोनों हाथों को साइड में ले जाकर दायें हाथ से दायें पैर को छूने की कोशिश कीजिए। आपका बांया हाथ एकदम ऊपर की तरफ सीधा होना चाहिए। इस स्थिति में कुछ देर रुकें फिर सामान्‍य स्थिति में आयें। यही क्रिया दूसरे हाथ से भी दोहरायें। नीचे जाते वक्‍त सांस अंदर की तरफ लीजिए और ऊपर जाते वक्‍त सांस छोड़ें।

त्रिकोणासन
 

नौकासन

नौकासन पीठ के बल लेट कर किये जाने वाले आसनों में से एक महत्वपूर्ण योगासन है। इस आसन को नौकासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका आकार नाव की तरह का होता है। इसको नावासन के नाम से भी पुकारा जाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं। अपने हाथ जांघ के बगल और शरीर को एक सीध में रखें। फिर अपने शरीर को ढीला छोड़े और सांस पर ध्यान दें। अब आप सांस लेते हुए अपने सिर, पैर, और पूरे शरीर को 30 डिग्री पर उठायें। ध्यान रहे आपके हाथ ठीक आपके जांघ के ऊपर हों। धीरे-धीरे सांस लें और धीरे-धीरे सांस छोड़ें, इस अवस्था को अपने हिसाब से बनाये रखें। जब अपने शरीर को नीचे लाना हो तो लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए सतह की ओर आयें। शुरुआती दौर में 3 से 5 बार करें।

नौकासन
 

भुजंगासन

संस्कृत के शब्द भुजंग का अर्थ होता है सर्प और आसन का अर्थ है स्थिति। इस आसन को करने से रीढ़ की हड्डी सर्प की तरह लचीला हो जाती है और शरीर में गर्मी उत्पन्न होती है। इसीलिए इस आसन को भुजंगासन कहा जाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले शुद्ध वातावरण और समतल जमीन पर आसन बिछाकर पेट के बल लेट जाएं। सांस सामान्य रहे और शरीर की मांसपेशियों के शिथिल होने तक इस स्थिति में लेटें। माथे को जमीन पर और हाथों को कंधों के पास इस तरह से टिकाएं कि कोहनियां पीछे की तरफ शरीर के पास आ जाएं। टांगों और पैरों को सीधा रखते हुए आपस में मिला लें। धीरे-धीरे सांस भरें और हाथों को जमीन पर अच्छी तरह से टिकाते हुए कंधों के सहारे नाभि तक के हिस्से को इस प्रकार ऊपर की तरफ उठाएं कि छाती सामने की ओर आ जाए। गर्दन को पीछे की तरफ करते हुए ऊपर आकाश की ओर देखने का प्रयास करें। इस स्थिति में यथाशक्ति रुकने के बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पूर्व स्थिति में लौट आएं।

भुजंगासन
 

बालासन

इस आसन को करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पेट की चर्बी घटती है। शरीर के भीतरी अंगो में लचीलापन लाता है। शरीर और दिमाग को शांति देता है। इसके अलावा यह घुटनों और मासपेशियों को स्‍ट्रेच करता है। इसे करने के लिए घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं और शरीर का सारा भाग एड़ियों पर डालें। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। ध्‍यान रखें कि आपका सीना जांघों से छूना चाहिए, अब अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहें और वापस उसी अवस्था में आ जाएं।

बालासन
 
 

कहीं आप भी तो नहीं कर रहें योग के दौरान ये गलतियां

योग करते वक्त अनजाने में हम में से कुछ लोग ऐसी गलतियां करते हैं जो शरीर को फायदा की बजाय नुकसान पहुंचाती है। आइए जानें योग के दौरान हम किन गलतियां को करते हैं।

योग के दौरान की गलतियां

हमारी सेहत और बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए योग कई तरह से फायदेमंद है। लेकिन तभी तक जब तक हम योग को सही तरह से कर रहे हो। लेकिन हो सकता है योग करते वक्त अनजाने में हम भी ऐसी गलतियां कर रहे हो जिससे शरीर को फायदा होने की बजाय नुकसान हो रहा हो। सांस लेने का गलत तरीका, सही क्रम से या सहजता से आसन न करना आदि कई ऐसी सामान्य गलतियां हैं, जिनसे बचना हम अक्‍सर करते हैं। आइए जानें योग के दौरान हम किन गलतियां को करते हैं।

योग के दौरान की गलतियां
 

अनियमित करना

अक्‍सर लोग योग को नियमित तरीके से न करके, हफ्ते में एक या दो दिन करते हैं। लेकिन योग का असर प्रभावी तरीके से दिखने के लिए लगातार करना बहुत जरूरी होता है। अगर आप योग  नियमित नहीं करेंगे तो आप योग सही तरीके से नहीं कर पायेंगे और कुछ ऐसे आसन भी है जो आप आसानी से नहीं कर पाते, इसके लिए उन्‍हें नियमित करना बहुत जरूरी होता है।

अनियमित करना
 

जरुरत से ज्यादा प्रयत्न करना

नो पेन, नो गेन, खेलकूद का मंत्र है, यानी आप तब तक कुछ हासिल नहीं कर सकते जब तक आपको दर्द महसूस ना करें। लेकिन योग में इसका उल्टा होता है। योग रिलैक्स करने की प्रक्रिया है। इसमें किसी तरह का दर्द नहीं होना चाहिए। हो सकता है कि शुरुआत में योग के बाद शरीर में थोड़ा दर्द हो लेकिन नियमित योग करने से यह दर्द भी पूरी तरह से खत्म हो जाता है। इसलिए शुरुआत में जरूरत से ज्‍यादा प्रयत्‍न न करें। आसन के पोज को शुरुआत में धीरे-धीरे करें।

जरुरत से ज्यादा प्रयत्न करना
 
 

सांसों के प्रति जागरूकता

चाहे आप योग के लिए नए हैं, या आप सालों से इसका अभ्‍यास कर रहे हैं, लेकिन योग के दौरान अपनी सांसों पर ध्‍यान केंद्रित करने में आप कठिनाई महसूस कर सकते हैं। कुछ लोग तो स्‍वयं को योग में विफल मानते हैं, अगर वह योग के एक घंटे के दौरान स्‍वयं को दिमाग से साफ नहीं पाते हैं तो। लेकिन वास्‍तव में योग के दौरान 5 या 10 मिनट सांसों पर फोकस करना पर्याप्‍त होता है। इसके अलावा योग आसन करते समय आप अपनी सांस रोककर रखने का प्रयास करते हैं। लेकिन यह आदत लाभ की बजाए नुकसान पहुंचा सकती है। क्‍योंकि योग करते समय अगर आप लगातार सांस नहीं ले रहे हैं तो आपकी मांसपेशियों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचेगा जो आपके शरीर को सपोर्ट देने के लिए जरुरी है।

सांसों के प्रति जागरूकता
 

भरे पेट योग करना और योग के दौरान पानी पीना

अक्‍सर लोग खाना खाने के बाद योग करते हैं, लेकिन योग करने से ठीक पहले आपको कुछ नहीं खाना चाहिए। ऐसे करने से ना सिर्फ आपको अलग-अलग आसन करने में कठिनाई होगी बल्कि आपके शरीर का ब्‍लड सर्कुलेशन आपके पेट पर केंद्रित होने पर शरीर की मसल्‍स को सपोर्ट नहीं मिल पाएगा। इसलिए आपके भोजन और योग के बीच कम से कम 1 घंटे का अंतराल होना बहुत जरुरी होता है। इसके अलावा कई बार योग करते समय लोग बीच-बीच में पानी पी लेते हैं। लेकिन योग के 2 घंटे पहले और आधे घंटे बाद तक पानी पीना बिल्‍कुल गलत है। ऐसा करने से शरीर की एनर्जी पर असर पड़ता है।  
Image Source : Getty

भरे पेट योग करना और योग के दौरान पानी पीना
 
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जानें त्रिभुजासन करने का तरीका और इसके लाभ

त्रिभुजासन शरीर को लचीला बनाता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को बल देते हुए शरीर को कई प्रकार के रोगों से दूर रखता है। आज हम आपको बता रहे हैं त्रिभुजासन करने की विधि और इसे करने से होने वाले फायदे।

क्या है त्रिभुजासन

त्रिभुजासन एक बेहद लाभदायक आसन होता है। त्रिभुजासन को के नियमित अभ्यास से रीड़ की हड्डी लचीली बनती है और उसे बल मिलता है। साथ ही त्रिभुजासन शरीर को लचीला बनाता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को बल देते हुए शरीर को कई प्रकार के रोगों से दूर रखता है। आज हम आपको बता रहे हैं त्रिभुजासन करने की विधि और इसे करने से होने वाले फायदे।

क्या है त्रिभुजासन
 

त्रिभुजासन की पहली विधि

त्रिभुजासन को खड़े होकर किया जाता है। त्रिभुजासन को करने के लिए चित्र की तरह पहले सीधे खड़े हो जाएं और फिर अपने दोनों पैरों के बीच दो से ढाई फुट की दूरी बनाते हुए इन्हें फैला लें। इसके बाद अपने दाएं पैर को सीधा रखें और दाएं हाथ को कंधे की बिल्कुल सीध में कान से सटाकर ऊपर उठा लें और फिर बाएं पैर को घुटनों से मोड़ते हुए धीरे-धीरे बाईं ओर झुकते हुए बाएं हाथ की अंगुलियों से बाएं पैर के अंगुठे को छुएं। 2 से 3 मिनट तक इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं। अब इस क्रिया को इसी तरह से दाएं ओर से भी दोहराएं। इस करते हुए ध्यान रखें की ऊपर रखे हुए हाथ की हथेली हमेशा सामने की ओर हो।

त्रिभुजासन की पहली विधि
 

त्रिभुजासन करने की दूसरी विधि

त्रिभुजासन की दूसरी विधि में इस आसन को खड़े होकर करने के बजाए नीचे बैठ कर किया जाता है। इस विधि से त्रिभुजासन करने के लिए अपने दाएं पैर को आगे फैलाकर बैठ जाएं। दाएं पैर को बिल्कुल सीधा व तान कर रखें तथा बाएं पैर को घुटने से मोड़कर पीछे ले जाते हुए एड़ी को नितम्ब (कूल्हे) से सटाकर रख लें। इसके बाद अपने दोनों हाथों को फैलाकर सिर व छाती को आगे की ओर झुकाते हुए दाएं हाथ से दाएं पैर के पंजे को और फिर बाएं हाथ से बाएं पैर के पंजे को पकड़ने की कोशिश करें या छुएं। इस दौरान सांस सामान्य रूप से लें और छोड़ें। कुछ समय तक इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं और फिर बाएं पैर को बिल्कुल सीधा रखें और दाएं पैरों को पीछे ले जाकर इस क्रिया को दोहराएं। इस तरह दोनों पैरों को बदल-बदलकर इस आसन का अभ्यास करें।

त्रिभुजासन करने की दूसरी विधि
 
 

त्रिभुजासन करने के लाभ

इस आसन से मेरूदंड (रीढ़ की हड्डी व शरीर के निचला भाग) पर अधिक प्रभाव होता है और रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है। इससे शरीर का संचालन व घुमाव बेहतर ढंग से हो पाता है। यह आसान करने से पाचन शक्ति ठीक होती है और भूख बढ़ाती है। इससे नितम्ब, ऊपरी जांघ (नारूआ या पिंडली) की हड्डियों पर चोट लगने के कराण हुआ लंगड़ापन दूर होता है। साथ ही त्रिभुजासन करने से पूरे शरीर में रक्त संचार (खून का बहाव) तेज होता है और शरीर के सभी अंगों में स्फूर्ति आती है। यह आसन शारीरिक की कार्य क्षमता को भी बढ़ाता है।

त्रिभुजासन करने के लाभ
 
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इस तरह योग से कम करें सेल्‍यूलाइट

यदि आप सेल्यूलाइट को अपने शरीर से हटाना चाहती हैं तो कुछ योग मुद्राएं सेल्यूलाइट से छुटकारा पाने में आपकी मदद कर सकती है। आइए ऐसी ही कुछ योग मुद्राओं की जानकारी लेते हैं।

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सेल्‍यूलाइट दूर करने वाले योग

लगभग हर उम्र की महिलाओं के पैरों, हिप्‍स या पेट पर सेल्‍यूलाइट होता है। 90 प्रतिशत महिलाएं सेल्यूलाइट से पींडित होती ही हैं। कई महिलाओं में इसका कारण हार्मोनल बदलाव होता है, तो कई महिलाओं में यह समस्या वंशानुगत या वसा जमा होने के कारण हो जाती है। फैट सेल्स के त्वचा के बाहरी परत से होकर बाहर की ओर उभरने से बनी एक डिम्पल जैसी गड्ढेदार दिखने वाली चीज को सेल्यूलाइट कहते हैं। यानी सेल्यूलाइट ऐसी क्लंपी असमान टेक्शचर स्किन है जो अक्सर आपकी थाइस, बटक्स और पेट पर दिखती है। यदि आप सेल्यूलाइट को अपने शरीर से हटाना चाहती हैं तो कुछ योग मुद्राएं सेल्यूलाइट से छुटकारा पाने में आपकी मदद कर सकती है। आइए ऐसी ही कुछ योग मुद्राओं की जानकारी लेते हैं।

सेल्‍यूलाइट दूर करने वाले योग
 

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उत्तानासन

उत्तानासन के नियमित अभ्यास से शरीर के पिछले भागों का सम्पूर्ण एक्‍सरसाइज होती है और इन भागों में मौजूद तनाव दूर होता है। यह पैरों के पार्श्व भागों को लचीला और मजबूत बनाने वाली योग मुद्रा है। साथ ही सेल्‍यूलाइट भी आपके शरीर से दूर होता है। इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं। लंबी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की तरफ ले जाएं। फिर आगे झुककर दोनों हाथों से जमीन छुएं। इस दौरान घुटने न मोड़ें। कुछ देर इस मुद्रा में रहने के बाद हाथ पुनः ऊपर की तरफ ले जाएं और सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में खड़े हो जाएं।

उत्तानासन
 

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उत्कटासन (चेयर मुद्रा)

उत्कटासन कोर की मांसपेशियों यानी जांघों और नितंबों को मजबूत बनाने और टोन में मदद करता है। जिससे सेल्‍यूलाइट शरीर से दूर होता है। उत्‍कटासन में आपकी मुद्रा चेयर के सामान हो जाती है इसलिए इसे चेयर मुद्रा भी कहते हैं। इसे करने के लिए सीधे हाथ जोड़कर (नमस्ते की मुद्रा) खड़े हो जाओ। पैरों के पंजे भूमि पर टिके हुए हों तथा एड़ियों के ऊपर नितम्ब टिकाकर बैठ जाइए। दोनों हाथ घुटनों के ऊपर तथा घुटनों को फैलाकर एड़ियों के समानान्तर स्थिर करें। अपने सिर को हल्का आगे मोड़ें। इस मुद्रा में तब तक रहें जब तक आप सहज हो। आसन से बाहर आने के लिए आराम से सीधा खड़ा हो जाएं।

उत्कटासन (चेयर मुद्रा)
 
 

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गरुड़ासन

गरुड़ासन को ईगल मुद्रा भी कहते है। पैरों की मजबूत मांसपेशियों के निर्माण के अलावा ईगल मुद्रा पूरे शरीर को एनर्जी प्रदान करने और पाचन में मदद करती है। इस आसन को करने के लिए सावधान मुद्रा में खड़े होकर बाएं पैर को ऊपर उठाते हुए दाहिने पैर में लपेटकर इस तरह जमीन पर रखें कि बाएं घुटने पर दाहिने घुटने का निचला भाग टिका रहे। अब दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाते हुए कोहिनों को क्रास कर लपेट लें और दोनों हथेलियों को मिलाकर चेहरे के सामने नमस्कार मुद्रा बना लें। सांसों को सामान्य रखते हुए कुछ देर इसी अवस्था में रहें। फिर दूसरी तरफ से भी इस मुद्रा को दोहराये।

गरुड़ासन
 

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गोमुखासन

गोमुखासन योग मुक्त कणों और तनाव का मुकाबला कर झुर्रियों की समस्‍या को दूर करता है। साथ ही यह मसल्‍स को टोन और स्‍ट्रेच कर आपको बेहतर, लंबा और सुंदर पोश्चर देता है। गोमुख आसन में आकृति गाय के मुख के समान बनने के कारण इसे गोमुखासन कहते हैं। यह आसन कूल्‍हों और कमर की चर्बी को कम, रीढ की हड्डी को सीधा और बॉडी पॉश्‍चर को सुधरता है। इसे करने के लिए बायें पैर की एड़ी को दायें कूल्‍हे के नीचे रखें और दायें पैर को बायें पैर के ऊपर से ले जाते हुए जमीन पर रखें। अब दायें हाथ को कान के पास से ले जायें और दूसरे हाथ को पीठ के पीछे पकड़ें। दोनों हाथों की उंगलियां आपस में पकड़कर रखें और सिर को सीधा रखें। 
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गोमुखासन
 

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सेतुबंधासन

सेतुबंधासन से जांघ व घुटनों को मजबूती मिलती है और कोर मसल्स मजबूत बनते हैं और पाचन तंत्र स्वस्थ व मजबूत बना रहता है। इस आसन को करने के लिए चटाई के बल सीधे लेट जाये। अब सांस छोड़ते हुए पैरों के बल ऊपर की ओर उठें। अपने शरीर को इस तरह उठाएं कि आपकी गर्दन और सिर फर्श पर ही रहे और शरीर का बाकी हिस्सा हवा में। ज्‍यादा सहारा पाने के लिए आप अपने हाथों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अगर आपमें लचीलापन है तो अतिरिक्त स्ट्रेचिंग के लिए आप अपनी उंगलियों को ऊपर उठी पीठ के पीछे भी ले जा सकते हैं। लेकिन अगर आपकी गर्दन या पीठ में चोट लगी हो तो इस आसन को न करें। 
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सेतुबंधासन
 
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जानें योग मैट पर ही क्‍यों करना चाहिए

मॉडर्न योगा कम्युनिटी में योग करने के लिये सही मैट या मैट के इस्तेमाल को लेकर कई शंकाएं हैं। बाजार में भी कई प्रकार के योग मैट मौजूद हैं, जो उन्हें और भी उलझाते हैं। तो चलिये जानें योग और इसे करने के लिये मैट से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां।

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योग करने के लिये मैट का इस्तेमाल

मॉडर्न योगा कम्युनिटी में योग करने के लिये सही मैट या मैट के इस्तेमाल को लेकर कई शंकाएं हैं। बाजार में भी कई प्रकार के योग मैट मौजूद हैं, जो उन्हें और भी उलझाते हैं। तो चलिये जानें योग और इसे करने के लिये मैट से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां। 
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योग करने के लिये मैट का इस्तेमाल
 

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मैट की जरूरत

योग सैंकड़ो या कहिये उससे भी पुराने समय से किया जा रहा है। योगियों ने इसे पानी, पत्थर, लकड़ी, चट्टानों और हर महौल और जगह इसे किया है। लेकिन अब योग को एक नई परिभाषा मिली है, और यदि लोग इसके चलते योग करने को प्रेरित होते हैं तो इसमें कोई बुरी बात भी नहीं। तो जरूरत के हिसाब से मैट का इस्तेमाल करना सही भी है। लेकिन किस तरह के मैट का इस्तेमाल करें? .. 
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मैट की जरूरत
 

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योग की शुरुआत कर रहे लोगों के लिये मैट की जरूरत

जो लोग योग करने की शुरुआत कर रहे हैं वे मैट का इस्तेमाल कर सकते हैं। लिखित और मौखिक योग परंपरा बताती हैं कि पुराने योगी भी घास या जानवरों की खाल से हाथ से बनाए मैट्स का इस्तेमाल किया करते थे। तो आप सिंथेटिक मेट या हाथ से बुने मैट का इस्तेमाल कर सकते हैं। 
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योग की शुरुआत कर रहे लोगों के लिये मैट की जरूरत
 
 

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योगा मैट्स के इस्तेमाल के फायदे

सबसे अहम बात कि मैट, गद्दी का काम करता है, सपोर्ट देता है और अन्य बाधक कारकों को रोकता है। कई लोगों को ज़मीन पर योग के दौरान उनकी हथेलियों, घुटने, कोहनी, और कशेरुकाओं दबाने पर दर्द और असुविधा होती है। इन लोगों के लिये मैट सहायक होता है।  
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योगा मैट्स के इस्तेमाल के फायदे
 

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कुछ आसन करने के लिये मैट जरूरी

विन्यास फ्लो, जैसे कुछ आसनों को सीधे फ्लोर पर नहीं किया जाता है। क्योंकि इससे कलाइयों पर ज्यादा जोर पड़ता है। वहीं तड़ासन और वृक्षासन, दाढो मुख श्वनासन और कुम्भ्कासन जैसे आसनों को करने के लिये मैट की जरूरत पड़ती है। 
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कुछ आसन करने के लिये मैट जरूरी
 
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बुखार के लक्षणों से आराम दिला सकते हैं ये 7 योगासन

बुखार एक सामान्‍य समस्‍या है जो किसी भी वक्‍त हो सकती है, इससे आराम पाने के लिए जरूरी नहीं दवाओं का सेवन किया जाये, बल्कि योग के कुछ आसन ऐसे भी हैं जो इसके लक्षणों से आराम पहुंचाते हैं।

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योग और बुखार

बदलते मौसम में बुखार हो जाना आम बीमारी होती है। आमतौर पर बुखार बैक्टीरियल इंफेक्शन या वातावरण में बदलाव के कारण होता है। जब हमारा प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) ठीक से काम नहीं करता तब बैक्‍टीरिया हमारे शरीर पर हावी होकर इसे बीमार बना देते हैं। इससे शरीर का तापमान बढ़ जाने के साथ ही गला खराब होना, शरीर में दर्द, सरदर्द आदि समस्याएं होती हैं। ऐसे में जरूरी नहीं आप दवाओं का सेवन करें, बल्कि दवाओं की जगह आप योग के आसन आजमायें, इससे शरीर का तापमान सामान्‍य होगा और बुखार के लक्षणों के आराम भी मिलेगा।

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योग और बुखार
 

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कपालभाति प्राणायाम

ये नाक के रास्ते को साफ करे वाला योगासन है। नियमित इसका अभ्‍यास करने से कई बीमारियों के होने की संभावना कम होती है। रोज नियम से 3 से 5 मिनट कपालभाति प्राणायाम करने से नींद भी अच्छी आती है। इसे करने के लिए सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं, फिर लंबी सांस लें। अब सांस को छोड़ें जिससे पेट पर जोर पड़े। इसे करने से आपके शरीर के 80 फीसदी विषाक्‍त पदार्थ बाहर निकल जाते है।

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कपालभाति प्राणायाम
 

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अनुलोम-विलोम प्राणायाम

अनुलोम-विलोम से शरीर की सफाई होती है और पूरा शरीर शुद्ध हो जाता है। ये सर्दी से बचाता है। इस आसन के लिए सुखासन में बैठ जाएं। फिर दाएं हाथ के अंगूठे से नाक का दाया छिद्र बंद करें और सांस भीतर की ओर खींचे। फिर उसी हाथ की दो उंगलियों से बाईं ओर का छिद्र बंद कर दें और अंगूठा हटाकर दाईं ओर से सांस छोड़ें। इसी प्रक्रिया को फिर नाक के दूसरे छिद्र से दोहराएं। 
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अनुलोम-विलोम प्राणायाम
 
 

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नाड़ी शोधन प्राणायाम

शोधन प्राणायाम नर्वस सिस्टम को बहुत राहत देता है, जिससे हमारे शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है। किसी भी सुखासन में बैठकर कमर को सीधा करें और आंखें बंद कर लें। दाएं हाथ के अँगूठे से दायीं नासिका बंद कर पूरा श्वांस बाहर निकालें। अब बायीं नासिका से श्वांस अंदर लें, तीसरी अंगुली से बायीं नासिका को भी बंद कर आंतरिक कुंभक करें। जितनी देर स्वाभाविक स्थिति में रोक सकते हैं, इसको रोकें। फिर दायां अंगूठा हटाकर श्वांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। फिर दायीं नासिका से गर्दन उठाकर श्वांस को रोकें और इसे फिर बायीं नासिका से धीरे से निकाल दें।
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नाड़ी शोधन प्राणायाम
 

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शीतली प्राणायाम

शीतली का अर्थ होता है ठंडक और प्रणायाम का मतलब जो पूरे शरीर को ठंडा करे। शीतली प्राणायाम से गर्मी से निजात पाई जा सकती है। इसके अलावा यह मन को शांति और शारीरिक शीतलता प्रदान करता है। इसके करने के लिए सबसे पहले रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी सुखासन में बैठ जाएं। फिर जीभ को बाहर निकालकर उसे इस प्रकार मोड़ें कि वह एक ट्यूब या नली के आकार जैसी बन जाए। फिर इस नली के माध्यम से ही धीर-धीरे मुंह से सांस लें। हवा नलीनुमा इस ट्यूब से गुजरकर मुंह, तालु और कंठ को ठंडक प्रदान करेगी।
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शीतली प्राणायाम
 

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मत्स्यासन प्राणायाम

मत्स्य का अर्थ है- मछली। इस आसन में शरीर का आकार मछली जैसा बनता है, अत: यह मत्स्यासन कहलाता है। यह आसन छाती को चौड़कर उसे स्वस्थ बनाए रखने में सक्षम है। पहले पद्मासन लगाकर बैठ जाएँ। फिर पद्मासन की स्थिति में ही सावधानीपूर्वक पीछे की ओर च‍ित होकर लेट जाएँ। ध्यान रहे क‍ि लेटते समय दोनों घुटने जमीन से ही सटे रहें। फिर दोनों हाथों की सहायता से शिखास्थान को भूमि पर टिकाएँ। तत्पश्चात बाएँ पैर के अँगूठे और दोनों कोहनियों को भूमि से लगाए रखें।एक मिनट से प्रारम्भ करके पाँच मिनट तक अभ्यास बढ़ाएँ। फिर हाथ खोलकर हाथों की सहायता से सिर को सीधा कर कमर, पीठ को भूमि से लगाएँ। पुन: हाथों की सहायता से उठकर बैठ जाएँ। आसन करते वक्त श्वास-प्रश्वास की गति सामान्य बनाए रखें।
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मत्स्यासन प्राणायाम
 

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सर्वांगासन

इस आसन से आपका रक्त संचार सही रहता है और ऊर्जा का स्तर भी बनाए रखता है। इस आसन में शरीर के सारे अंगों का व्यायाम एक साथ हो जाता है इसलिए इसे सर्वांगासन का नाम दिया गया है।सपाट जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को शरीर के साइड में रखें। दोनों पैरो को धीरे-धीरे ऊपर उठाइए। पूरा शरीर गर्दन से समकोण बनाते हुए सीधा लगाएं और ठोड़ी को सीने से लगाएं। इस पोजीशन में 10 बार गहरी सांस लें और फिर धीरे-धीरे नीचे आएं।
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सर्वांगासन
 

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विपरीत करणी मुद्रा की अभ्यास विधि

पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों हाथों को शरीर के बगल में जमीन पर रखें। अब सजगता के साथ एक गहरी श्वास-प्रश्वास लें। इसके बाद दोनों पैरों को जमीन से ऊपर उठाएं। पैरों को उठाते ही नितम्ब को एक हल्के झटके के साथ जमीन से ऊपर उठाएं। पैरों को उठाते ही नितम्ब को एक हल्के झटके के साथ जमीन से ऊपर उठाकर हाथों को कमर पर रख दें। हाथों के सहारे, पैर तथा कमर को जमीन से ऊपर उठाकर रखें। शरीर का भार गर्दन तथा हाथों पर रखें। इस स्थिति में धड़ जमीन से 45 डिग्री के कोण पर स्थित रहता है। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक (1 से 5 मिनट) रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं। 
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विपरीत करणी मुद्रा की अभ्यास विधि
 
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डायबिटीज में ब्लड शुगर नियंत्रित करने के 8 योग

डायबिटीज की समस्‍या होने पर ब्लड सेल्स शरीर में उत्पन्न इन्सुलिन पर प्रतिक्रया देना बंद कर देते हैं। लेकिन नियमित रूप से योग करने से शरीर इन्सुलिन के लिए प्रतिक्रया देना शुरू कर देता है जिससे ब्लड ग्लूकोज को कम करने में मदद मिलती है।

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डायबिटीज को दूर करने में योग की भूमिका

डायबिटीज रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ रही है या यूं कहें कि यह समस्या आम हो गई है। शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कमी या उसके निर्माण में अनियमितता के कारण डायबिटीज होती है। वजन में कमी आना, अधिक भूख प्यास लगना, थकान, बार-बार संक्रमण होना, देरी से घाव भरना, हाथ-पैरों में झुनझुनाहट ये सभी डायबिटीज के लक्षण हैं। ब्लड शुगर को नियंत्रित करने का एक अहम हथियार नियमित व्यायाम है, और योग इसका एक बेहद पुराना और असरदार हिस्सा। डायबिटीज की समस्‍या होने पर ब्लड सेल्स शरीर में उत्पन्न इन्सुलिन पर प्रतिक्रया देना बंद कर देते हैं। लेकिन नियमित रूप से योग करने से शरीर इन्सुलिन के लिए प्रतिक्रया देना शुरू कर देता है जिससे ब्लड ग्लूकोज को कम करने में मदद मिलती है। 
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डायबिटीज को दूर करने में योग की भूमिका
 

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सेतुबंधासन

सेतुबंधासन रक्‍तचाप नियंत्रित करने, मानसिक शान्ति देने और पाचनतंत्र को ठीक रखने में मदद करता है। गर्दन और रीढ़ की स्ट्रेचिंग के साथ-साथ यह आसन मासिक धर्म में आने वाली समस्‍याओं से भी निजात दिलाता है। इस आसन को करने के लिए चटाई के बल सीधे लेट जाये। अब सांस छोड़ते हुए पैरों के बल ऊपर की ओर उठें। अपने शरीर को इस तरह उठाएं कि आपकी गर्दन और सर फर्श पर ही रहे और शरीर का बाकी हिस्सा हवा में। ज्‍यादा सहारा पाने के लिए आप अपने हाथों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अगर आपमें लचीलापन है तो अतिरिक्त स्ट्रेचिंग के लिए आप अपनी उंगलियों को ऊपर उठी पीठ के पीछे भी ले जा सकते हैं। लेकिन अगर आपकी गर्दन या पीठ में चोट लगी हो तो इस आसन को न करें। 
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सेतुबंधासन
 

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सर्वांगासन

यह योगा करने से गले के आसपास पाई जाने वाली थॉयराइड और पैराथाइराइड ग्रंथियों ( मोटापा, प्रोटीन और कार्बोहाइडेट मेटाबोलिज्म के लिए उत्तडरदायी ग्रंथियां) को मजबूती मिलती है। साथ ही इस आसन को करने से ग्रंथियों में रक्‍तसंचार सुचारु हो जाता है। इस योग को करने के लिए आराम से किसी चटाई पर लेटकर दोनों हाथ फैला लीजिए, फिर धीरे-धीरे दोनों पैरों को उपर कीजिए, फिर हाथों से कमर को पकडकर पूरे शरीर को हवा में कीजिए और शरीर का पूरा भाग गर्दन पर हो जाने दीजिए। अपने पैरों को सीधा रखिए। लेकिन ध्‍यान रहें उच्‍च रक्‍तचाप से पीड़ित व्‍यक्ति को यह आसन किसी प्रशिक्षक के निरीक्षण में ही करना चाहिए। 
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सर्वांगासन
 
 

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प्राणायाम

प्राणायाम में गहरी सांस लेना और छोड़ना रक्त संचार को दुरुस्त करता है। प्राणायाम 8 प्रकार का होता है जिसमें से भ्रामरी और भास्रिका प्राणायाम डायबिटीज के लिए ज्यादा लाभकारी होते हैं। भ्रामरी प्राणायाम करने से मन, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को फायदा होता है। भास्रिका प्राणायाम खून में ऑक्सीजन स्‍तर को बढाता है और कार्बन-डाइआक्साइड के स्‍तर को कम करता है। ज्यादा तेजी से सांस को अंदर-बाहर करना, गहरी सांस लेना अच्छे से सीखना चाहिए। इस आसन को करने के लिए फर्श पर चटाई बिछाकर या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। फिर गहरी सांस लें और पांच की गिनती तक सांस रोककर रखें। अब धीरे धीरे सांस छोड़ें। इस पूरी प्रक्रिया को कम से कम दस बार दोहराएं। 
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प्राणायाम
 

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कुर्मासन

इस आसन से अग्न्याशय (पेन्क्रियाज) को सक्रिय करने में मदद मिलती है। जिससे इंसुलिन अधिक मात्रा में बनने के कारण डायबिटीज से दूर रहा जा सकता है। इसके अलावा यह उदर और हृदय रोग में भी लाभदायक होता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले  वज्रासन में अच्छे से बैठकर कोहनियों को नाभि के दोनों ओर लगाइए। फिर धीरे से हथेलियों को ऊपर की ओर रखते हुए दोनों हाथों को मिलाकर सीधा रखें। इसके बाद श्वास बाहर निकालते हुए सामने झुकिए। फिर ठोड़ी को हथेलियों से स्पर्श कीजिए। इस दौरान अपनी नजरों को सामने रखें। श्वास लेते हुए वापस आएं या श्वास-प्रश्वास की गति सामान्य रखते हुए लगभग एक मिनट तक यथा स्थिति में बने रहें।
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कुर्मासन
 

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वज्रासन

वज्रासन बेहद सामान्य आसन है जो मानसिक शान्ति देने के साथ पाचन तंत्र को ठीक रखता है। यही एक आसन है, जिसे भोजन के बाद भी कर सकते हैं। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को आपस में मिलाकर सीधा फैलाकर बैठ जाएं। बाएं पैर को घुटने से मोड़कर पंजे को बाएं नितम्ब के नीचे इस प्रकार लगाएं कि पैर का तलवा ऊपर की ओर ही रहे। इसी प्रकार, दाएं पैर को घुटने से मोड़कर पंजे को दाएं नितम्ब के नीचे इस प्रकार लगाएं कि पैर का तलवा ऊपर की ओर रहे। इस स्थिति में दोनों पैरों के अंगूठे पास-पास रहेंगे तथा एडियां बाहर की ओर रहेंगी, जिससे दोनों एडियों के बीच में आराम से बैठ सकें। दोनों पैरों के घुटने मिलाकर, हाथों को घुटनों के ऊपर रख दें। इस स्थिति में सिर एवं रीढ़ स्तम्भ सीधा रहना चाहिए। अपनी आंखें बंद करें और एक गति में गहरी सांस लें। 
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वज्रासन
 

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अर्ध मत्स्येन्द्रासन

यह आसन विशेष रूप से आपके फेफड़ों की सांस लेने और ऑक्सीजन को अधिक समय तक रोकने की क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। साथ ही यह रीढ़ को आराम देता है और पीठ दर्द या पीठ संबंधी परेशानियों से निजात दिलाता है। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं। अब बाये पैर को घुटने से मोड़कर इसकी एड़ी को दाये नितम्ब के नीचे रखिए। तत्पश्चात दाये पैर को घुटने से मोड़कर इसके पंजे को बाये घुटने के पार रखिए तथा दाये घुटने को सीने की तरफ रखिए। अब बाये हाथ को दाये पैर के घुटने के पास रखते हुए दाये पंजे के पास ले जाएं। दाये हाथ को पीठ के पीछे रखकर धड़ तथा सिर को भी दायी तरफ यथासंभव मोड़ें। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं। यही क्रिया दूसरी तरफ भी कीजिए। 
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अर्ध मत्स्येन्द्रासन
 

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हलासन

इस आसन में शरीर का आकार हल जैसा बनता है। इससे इसे हलासन कहते हैं। हलासन हमारे शरीर को लचीला बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे हमारी रीढ़ सदा जवान बनी रहती है। साथ ही यह आसन थायराइड ग्रंथि, पैराथायराइड ग्रंथि, फेफड़ों और पेट के अंगों को उत्तेजित करता है जिससे रक्त का प्रवाह सिर और चेहरों की और तेज हो जाता है। इससे पाचन प्रक्रिया में सुधार होता है और हार्मोंन का स्तर नियंत्रण में रहता है। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल भूमि पर लेट जाए। आपके एड़ी-पंजे मिले होने चाहिए। अब हाथों की हथेलियों को भूमि पर रखकर कोहनियों को कमर से सटाए रखें। अब श्वास को सुविधानुसार बाहर निकाल दें। फिर दोनों पैरों को एक-दूसरे से सटाते हुए पहले 60 फिर 90 डिग्री के कोण तक एक साथ धीरे-धीरे भूमि से ऊपर उठाते जाएं। लेटने वाली मुद्रा में वापस लौटने के लिए पैरों को वापस लाते हुए सांस लें। एकदम से नीचे न आएं। 
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हलासन
 

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मंडूकासन

मंडूकासन करते समय शरीर की आकृति मंडूक अर्थात् मेंढक के सामान लगती हैं, इसलिए इसे मंडूकासन नाम दिया गया है। पेट के लिए अत्यंत ही लाभयादयक इस आसन से अग्नयाशय सक्रिय होता है जिसके कारण डायबिटीज के रोगियों को इससे लाभ मिलता है।  इस आसन को करने के लिए सर्वप्रथम दंडासन में बैठते हुए वज्रासन में बैठ जाएं फिर दोनों हाथों की मुठ्ठी बंद कर लें। मुठ्ठी बंद करते समय अंगूठे को अंगुलियों से अंदर दबाइए। फिर दोनों मुठ्ठियों को नाभि के दोनों ओर लगाकर श्वास बाहर निकालते हुए सामने झुकते हुए ठोड़ी को भूमि पर टिका दें। थोड़ी देर इसी स्थिति में रहने के बाद वापस वज्रासन में आ जाए।
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मंडूकासन
 
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10 मिनट का योगासन जो करे मोटापे का खात्‍मा

योग का अभ्‍यास आपके मन और आत्‍मा के लिए तो अच्‍छा होता ही है। साथ ही यह तेजी से वसा को जलाने में भी आपकी मदद करता है।

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योग से पाये वसा से छुटकारा

ज्यादातर लोग योग को ध्यान अभ्यास के रूप में जानते हैं, लेकिन योग ध्येय अभ्यास से कुछ ऊपर है। यह वसा को जलाने के लिए कार्डियों के रूप में प्रभावी एक्‍सरसाइज है। योग का अभ्‍यास आपके मन और आत्‍मा के लिए अच्‍छा है। और साथ ही यह तेजी से वसा को जलाने में मदद करता है। आइए आसान योग मुद्राओं पर नजर डाले जो आप 10 मिनट में कर सकते हैं। image courtesy : getty images

योग से पाये वसा से छुटकारा
 

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भुजंगासन (कोबरा पोज)

भुजंगासन पेट की आसपास की वसा को जलाने के साथ-साथ पेट को मजबूत बनाने वाली मुद्रा है। इसे अंग्रेजी में कोबरा पोज कहते हैं। यह दिखने में फन फैलाए एक सांप की तरह होता है, इसलिए इसे भुजंगासन कहते है। इसे करने के लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब दोनों हाथ के सहारे शरीर के कमर से ऊपरी हिस्से को ऊपर की तरफ उठाएं, लेकिन कोहनी आपकी मुड़ी होनी चाहिए। अब शरीर के बाकी हिस्सों को बिना हिलाए-डुलाए चेहरे को बिल्कुल ऊपर की ओर करें। कुछ देर के लिए इस मुद्रा में ही रहें। image courtesy : getty images

भुजंगासन (कोबरा पोज)
 

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वृक्षासन (ट्री मुद्रा)

वृक्षासन आपके पेट से वसा को दूर करने के लिए सबसे आसान और आदर्श आसनों में से एक है। साथ ही इस आसन से टांगों की वसा कम होती हैं और शरीर का संतुलन बेहतर है। इसे करने के लिए योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और अपने पैर जोड़ लें। अब अपना दायां पैर, अपनी बाईं जांघ पर रखें। आपके दाएं पैर का अंगूठा नीचे जमीन की तरफ हो और बाएं पैर की उंगलियां सामने की तरफ। ध्‍यान रखें कि आपकी पीछे से गर्दन, रीढ़ की हड्डी की रेखा में सीधी होनी चाहिए। image courtesy : getty images

वृक्षासन (ट्री मुद्रा)
 
 

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वीरभद्रासन (योद्धा मुद्रा)

अगर आप जांघों, कूल्‍हों और पेट पर जमा वसा को लेकर चिंतित है। तो वीरभद्रासन आपकी मदद कर सकता है। यह आसन शरीर की अवांछित चर्बी को कम करता है। इसक करने के लिए अपने दोनों पैरों पर सीधे खड़े हो जाएं। ध्यान रहे कि दोनों पैरों के बीच कम से कम 3 से 4 फीट की दूरी होनी चाहिए। अब अपने बाएं पैर को सीधा रखें, इसे हल्की बायीं ओर ही घुमाए रखें। दाएं पैर को थोड़ा आगे बढ़ाएं और इसके बाद दोनों पैरों को मोड़ें। अपने हाथों को नमस्‍ते का आकार देते हुए ऊपर की ओर रखें। पुरानी मुद्रा में आने से पहले थोड़ी देर इसी मुद्रा में रहें और दोबारा इस आसन को दूसरे पैर से करें। image courtesy : getty images

वीरभद्रासन (योद्धा मुद्रा)
 

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अपनासना

इस आसन को करने से पेट के आसपास की वसा से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। साथ ही यह पीठ, और गर्दन तथा जांघ की मांसपेशियों को आराम दिलाने वाला एक  उत्तम आसन है। इसे करने के लिए पीठ के बल फर्श पर लेट जाये और अपनी हथेलियों को अपने घुटनों पर रखें। फिर सांस को छोड़ते हुए घुटनों को सीने तक खींचों। जांघों पर जोर देकर पैरों को उठायें न कि अपने हाथों पर। इस मुद्रा में 15 सेकंड के लिए रुको। image courtesy : getty images

अपनासना
 

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अर्ध चंद्रासन (आधा चांद मुद्रा)

अर्ध चंद्रासन भी जांघों और नितंबों की चर्बी को कम करने के लिए बहुत अच्छा है। इसके अलावा अतिरिक्त स्ट्रेच से पेट की चर्बी भी कम होकर आपका शरीर मजबूत बनता है। इसे करने के लिए, शुरू करने के साथ ही अपने पैरों को एक साथ करके  खड़े हो जाये। फिर दाएं हाथ को उपर सीधा कान और सिर से सटा हुआ रखते हुए ही कमर से बाईं ओर झुकते जाएं। जहां तक हो सके बाईं ओर झुके फिर इस अर्ध चंद्र की स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहें। वापस आने के लिए धीरे-धीरे पुन: सीधे खड़े हो जाएं। इस आसन को 4 से 5 बार करने से लाभ होगा। image courtesy : getty images

अर्ध चंद्रासन (आधा चांद मुद्रा)
 

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उत्कटासन (चेयर मुद्रा)

उत्कटासन कोर की मांसपेशियों (जांघों और नितंबों) को मजबूत बनाने और टोन में मदद करता है। सीधे हाथ जोड़कर (नमस्ते में मुद्रा) खड़े हो जाओ। पैरों के पंजे भूमि पर टिके हुए हों तथा एड़ियों के ऊपर नितम्ब टिकाकर बैठ जाइए। दोनों हाथ घुटनों के ऊपर तथा घुटनों को फैलाकर एड़ियों के समानान्तर स्थिर करें। अपने सिर को हल्का आगे मोड़ें। इस मुद्रा में तब तक रहें जब तक आप सहज हो। आसन से बाहर आने के लिए आराम से सीधा खड़ा हो जाएं। image courtesy : getty images

उत्कटासन (चेयर मुद्रा)
 

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धनुरासन (बो मुद्रा)

एक अन्‍य योग वसा को जलाने के लिए बहुत ही प्रभावी होता है। इसे करने के लिए फर्श पर उल्टा लेट जाओ। फिर अपने दोनों पैरों को मोड़कर हाथ से पकड़ें और उन्‍हें नितम्‍बों तक लाने की कोशिश करें। नीचे व ऊपर से खुद को स्ट्रेच करें। अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर 5 सेकंड के लिए इस मुद्रा में रुकें। image courtesy : getty images

धनुरासन (बो मुद्रा)
 

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शवासन (मुर्दा मुद्रा)

इस आसन को करने से शरीर और मन तनावमुक्त होता है, और शरीर की चर्बी कम होती है। शवासन को करना बहुत आसान है। इसे करने के लिए आप चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं और हाथ-पांव को थोड़ा बाहर की तरफ सीधा रखें। अपने शरीर के हर अंग को रिलैक्स होने दें। अब अपनी आंखों को बंद करके सांस को खीचें और बाहर निकालें। इस आसन को आप किसी भी समय कर सकते हैं। इसका एक सेशन 5-6 मिनट का रखें। image courtesy : getty images

शवासन (मुर्दा मुद्रा)
 
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साइनस को हफ्तेभर में खत्म करते हैं ये 2 योगासन, जरूर करें ट्राई

साइनस नाक से संबंधित बीमारी है जो सर्दी के मौसम में होती है, सिरदर्द, नाक बंद होना, अधकपारी, हल्‍का बुखार जैसी समस्‍या होती है, योग के जरिये इस समस्‍या से राहत मिल सकती है।

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साइनस की समस्‍या

साइनस नाक से संबंधित समस्‍या है। यह समस्‍या सर्दी के मौसम में अधिक होती है। इसके कारण नाक बंद होना, सिर में दर्द, आधे सिर में बहुत तेज दर्द होना, नाक से पानी गिरना आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा हल्का बुखार, आंखों में पलकों के ऊपर या दोनों किनारों पर दर्द रहता है, तनाव के कारण चेहरे पर सूजन भी आती है। यही रोग आगे चलकर अस्थमा, दमा जैसी गंभीर बीमारियों में भी बदल सकता है। लेकिन योग के जरिये इस समस्‍या से बचाव हो सकता है।

साइनस की समस्‍या
 

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सूर्य नमस्‍कार

सूर्य नमस्‍कार को सभी आसनों का सार माना जाता है, इससे साइनस की समस्‍या में आराम मिलता है। सूर्य नमस्कार सुबह के वक्‍त खुले में उगते सूरज की तरफ मुंह करके करना चाहिए। इससे शरीर को ऊर्जा के साथ-साथ विटामिन डी भी मिलता है। इसके 12 आसन होते हैं जिन्‍हें करने से साइनस में आराम मिलता है। यह तनाव कम कर वजन घटाने में भी कारगर है।

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सूर्य नमस्‍कार
 

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पश्चिमोत्तानासन

यह आसन बहुत आसान है और इसे करते वक्‍त थकान भी नहीं लगती है। यह आसन साइनस के साथ-साथ अनिद्रा के उपचार में भी फायदेमंद है। इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे बैठ जाएं और दोनों पैरों को फैलाकर एक सीध में रखें, दोनों पैरों को सटाकर रखें। दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएं और कमर को एकदम सीधा रखें। फिर झुककर दोनों हाथों से पैरों के दोनों अंगूठे पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रहे इस दौरान आपके घुटने न मुड़ें और न ही आपके पैर जमीन से ऊपर उठें। साइनस के दौरान सिरदर्द से आराम के लिए भी इसका बहुत महत्व है।

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पश्चिमोत्तानासन
 
 

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हलासन है जरूरी

यह आसन भी साइनस के साथ-साथ कमर दर्द, गर्दन में दर्द और अनिद्रा से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। इसके लिए जमीन पर पीठ के बल सीधा लेट जाएं। दोनों हाथों को सीधा जमीन पर रखें। अब धीरे-धीरे सांस छोड़ें और दोनों पैरों को ऊपर उठाएं। उसके बाद पैरों को पीछे की तरफ सीधे जमीन पर झुकाएं और पंजों को जमीन से सटाकर रखें। सिर को बिल्कुल सीधा रखें। इस अवस्था में एक से दो मिनट रहें, फिर सांस लेते हुए पैरों को सामान्य अवस्था में ले आएं।

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हलासन है जरूरी
 

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उत्तानासन

इस आसन की मदद से साइनस में आराम तो होगा ही साथ ही सांस से संबंधित अन्य बीमारियों में भी यह मददगार है। यह आपके मूड को तरोताजा भी करता है। इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं। लंबी सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की तरफ ले जाएं। फिर आगे झुककर दोनों हाथों से जमीन छुएं। इस दौरान घुटने न मोड़ें। कुछ देर इस मुद्रा में रहने के बाद हाथ पुनः ऊपर की तरफ ले जाएं और सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में खड़े हो जाएं।

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उत्तानासन
 

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अनुलोम-विलोम

इसकी क्रिया सांस संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद तो है ही, साथ ही यह सर्दी-जुकाम और साइनस से होने वाली दूसरी दिक्कतों को भी दूर करती है। इसे करने के लिए सबसे पहले पद्मासन या सुखासन की स्थिति में बैठ जाएं। फिर अपने दाएं हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद कर लें और बाएं छिद्र से भीतर की ओर सांस खीचें। अब बाएं छिद्र को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद करें। दाएं छिद्र से अंगूठा हटा दें और सांस छोड़ें। अब इसी प्रक्रिया को बाएं छिद्र के साथ दोहराएं। इसे 3 मिनट से 10 मिनट तक रोज करें।

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अनुलोम-विलोम
 

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धनुरासन

इस आसन को करने से सांस संबंधी समस्‍यायें दूर होती हैं और साइनस के कारण होने वाला तनाव भी दूर होता है। इसे करने के लिए चटाई पर पेट के बल लेट जाएं। अपनी ठुड्डी को जमीन पर रखें। पैरों को घुटनों से मोड़ें और दोनों हाथों से पैरों के पंजे पकड़ें। फिर सांस को अंदर खींचते हुए और बाजू सीधे रखते हुए सिर, कंधे, छाती को जमीन से ऊपर उठाएं। इस स्थिति में सांस सामान्य रखें और चार-पाँच सेकेंड के बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पहले छाती, कंधे और ठुड्डी को जमीन की ओर लाएं। पंजों को छोड़ दें और कुछ देर विश्राम करें। इस क्रिया को 3 बार दोहरायें।

धनुरासन
 

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भुजंगासन

इसे करने से साइनस में आराम मिलता है। इस आसन को करने के लिए पेट के बल लेट जायें, दोनों पैरों, एड़ियों और पंजों को आपस में मिलाइए और पूरी तरह जमीन के साथ चिपका लीजिए। अपने शरीर को पैरों की उंगलियों से लेकर नाभि तक के भाग को जमीन से लगाइए। अब हाथों को कंधे के सामने जमीन पर रखिए। दोनों हाथ कंधे के आगे पीछे नहीं होने चाहिएं। हाथों के बल नाभि के ऊपरी भाग को ऊपर की ओर झुकाइए जितना सम्भव हो।

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भुजंगासन
 
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चर्बी घटाये फिट बनाये योग

नियमित योग करने से आप फिट और स्‍वस्‍थ रहते हैं। योगासन से मोटापे की समस्‍या से भी निजात पाई जा सकती है। योग के कुछ आसन जैसे पश्चिमोत्तानासन, उष्ट्रासन, धनुरासन, भुजंगासन, उर्ध्वाहस्तोहत्तातनासन इत्यादि सभी आसन वजन कम करने में लाभकारी हैं।

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वजन कम करने के लिए योग

योग आपको शारीरिक व मानसिक दोनों तरह से फिट रखता है। योग करने से शरीर मजबूत होता है, मांसपेशियां टोन होती है और वजन भी कम होता है। योग ना सिर्फ शरीर पर जमा चर्बी को कम करता हैं बल्कि शरीर को लचीला भी बनाता हैं जिससे आप स्वस्थ रहते हैं। नियमित रूप से योग करने से आप वजन कम करने के साथ शेप में भी आ जाते हैं। image courtesy : getty images

वजन कम करने के लिए योग
 

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धनुरासन

इस योग आसन में शरीर की आकृति सामान्य तौर पर खिंचे हुए धनुष के समान हो जाती है, इसीलिए इसे धनुरासन कहते हैं। धनुरासन से पेट की चरबी कम होती है। इससे सभी आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और जोड़ों का व्यायाम हो जाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाये। फिर दोनों पैर आपस में एक-दूसरे से जोड़ें। दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें। घुटनों तथा पंजों के बीच में एक फुट का अंतर रख कर दोनों पैरों के टखनों को हाथों से पकड़ें। हाथों के सहारे दोनों पैरों के घुटने, जांघ तथा धड़ को सुविधानुसार एवं क्षमतानुसार ऊपर उठाएं। श्वास-प्रश्वास सहज रखें। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुक कर वापस पूर्व स्थिति में आएं। image courtesy : getty images

धनुरासन
 

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पश्चिमोत्तानासन

यह आसन पेट की चर्बी घटाने में काफी कारगर है। इस आसन से शरीर की सभी मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है। इसे करने के लिए पैरों को सामने फैलाकर बैठ जाएं अब हथेलियों को घुटनों पर रखकर सांस भरते हुए हाथों को ऊपर की ओर उठाएं व कमर को सीधा कर ऊपर की ओर खींचे, अब सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें व हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़कर माथे को घुटनों पर लगा दें। ध्‍यान रखें कि घुटने मुड़ने नहीं चाहिए। और कोहनियों को जमीन पर लगाने का प्रयास करें। image courtesy : getty images

पश्चिमोत्तानासन
 
 

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भुजंगासन

पेट की चर्बी कम करने, कमर पतली करने और कंधे चौड़े व बाजू मजबूत करने में यह आसन बहुत फायदेमंद होता हैं। शरीर को लचीला और  सुडौल बनाने में इसका बहुत महत्व है। भुजंगासन को कोबरा पोज भी कहते हैं। क्‍योंकि यह दिखने में फन फैलाए एक सांप जैसा पॉस्चर बनाता है। इसे करने के लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब दोनों हाथ के सहारे शरीर के कमर से ऊपरी हिस्से को ऊपर की तरफ उठाएं, लेकिन कोहनी आपकी मुड़ी होनी चाहिए। हथेली खुली और जमीन पर फैली हो। अब शरीर के बाकी हिस्सों को बिना हिलाए-डुलाए चेहरे को बिल्कुल ऊपर की ओर करें। कुछ समय के लिए इस मुद्रा में यूं ही रहें। image courtesy : getty images

भुजंगासन
 

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पूर्वोत्तानासन

इस आसन से चर्बी घटाने में आसानी होती है। यह शरीर के निचले भाग और बाजुओं को सुडौल बनाने के लिए अच्छा आसन है। इससे शरीर लचीला रहता है। इसे करने के लिए अपने पैरों को सामने की ओर फैलाकर सीधे बैठ जाएं। ध्‍यान रखें कि पंजे जुड़े हुऐ और रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। अब दोनों हाथों को जमीन पर टिकाकर कमर के निचले हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। image courtesy : getty images

पूर्वोत्तानासन
 

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कपालभाति

कपालभाति प्राणायाम करने से पेट की चर्बी कम होती है। इसे करने के लिए ध्यान के किसी भी आसन में बैठ जाएं। दोनों हथेलियों को घुटनों पर ज्ञानमुद्रा में रखें। आंखों को ढीली बंद करें। नासिका से एक हल्के झटके से श्वास बाहर निकालें तथा नासिका द्वारा सहज श्वास अंदर लें। यह कपालभाति की एक आवृत्ति है। इसकी 25 आवृत्तियों का एक चक्र करें। एक चक्र के बाद दो-तीन गहरी श्वास लेकर दूसरे चक्र का अभ्यास करें। धीरे-धीरे चक्रों की संख्या बढ़ाते जाएं। image courtesy : getty images

कपालभाति
 

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बालासन

इस आसन को करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पेट की चर्बी घटती है। शरीर के भीतरी अंगो में लचीलापन लाता है। शरीर और दिमाग को शांति देता है। इसके अलावा यह घुटनों और मासपेशियों को स्‍ट्रेच करता है। इसे करने के लिए घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं और शरीर का सारा भाग एड़ियों पर डालें। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। ध्‍यान रखें कि आपका सीना जांघों से छूना चाहिए, अब अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहें और वापस उसी अवस्था में आ जाएं। image courtesy : getty images

बालासन
 

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उष्ट्रासन

उष्ट्रासन में ऊंट  की आकृति बनाई जाती है। इसी कारण इस उष्ट्रासन कहा जाता है। यदि पेट ज्‍यादा निकला है तो इस योग से आपका पेट, कमर, छाती और बाहों पर असर पड़ता है। इसे करने के‍ लिए वज्रासन में बैठ क अपने घुटनों के बल खड़े हो जाये। घुटनों से कमर तक का भाग सीधा रखें व पीठ को पीछे की ओर मोड़कर हाथों से पैरों की एड़ियां पकड़ लें। अब सिर को पीछे की आरे झुका दें। image courtesy : getty images

उष्ट्रासन
 

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अग्निसार

यह क्रिया पाचन ‍प्रक्रिया को गति‍शील कर उसे मजबूत बनाती है। इसके साथ ही पेट की चर्बी घटाकर मोटापे को दूर करती है तथा यह कब्ज में भी लाभदायक होता है। इस प्राणायाम को खड़े होकर, बैठकर या लेटकर तीनों तरह से किया जा सकता है। बैठ कर करने के लिए सिद्धासन में बैठकर दोनों हाथ को दोनों घुटनों पर रखकर किया जा सकता है। इसे करने के लिए खड़े होकर पैरों को थोड़ा खोलकर हाथों को जंघाओं पर रखें। सांस को बाहर रोक दें। फिर पेट की पंपिंग करें यानी पेट अंदर खींचें, फिर छोड़ें। image courtesy : getty images

अग्निसार
 

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तितली आसन

तितली आसन करते समय मुद्रा तितली के समान हो जाती है। इसलिए इस आसन को तितली आसन कहते हैं। यह योग पेट और जांघ पर असर डालता है। यदि आपको जांघों और पैरों पर ज्‍यादा चर्बी है तो इस आसन को जरुर करें। इसे करने के लिए दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर तलुओं को आपस में मिलाकर एड़ियों को अधिक से अधिक निकट लाएं। हाथों से घुटनों को पकड़कर घुटनों को ऊपर उठाकर आपस में मिलाएं व नीचे जमीन की ओर दबाएं। 3-4 बार इस अभ्यास को कर लें। image courtesy : getty images

तितली आसन
 
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10 मिनट के योगासन जो वजन घटाने में करें मदद

योग की मदद मोटापे सहित न जाने कितनी समस्‍याओं से निपटा जा सकता है। तो चलिये जाने रोज केवल 10 मिनट इन योग आसनों को कर आप मोटापे की समस्या को कैसे मात दे सकते हैं।

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वजन कम करने के लिए दस मिनट के योगासन

योग अपनी कमाल की शक्तियों और लोभों की वजह से देश ही नहीं पूरी दुनिया द्वारा किया और सराहा जाता है। नियमित योग से आप न सिर्फ शारीरिक तौर पर फिट रहते हैं बल्कि आपका मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता जाता है। योग की मदद से लगभग सभी प्रकार की समस्या से निपटा जा सकता है, जिनमें से एक मोटापा की समस्या भी है। तो चलिये जाने रोज केवल 10 मिनट इन योग आसनों को कर आप मोटापे की समस्या को कैसे मात दे सकते हैं। image courtesy : getty images

वजन कम करने के लिए दस मिनट के योगासन
 

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भुजंगासन

भुजंगासन से पेट की चर्बी कम होने के साथ बाजुओं, कमर और पेट की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और साथ ही आपका शरीर लचीला बनता है। इसे करने के लिए पेट के बल सीधा लेट जाएं और दोनों हाथों को माथे के नीचे टिकाएं। दोनों पैरों के पंजों को साथ में रखें। अब माथे को सामने की ओर उठाएं और दोनों बाजुओं को कंधों के समानांतर रखें जिससे शरीर का भार बाजुओं पर पड़े। शरीर के अग्रभाग को बाजुओं के सहारे उठाएं। शरीर को स्ट्रेच करें और लंबी सांस लें। कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पेट के बल लेट जाएं। image courtesy : getty images

भुजंगासन
 

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हस्तपादासन

मोटापे से बचने के लिए हस्तपादासन का नियमित अभ्यास करें। यह आसन मोटापे को कम करने के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी को शक्तिशाली बनाता है, आंतों को स्वस्थ रखता हैं। तथा पेट व प्रजनन अंगों को ठीक करता हैं। इसे करने के लिए सीधे खड़े होकर अपने दोनों पैरों की एडियों व पंजों को आपस में मिला लें और दोनों हाथों को ढीला छोड़ दें। फिर सांस को बाहर छोड़ते हुए कमर के ऊपरी भाग को धीरे-धीरे सामने की ओर झुकाएं। घुटनों को बिल्कुल सीधा रखें। शुरुआत में इस स्थिति में 10 सेकंड तक रहें और फिर सामान्य स्थिति में आकर 5 सेकेण्ड आराम करें और इस आसन को कम से कम 5-6 बार करें। image courtesy : getty images

हस्तपादासन
 
 

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बालासन

बालासन पेट की चर्बी कम होने के साथ मांसपेशियां को मजबूती देता हैं। इसे करने के लिए शरीर का सारा भाग एड़ियों पर डालने के लिए घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। आपका सीना जांघों से छूना चाहिए और माथे से फर्श छूने की कोशिश करें। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में आ जाएं। image courtesy : getty images

बालासन
 

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पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन वजन कम करने के लिए बेहद आसान और प्रभावी आसन है। इस आसान को करने के लिए सबसे पहले सीधा बैठ जाएं और दोनों पैरों को सामने की ओर सटाकर सीधा फैलाएं। दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं और कमर को बिल्कुल सीधा रखें। फिर झुककर दोनों हाथों से पैरों के दोनों अंगूठे पकड़ने की कोशिश करें। ध्यान रहें इस दौरान आपके घुटने मुड़ने नहीं चाहिए और न ही आपके पैर जमीन से ऊपर उठें। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। image courtesy : getty images

पश्चिमोत्तानासन
 

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उष्ट्रासन या ऊंट पोज

उष्ट्रासन को करने से आपकी आकृति ऊंट के जैसी हो जाती है। इसलिए इसे उष्ट्रासन कहा जाता है। वजन कम करने के साथ-साथ यह पेट, कमर, छाती और बाहों की चर्बी को कम करने में मदद करता है। इसे करने के‍ लिए वज्रासन में बैठकर  घुटनों के बल खड़े हो जाये। घुटनों से कमर तक का भाग सीधा रखें व पीठ को पीछे की ओर मोड़कर हाथों से पैरों की एड़ियां पकड़ लें। अब सिर को पीछे की ओर झुका दें। ऐसे कुछ सेकंड करने के बाद वापस सामान्‍य अवस्‍था में आ जाये। इस योग को तीन बार दोहराये। image courtesy : getty images

उष्ट्रासन या ऊंट पोज
 

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धनुरासन

इस आसन से आप उस जगह का फैट भी बहुत आसानी से कम कर सकते हैं, जहां से वजन कम करने में अक्‍सर मुश्किलें आती है। जैसे जांघ, चेस्‍ट, हिप्‍स और पेट के नीचे का हिस्‍सा। इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाये। फिर दोनों पैर आपस में एक-दूसरे से जोड़ें। दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ें। घुटनों तथा पंजों के बीच में एक फुट का अंतर रख कर दोनों पैरों के टखनों को हाथों से पकड़ें। हाथों के सहारे दोनों पैरों के घुटने, जांघ तथा धड़ को सुविधानुसार एवं क्षमतानुसार ऊपर उठाएं। image courtesy : getty images

धनुरासन
 

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पूर्वोत्तानासन

इस आसन से चर्बी घटाने में आसानी होती है। यह शरीर के निचले भाग और बाजुओं को सुडौल बनाने के लिए अच्छा आसन है। इससे शरीर लचीला रहता है। इसे करने के लिए अपने पैरों को सामने की ओर फैलाकर सीधे बैठ जाएं। ध्‍यान रखें कि पंजे जुड़े हुऐ और रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। अब दोनों हाथों को जमीन पर टिकाकर कमर के निचले हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद वापस सामान्य अवस्था में आ जाएं। image courtesy : getty images

पूर्वोत्तानासन
 

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पद्मासन

पद्मासन करने से आपके शरीर की वसा कम होती है। इसे करने के लिए जमीन पर बैठकर पैरों को एक दूसरे के इस प्रकार रखें कि एड़‍ियां नाभि के पास आ जाए। फिर मेरुदण्ड सहित कमर से ऊपरी भाग को पूर्णतया सीधा रखें। लेकिन ध्यान रखें कि दोनों घुटने जमीन से उठने न पाएं। इसके बाद दोनों हाथों की हथेलियों को गोद में रखते हुए स्थिर रहें। image courtesy : getty images

पद्मासन
 

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चक्रासन

यह आसन वजन कम करने के साथ-साथ शरीर में स्फूर्ति, शक्ति एवं तेज की वृद्धि करता है। इसे करने के लिए पीठ के बल लेटकर दोनों घुटनों को मोड़ें। ध्‍यान रखें कि आपकी एड़ि‍यों, नितम्बों के समीप लगी हो। संतुलन बनाये रखने के लिए दोनों हाथों को उल्टा करके कंधों के पीछे थोड़े अन्तर पर रखें। धीरे-धीरे हाथ एवं पैरों को समीप लाने का प्रयत्‍न करें, जिससे शरीर की चक्र जैसी आकृति बन जाए। इस प्रकार 3-4 बार आवृति करें। image courtesy : getty images

चक्रासन
 

ये 5 भारतीय आयुर्वेदिक नुस्‍खे जो दुनियाभर में हैं लोकप्रिय, जानें इसके फायदे

आयुर्वेद जीवनशैली उपचार की एक जटिल प्रणाली है। इसकी अलग-अलग तकनीक है। जो कि भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रचलित हैं। लेकिन इन तकनीकों की जड़ें क्या हैं और वे वास्तव में आपको कैसे लाभ पहुंचाते हैं। इस बारे में हम आपको विस्‍तार से बता रहे हैं।

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योगा (Yoga)

योगा हजारों साल पहले भारत में पैदा होने वाली वह प्रथा है जो दुनियाभर में प्रचलित हो चुकी है। योग न केवल योग है बल्कि यह हड‍्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करता है। योग में ध्यान और सांस-कार्य अभ्यास तनाव को कम करने, रक्तचाप को कम करने, रक्त परिसंचरण में वृद्धि और चयापचय को उत्तेजित करने में विशेष रूप से सहायता करता है। योग, सांस पर ध्यान देने के साथ, ऊतकों के ऑक्सीजन में सुधार और कोर्टिसोल के स्तर में कमी लाता है। जिससे लोग तनाव मुक्‍त जीवन जी सकते हैं।

योगा (Yoga)
 

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तेल का कुल्‍ला (Oil Pulling)

आयुर्वेद में मुख का देखभाल आधुनिक दंत चिकित्सा देखभाल जैसी कुछ नहीं है। 5000 साल पहले की बात करें तो भारतीय लौंग चबाकर, दातून कर और यहां तक कि मुंह के देखभाल के लिए तेल से कुल्‍ला करते थे। आमतौर पर  टूथपेस्‍ट वह एक भूरा पाउडर है न कि पैकेट में बंद सफेद रंग का वह पेस्‍ट, जो अब ज्‍यादातर घरों में देखने को मिलता है, खासकर जब नियमित ब्रसिंग की बात की जाती है तब। आयुर्वेद के अनुसार, तेल का कुल्‍ला शुष्क मुंह, हालिटोसिस, खराब पाचन और जीनिंगविटाइट को रोकने में मदद करता है और मसूड़ों को मजबूत बनाता है। मुंह में अम्लता को कम करता है। इसके अलावा यह मुंह के विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में मदद कर सकता है। आज भले ही यह क्रिया भारत में कम लोग करते हों लेकिन इसका प्रयोग दूसरे देशों में ज्‍यादा देखने को मिलता है।

तेल का कुल्‍ला (Oil Pulling)
 

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नेटी पौट (Neti pots)

नेटी पौट विशेष उद्देश्य से प्रयोग की जाने वाली एक हांडी होती हैं जो चाय की केतली के समान ही लगती है। इन्हें नाक की सिंचाई (nasal irrigation)के लिए प्रयोग किया जाता है। स्वस्थ्य और शोधन शासन में इसे जाली नेटी भी कहा जाता है, जिसे एशिया में अधिकतर प्रयोग किया जाता है। जबकि कई पश्चिमी लोगों का कहना है कि यह ब्रश से दांत साफ़ करने के समान है। परन्तु इसका प्रयोग भारत में दैनिक प्रकार से स्वच्छता के लिए किया जाता है।

नेटी पौट (Neti pots)
 
 

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जीभ छीलना (Tongue Scraping)

आयुर्वेदिक चिकित्सकों का मानना है कि जीभ पर जमीं परत और दुर्गंध युक्‍त सांस पाचन विषाक्त पदार्थों की उपस्थिति का संकेत दे सकती है। जीभ पर किसी भी विषाक्त पदार्थ को हटाने से बैक्टीरिया निकल जाते हैं। इससे पाचन में भी सुधार होता है। रातभर में पनपे विषाक्त पदार्थों को जीभ से हटाने के लिए स्‍क्रैपिंग करना जरूरी होता है। जीभ स्क्रैपिंग चयापचय प्रक्रिया में सुधार करने में मदद करती है और आपको अपने खाद्य पदार्थों को बेहतर तरीके से स्वाद लेने की अनुमति देती है। यह काम भारतीय पहले दातून से या अलग-अलग तरीके से करते थे, जिसे अब दुनियाभर में लोग किसी विशेष औजार की मदद से करते हैं।

जीभ छीलना  (Tongue Scraping)
 

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मसाज (Self-Massage)

खुद से तेल मालिश या मसाज की परंपरा भी हजारों साल पुरानी है। इससे मांसपेशियों का दर्द दूर होता है और रक्‍त परिसंचरण को बढ़ावा मिलता है। त्वचा पर तेल का उपयोग करके अपने चेहरे, गर्दन, कंधे, बाहों, धड़ या पैरों को मालिश करना एक सामान्य आयुर्वेदिक अभ्यास है जो मांसपेशियों को आराम करने, परिसंचरण और शांत नसों को बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। “स्व-मालिश अच्छे परिसंचरण को बढ़ावा देता है और ऊतकों से विषाक्त पदार्थों को मुक्त करता है, जो सूजन को कम करता है और उन्मूलन को बढ़ाता है, साथ ही बेहतर पसीने के रिलीज के लिए मृत त्वचा और खुले छिद्रों को हटाता है।

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मसाज (Self-Massage)
 
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विश्व हास्य दिवस : हंसी और योग की जुगलबंदी है सेहत के लिए कमाल

यदि आप परेशान, दुखी और उदास हैं और अपने जीवन में और अधिक हंसी और खुशी लाना चाहते हैं तो आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हंसी और योग की जुगलबंदी अर्थात लाफ्टर योग बहुत ही अच्‍छा है।

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हंसी और योग की जुगलबंदी

सुबह- सुबह अगर आप अपने आस पास के पार्क में देखें तो बहुत से लोग एक पास खडे या बैठे नजर आ ही जायेंगे और बिना किसी बात के ठहाके लगाते दिख जाएंगे। दरअसल, यह तनाव भगाने का एक सबसे अच्‍छा तरीका है जिसे ‘लाफ्टर थेरेपी’ कहा जाता है। लेकिन जब हंसी के साथ योग को मिला दिया जाता है तो ये बन जाता है ‘लाफ्टर योग’। लाफ्टर योग सेहत के लिए बेहद लाभदायक होता है। तो चलिये जाने लाफ्टर योग और इसके लाभ….!

हंसी और योग की जुगलबंदी
 

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लाफ्टर योग

हंसी और योग को मिलाकर हास्य योग बनता है, जिसमें प्राणायाम (लंबी-लंबी सांसें लेते) के साथ हंसी के अलग-अलग कसरत करना सिखाया जाता है। हास्य योग के तहत जोर-जोर से ठहाके मारकर, बिना किसी वजह, बेबाक हंसने का अभ्यास किया जाता है। लाफ्टर योगा 1995 में भारत में डॉक्टर मदन कटारिया ने शुरू किया था। अपनी रिसर्च में डॉ. कटारिया ने पाया कि ठहाके लगाने से हंसना शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बेहतरी में मददगार है। डॉ. कटारिया के अनुसार लाफ्टर योग का सिद्धांत एक वैज्ञानिक तथ्य पर आधारित है कि शरीर नकली और असली हंसी में फर्क नहीं कर सकता है। कोई भी एक समान भौतिक व मानसिक लाभ पाता है।

लाफ्टर योग
 

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अच्छा मूड

चाहे आपका निजी जीवन हो, व्यवसायिक जीवन या फिर सामाजिक जीवन, आप जो कुछ भी करते हैं वह उसमें अहम भूमिका निभाता है आपका ‘मूड’। अगर आपका मूड अच्छा है तो आप बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं। लाफ्टर योग आपकी मस्तिष्क कोशिकाओं में एंडोरफिन नामक रसायन उत्पन्न करके कुछ ही मिनटों में आपके मूड को बेहतर कर देता है। इसे करने से आप दिनभर खुश और अच्छे मूड में रहते हैं और वास्तविक हंसी हंस पाते हैं।

अच्छा मूड
 
 

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स्वास्थ्य लाभ

लाफ्टर योग इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है जिससे आप न बीमार होने से बच पाते हैं, बल्कि यह आपको उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, डिप्रेशन, अर्थराइटिस, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस, कमरदर्द, फाइब्रोमाइलगिया, माइग्रेन सिरदर्द, मासिक धर्म, अस्थमा संबंधी बिमारियों तथा कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है

स्वास्थ्य लाभ
 

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बढ़ता चलन

चिकित्सकों के अनुसार, भारत में लाफ्टर थेरेपी का आगाज 1995 के आस-पास शुरू हुई इस थेरेपी के देश में अब तक 7,000 से ज्यादा लाफ्टर क्लब और इसके 1 हजार से ज्यादा सदस्य बन चुके हैं। इसी दिशा में हर साल मई के पहले रविवार को ‘वर्ल्ड लाफ्टर डे’ मनाया जाता है

बढ़ता चलन
 

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हंसी के फायदे

मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जब कोई हंसता है तो मस्तिष्क के न्यूरो केमिकल्स सक्रिय होकर शरीर को बेहतर अहसास कराते हैं। दरअसल मस्तिष्क का पूरा तंत्रिका तंत्र अनेक रसायन मुक्त करता है जो व्यक्ति के मिजाज, व्यवहार और शरीर को प्रभावित करते हैं। ऐसे में हंसी संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। मांसपेशियों को आराम और मानसिक स्वास्थ्य आदि के लिहाज से इसके अनेक सकारात्मक लाभ होते हैं।

हंसी के फायदे
 

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लाफ्टर थेरेपी व लाफ्टर योग में फर्क

‘लाफ्टर थेरेपी’ के अंतर्गत लगभग 2 मिनट तक हंसने की क्रिया में लिप्त रहा जाता है, जबकि ‘लाफ्टर योग थेरेपी’ नियमित अंतराल पर सामान्य श्वास व्यायाम व उत्तेजित हंसी का मिला-जुला रूप होता है। ‘दि डेल्ही लाफ्टर क्लब’ के मुताबिक, इस थेरेपी के लाभ के चलते हाल के वर्षो में इसे काफी लोकप्रियता मिली है। यह थेरेपी रक्तचाप व तनाव को कम कर सकती है और प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाती है।

लाफ्टर थेरेपी व लाफ्टर योग में फर्क
 

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हास्य योग कैसे करें

लोगों को हंसना सिखाने में हास्य योग काफी पॉप्युलर हो रहा है। इसमें शरीर के आंतरिक हास्य को बाहर निकालना सिखाया जाता है, जिससे शरीर सेहतमंद होता है। शुरुआत में नकली हंसी के साथ शुरू होने वाली यह क्रिया धीरे-धीरे हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है और हम बिना किसी कोशिश के हंसने लगते हैं।

हास्य योग कैसे करें
 

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क्या कहती हैं रिसर्च

अमेरिका के फिजियॉलजिस्ट और लाफ्टर रिसर्चर विलियम फ्राइ बताते हैं कि जोरदार हंसी दूसरे इमोशंस के मुकाबले ज्यादा बेहतर फिजिकल एक्सरसाइज साबित होती है। इससे मसल्स एक्टिवेट होते हैं, हार्ट बीट बढ़ती है और ज्यादा ऑक्सिजन मिलने से रेस्पिरेटरी सिस्टम बेहतर बनता है। जरनल ऑफ अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन के अनुसार, लाफ्टर योग थेरपी से लंबी बीमारी के मरीजों को काफी फायदा होता है इसलिए अमेरिका, यूरोप और खुद हमारे देश में भी कई अस्पतालों से लेकर जेलों तक में लाफ्टर थेरपी या हास्य योग कराया जाता है।

क्या कहती हैं रिसर्च
 

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कहां जाएं

जो लोग हास्य योग सीखना चाहते हैं, वे जगह-जगह पार्कों में लगने वाले शिविरों में जाकर इसे सीख सकते हैं। इस प्रकार के ज्यादातर शिविर मुफ्त होते हैं। एक बार सही तरीका सीख लेने के बाद रोजाना घर पर अभ्यास किया जा सकता है। इसके एक सत्र में तकरीबन 15 से 40 मिनट का समय लगता है।

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कहां जाएं

पथरी से बचे रहना है तो इन 10 तरीकों से करें किडनी की सफाई

बदलती जीवनशैली और घटती सक्रीयता के चलते किडनी की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। हालांकि किडनी को विषाक्त मुक्त करने व स्वस्थ रखने के लिए कुछ हर्ब की मदद ली जा सकती है।

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किडनी की सफाई

किडनी शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग होता है। लेकिन बदलती जीवनशैली और घटती सक्रीयता के चलते किडनी की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। हालांकि किडनी को विषाक्त मुक्त करने व स्वस्थ रखने के लिए कुछ हर्ब की मदद ली जा सकती है। इन हर्ब की मदद से किडनी स्टोन, किडनी कैंसर और किडनी से संबंधित अन्य समस्याओं से आसानी से दूर रहा जा सकता है। तो चलिये जानें आइए जानें किडनी की सफाई के लिए 10 सर्वश्रेष्ठ हर्ब्स कौंन से हैं।

किडनी की सफाई
 

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अमर बेल

अमर बेल का पीला फूल एक कमाल का हर्ब माना जाता है। इस फूल का इस्‍तेमाल कर रक्त की शुद्धि की जा सकती है। इसके अलावा यह लीवर और किडनी के स्‍वास्‍थ्‍य की सफाई कर उन्हें स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।

अमर बेल
 

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करौंदा

करौंदे में बहुत सारा एंटी ऑक्‍सीडेंट पाया होता है जो कि किडनी से यूरिक एसिड को बाहर निकालता है। करौंदे को किडनी के लिये सबसे बेस्‍ट हर्ब में से एक माना जाता है। इसमें यूरिक एसिड और यूरिया को निकालने की कमाल की क्षमता होती है।

करौंदा
 
 

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अजमोद (Parsley)

अजमोद में लूटेओलिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो फ्री रेडिकल्स को शरीर से बाहर निकालने में सहायक होता है। अजमोद में विटामिन ए और सी भी काफी होते हैं। अजमोद को किडनी की सफाई के लिए जाना जाता है। किडनी में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर यह उसे स्वस्थ रखता है।

अजमोद (Parsley)
 

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सिंहपर्णी (Dandelion root)

सिंहपर्णी की जड़ लीवर और किडनी से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने वाली एक बहद असरदार हर्ब है। न केवल किडनी से विषाक्त पदार्थों को बाहर करती है बल्कि रक्त को शुद्ध भी करती है, जिससे लीवर और किडनी की समुचित कार्यक्षमता को बढ़ावा मिलता है।

सिंहपर्णी (Dandelion root)
 

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मंजिष्ठा

मंजिष्‍ठा को आयुर्वेद में एक बेहद महत्वपूर्ण अच्‍छा हर्ब माना जाता है। यह रक्त व किडनी से विषाक्त पदार्थों से दूर कर उन्हें शुद्ध करता है। इसके अलावा इसका प्रयोग प्रतिरक्षा नियामक के रूप में भी किया जाता है।

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मंजिष्ठा
 

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भुटकेसी (Bhutkesi)

यह फूल एक रक्त शुद्ध करने वाला और लीवर को मजबूत बनाने वाला वाला होता है। भुटकेसी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्‍व की वजह से आमतौर पर इसका प्रयोग प्राकृतिक चिकित्‍सा में किया जाता है। भुटकेसी कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश आदि में पाया जाता है।

भुटकेसी (Bhutkesi)
 

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गोल्डनरॉड (Goldenrod)

गोल्डनरॉड, एक प्रकार का पौधा जिसका तना छड़ी जैसा और फूल पीले रंग के होते है। गोल्डनरॉड के अलग अलग तरह से सेवन करने पर किडनी में मौजूद विषाक्त दूर होते हैं और किडनी रोगमुक्त रहती है।

इसे भी पढ़ें: जानिये कब पड़ती है किडनी के डायलिसिस की जरूरत और क्या है इसकी प्रक्रिया

गोल्डनरॉड (Goldenrod)
 

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गुडूची (Guduchi)

शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिये ये हर्ब बेहद कारगर होता है और रक्त को शुद्ध करता है। गुडूची धूम्रपान और शराब पीने वाले लोगों के लिए काफी लाभदायक होता है, क्‍योंकि यह रक्त में पैदा होने वाले विषाक्त पदार्थों को दूर करने में मदद करता है।

गुडूची (Guduchi)
 

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धतूरे की जड़

धतूरे की जड़ शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले एसिड और विषाक्तों को बाहर कर रक्त को शुद्ध करता है। इसके अलावा ये किडनी को मजबूत बनाकार  रक्त शुद्धी करने में भी सहायता करता है और पिट्यूटरी ग्रंथि से प्रोटीन को निकालकर हार्मोन संतुलन में सहायता करता है।

धतूरे की जड़
 
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बालों का झड़ना रोक देंगे ये 5 योगासन, करने से पहले ध्‍यान रखें ये बातें

आपके बालों के लिए योग बहुत मददगार साबित हो सकता है। योग आपके संपूर्ण शरीर को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है। योग के जरिये आप बालों के झड़ने की समस्‍या से बच सकते हैं।

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बालों के लिए योग

बालों का झड़ना आजकल काफी सामान्‍य बात है। तनाव, धूम्रपान, खाने की गलत आदतें, केमिकल्‍स युक्‍त उत्‍पादों का प्रयोग प्रदूषण और अनियमित दिनचर्या ने इस समस्या को बढ़ा दिया है। तमाम उपायों के बावजूद इस समस्‍या का हल नहीं मिलता। लेकिन, योग के जरिये बालों का झड़ना कम किया जा सकता है। साथ ही ये आसन पूरे शरीर को स्‍वस्‍थ बनाते हैं। योगासन और प्राणायाम का नियमित अभ्यास शरीर में खून का संचार सही तरीके से करने में मदद करती है।

बालों के लिए योग
 

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अधोमुख शवासन

कुत्ते की तरह नीचे झुकने की पोजीशन में सिर में रक्‍त संचार बढ़ जाता है। यह साइनस और सर्दी के भी अच्‍छा इलाज है। दिमागी थकान, तनाव और नींद न आने जैसी समस्याओं को दूर करने में भी अधोमुख शवासन बहुत मदद करता है।

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अधोमुख शवासन
 

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उत्‍थानासन

उत्थान आसन बालों की त्वचा में रक्‍त संचार सुधारता है। इस आसन से थकान और चिंता दूर होती है। यह रजोनिवृत्ति के लक्षणों से आराम दिलाता है तथा पाचन में भी सुधार लाता है। इसके अलावा आप अपानासन भी कर सकते हैं, यह आसन शरीर के जहरीले पदार्थो को बाहर निकाल कर शरीर को शुद्ध करता है, दिमाग को शांत रखता है और कब्ज से राहत देता है।

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उत्‍थानासन
 
 

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वज्रासन

वज्रासन को डाइमंड पोज भी कहते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसे भोजन के तुरंत बाद भी किया जा सकता है। इसमें आगे की ओर झुकना होता है। जिससे सिर की त्वचा में रक्त परिसंचरण बढ़ता है। यह मूत्र विकार के उपचार में सहायक होता है, वजन कम करने में भी मदद करता है। व्रजासन पाचन शक्ति को दुरुस्‍त करता है। यह पेट से गैस कम करने में भी मदद करता है। पाचन सुधरने से शरीर में संतुलन बढ़ता है। इससे बालों का गिरना भी कम हो जाता है।

वज्रासन
 

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सर्वांगासन

सर्वांग आसन यह थायराइड ग्रंथि के पोषण में सहायक है जिसके कारण आपका श्वसन, पाचन, जननांग और तंत्रिका तंत्र स्वस्थ तरीके से कार्य करते हैं। इस आसन में सिर नीचे की ओर झुका हुआ होता है जिसके कारण सिर की त्वचा में रक्त का परिसंचरण अच्छे से होता है जिससे बालों का गिरना कम हो जाता है। इसके अलावा आप पवनमुक्तासन कर सकते हैं। इससे गैस कम होती है तथा पाचन अच्छे से होता है। पीठ के निचले हिस्से की मांस पेशियाँ मज़बूत होती हैं। इससे पेट और नितम्बों पर जमा हुआ वसा भी कम होता है। अच्छे पाचन के कारण संतुलन बढ़ता है और बाल भी बढ़ते हैं।

सर्वांगासन
 

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कपालभाति प्राणायाम

कपालभारती प्राणायाम इस प्राणायाम के कारण आपके मस्तिषक की कोशिकाओं को अधिक मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है जो आपके तंत्रिका तंत्र के लिए बहुत अच्छा है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलता है तथा मोटापे और मधुमेह को दूर करने में भी सहायक है। यह शरीर में संतुलन बनाए रखता है जिसके कारण बालों का झड़ना कम हो जाता है। जिन लोगों को हृदय से जुड़ी परेशानियां हैं, अस्थमा है, आर्थराइटिस, अवसाद, तनाव, या फिर माइग्रेन है, उनके लिए यह प्राणायाम काफी फायदेमंद है।

कपालभाति प्राणायाम
 

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पवनमुक्तासन

पवनमुक्तासन इससे गैस कम होती है तथा पाचन अच्छे से होता है। पीठ के निचले हिस्से की मांस पेशियाँ मज़बूत होती हैं। इससे पेट और नितम्बों पर जमा हुआ वसा भी कम होता है। अच्छे पाचन के कारण संतुलन बढ़ता है और बाल भी बढ़ते हैं।  image courtesy : getty images

पवनमुक्तासन
 

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कपालभाति प्राणायाम

कपालभारती प्राणायाम इस प्राणायाम के कारण आपके मस्तिषक की कोशिकाओं को अधिक मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है जो आपके तंत्रिका तंत्र के लिए बहुत अच्छा है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलता है तथा मोटापे और मधुमेह को दूर करने में भी सहायक है। यह शरीर में संतुलन बनाए रखता है जिसके कारण बालों का झड़ना कम हो जाता है।  image courtesy : getty images

कपालभाति प्राणायाम
 

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नाड़ी शोधन प्राणायाम

जिन लोगों को हृदय से जुड़ी परेशानियां हैं, अस्थमा है, आर्थराइटिस, अवसाद, तनाव, या फिर माइग्रेन है, उनके लिए यह प्राणायाम काफी फायदेमंद है। image courtesy : getty images

नाड़ी शोधन प्राणायाम
 

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भस्त्रिका प्राणायाम

यह हमारे शरीर से कफ और पित्त को बाहर निकाल देता है और पूरे नर्वस सिस्टम को शुद्ध करके सभी तरह की बीमारियों से निजात दिलाता है। image courtesy : getty images

भस्त्रिका प्राणायाम
 
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केवल 10 मिनट में थकान और कमजोरी को दूर करते हैं ये योगासन

योग तनाव कम करने से लेकर बीमारियों को कंट्रोल करने और वजन घटाने से लेकर तुरंत ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है। योग की कुछ सरल मुद्राएं तुरंत एनर्जी देने में मदद करती हैं।

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एनर्जी के लिए योग

योग एक आध्यात्मिक प्रकिया है जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। योग के जरिए आपके शरीर और मस्तिष्‍क का मिलन होता है। योग तनाव कम करने से लेकर बीमारियों को कंट्रोल करने और वजन घटाने से लेकर तुरंत ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होता है। योग की सरल मुद्राएं आपको व्‍यायाम के तनाव से बचने और तुरंत एनर्जी देने में मदद करती हैं। योग आपको अपने किसी भी काम में सफलता हासिल करने में मदद करता है क्‍योंकि इसके आप आसानी से अपने विचारों पर ध्‍यान लगा सकते हैं।

एनर्जी के लिए योग
 

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बालासन

बालासन को करने से तनाव कम होता है और तुरंत एनर्जी मिलती है। इस योग को करने के लिए घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं और शरीर का सारा भाग एड़ियों पर डाल दें। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। ध्‍यान रखें कि आपका सीना जांघों को छूना चाहिए, अब अपने माथे से फर्श को छूने की कोशिश करें। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहें और वापस उसी अवस्था में आ जाएं। image courtesy : getty images

बालासन
 

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भुजंगासन

भुजंगासन को कोबरा आसन भी कहते हैं। इसे करने के लिए जमीन पर उलटा लेट जाएं। पैर और हिप्स को समान रूप से फैलाकर रखें। हथेलियों को जमीन पर कंधों के सामने रखें। अब शरीर के बाकी हिस्से को बिना हिलाए-डुलाए चेहरे को बिल्कुल ऊपर की ओर करें। कुछ समय के लिए इस मुद्रा को यूं ही रखें। इस आसन को करने से आप तुरंत ही एनर्जी पा सकते हैं।

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भुजंगासन
 
 

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ताड़ासन

अगर आप बहुत कमजोर महसूस करते हैं तो ताड़ासन आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। इसको करने से तुरंत एनर्जी पाने में मदद मिलती है। इसे करने के लिए जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों पर अपने शरीर का वजन सामान रखें। इसके बाद दोनों हथेलियों की अंगुलियों को मिलाकर सिर के ऊपर ले जाएं। हथेलियों सीधी रखें फिर सांस भरते हुए अपने हाथों को ऊपर की ओर खींचिए,। इसके साथ ही पैरों की एड़ी को भी ऊपर उठाएं और पैरों की अंगुलियों पर शरीर का संतुलन बनाए रखिए। इस स्थिति में कुछ देर रहें। image courtesy : getty images

ताड़ासन
 

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वक्रासन

कमर की चर्बी दूर करने के साथ-साथ वक्रासन तुरंत एनर्जी भी देता है। इसे करने के लिए दंडासन की स्थिति में बैठ जाएं। अब दायें पैर को मोड़कर बायीं जांघ के पास घुटने से सटाकर रखें, ध्‍यान रहें कि आपका बायां पैर सीधा रहें। बाएं हाथ को दाएं पैर एवं पेट को बीच से लाकर दाएं पैर के पंजे के पास टिकाएं। दाएं हाथ को कमर के पीछे भूमि पर सीधा रखें। गर्दन को घुमाकर दायीं और मोड़कर देखें लेकिन बाएं पैर, कमर और दाएं हाथ सीधे रहेंगे। image courtesy : yogiklifestyle.com

वक्रासन
 

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परिव्रता त्रिकोणासन

परिव्रता त्रिकोणासन पाचन शक्ति को दुरुस्‍त रखने के साथ-साथ तुरंत एनर्जी भी देता है। इसे करने के लिए सीधा तनकर खड़े हो जाएं और बाएं पैर को बायीं ओर और दायें पैर को दायीं ओर घुमाएं। दाएं घुटने को दायें टखने के ऊपर मोड़ें। बांहों को कंधों की ऊंचाई में ले जाएं और हथेलियों को जमीन में ही रखें। अब सांस छोड़ते हुए हिप्‍स को आगे की ओर झुकाएं। बायीं हथेली से दाएं पैर को छुये और दायीं ओर मुड़कर दायें हाथ को छत की दिशा में ले जाइये। और सिर को दायीं ओर घुमाकर दायें हाथ की उंगलियों की ओर देखिए।

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परिव्रता त्रिकोणासन
 

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वीरभद्रासन

वीरभद्रासन से शरीर मजबूती और तुरंत एनर्जी मिलती है। इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच में दूरी रखें। सांस खींचते ह‌ुए दोनों हाथों को दोनों दिशाओं में अपने कंधों के समानांतर फैलाएं। अब गर्दन दाई दिशा में ले जाएं और दाएं घुटने को मोड़ें (कम से कम 45 डिग्री का कोण घुटने से बनना चाहिए)। अपने हाथों को नमस्‍ते का आकार देते हुए ऊपर की ओर रखें। अब सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को नीचे लाएं। थोड़ी देर इसी मुद्रा में रहें और दोबारा इसी क्रिया को करें।

वीरभद्रासन
 

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मर्जरी आसन

इस आसन में शरीर की मुद्रा बिल्ली की तरह होने के कारण इसे मर्जरी आसन कहते हैं। यह पेट की चर्बी को कम करने के साथ तुरंत एनर्जी भी देता है। इसे करने के लिए दोनों घुटनों और हथेलियों के बल खड़े हों। दोनों हाथ, पैर और सिर को बिल्कुल सीधा रखें और सामने की ओर देखें। अब ठुड्डी को उठाते हुए सांस खींचकर सिर को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान शरीर को अच्छी तरह से स्ट्रेच करें। कुछ सेकंड के बाद सांस छोड़ते हुए सिर नीचे की ओर ले जाएं। image courtesy : getty images

मर्जरी आसन
 

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सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है। इसके बारह आसनों को करने से शरीर निरोग और स्‍वस्‍थ रहता है। इसमें प्रथम अवस्था प्रणाम मुद्रा, दूसरी में हस्त उत्तानासन, तीसरी में पाद हस्तासन, चौथी अश्व संचालन आसन, पांचवी अवस्‍था में पर्वतासन, छठी में अष्टांग नमस्कार, सातवीं में भुजंगासन, आठवीं में पर्वतासन, नौवीं अश्व संचालन आसन, दसवीं अवस्था में पाद हस्तासन ग्यारहवीं अवस्था में हस्त उत्तानासन और बारहवीं अवस्‍था में प्रणाम मुद्रा शामिल हैं। ये 12 अवस्थाएं सूर्य नमस्कार का चक्र है। image courtesy : getty images

सूर्य नमस्कार
 

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शवासन

शवासन योग को करने से ना सिर्फ शरीर को आराम मिलता है बल्कि ये आपको तुरंत एनर्जी भी देता है। मन को गहरे ध्यान में ले जा कर शरीर को फिर से स्फूर्ति से भर देता है। इस आसन को करना बहुत ही आसान हैं। इसे करने के लिए जमीन पर दरी बिछाकर सीधा लेट जाये। इसके बाद अपनी आंखां को बंद कर लें और अपने हाथ-पैरों को ढ़ीला छोड़ दें। आप चाहे तो इस मुद्रा में 5 से 20 मिनट तक बने रह सकते हैं। image courtesy : getty images

शवासन
 
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ये 5 हस्‍त मुद्राएं जो कई रोगों का है काल, इन्‍हें करना है आसान

हाथों की मुद्राओं से कई खतरनाक और सामान्‍य बीमारियों का उपचार किया जा सकता है, ऐसा माना गया है की हाथ की अंगुलियों में पंच तत्व मौजूद होते हैं जो पूरे शरीर को स्‍वस्‍थ रखते हैं।

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हाथों के लिए मुद्रायें

हाथों की मुद्राओं से कई खतरनाक और सामान्‍य बीमारियों का उपचार किया जा सकता है, ऐसा माना गया है की हाथ की अंगुलियों में पंच तत्व मौजूद होते हैं जो पूरे शरीर को स्‍वस्‍थ रखते हैं। हस्त-मुद्राएं तुरंत असर करना शुरू कर देती हैं। जिस हाथ में ये मुद्राएं बनाते हैं, शरीर के विपरीत भाग में उनका तुरंत असर होना शुरू हो जाता है। इन मुद्राओं का प्रयोग करते समय वज्रासन, पद्मासन और सुखासन का प्रयोग करना चाहिये। इन मुद्राओं को नियमित रूप से 30-40 मिनट तक कर सकते हैं। अगर आप इसे एक बार में न कर सकें तो दो-तीन बार में भी किया जा सकता है। किसी भी मुद्रा को करते समय जिन अंगुलियों का कोई काम न हो उन्हें सीधी रखें।

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हाथों के लिए मुद्रायें
 

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ज्ञान-मुद्रा

इसे करने के लिए अंगूठे को तर्जनी (पहली) अंगुली के सिरे पर लगा दें। शेष तीनों अंगुलियां सीधी रहेंगी। इसका अभ्‍यास स्मरण-शक्ति का विकास होता है और व्‍यक्ति का दिमाग भी स्‍वस्‍थ रहता है। इसके अलावा सिरदर्द दूर होता है तथा अनिद्रा की समस्‍या दूर होती है। नकारात्‍मक विचार भी नहीं आते हैं गलत आदतें दूर होती हैं।

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ज्ञान-मुद्रा
 

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वायु-मुद्रा

इस मुद्रा को करने के लिए तर्जनी (पहली) अंगुली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगाकर हलका सा दबायें, बाकी तीन उंगलियों को एकदम सीधा रखें। इसका अभ्‍यास करने से पेट में गैस की समस्‍या नहीं होती है। लकवा, साइटिका, गठिया, संधिवात, घुटने के दर्द की समस्‍या दूर होती है। गर्दन का दर्द, रीढ़ की हड्डी का दर्द, तथा पारकिंसन्स रोग में फायदा होता है।

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वायु-मुद्रा
 
 

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आकाश-मुद्रा

इसे करने के लिए मध्यमा अंगुली को अंगूठे के अगले हिस्‍से से मिलायें, बाकी तीनों उंगलियों को सीधा रखें। इसे करने से कान सभी प्रकार के रोग जैसे बहरापन आदि दूर हो जाता है साथ ही यह हड्डियों की कमजोरी तथा दिल की बीमारियों को भी दूर करता है। भोजन करते समय एवं चलते-फिरते यह मुद्रा न करें।

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आकाश-मुद्रा
 

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शून्य-मुद्रा

इस मुद्रा को करने के लिए मध्यमा अंगुली को मोड़कर अंगूठे के मूल में लगायें एवं अंगूठे से इस उंगली को हल्‍का दबायें। इससे सभी प्रकार के कान के रोग दूर होते हैं, किसी को सुनने में समस्‍या हो रही है तो इस मुद्रा का अभ्‍यास करने के साफ सुनाई पड़ने लगता है। इसके अलावा यह मुद्रा मसूढ़े की पकड़ मजबूत करता है तथा गले के रोग एवं थायरायड रोग में भी फायदा होता है।

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शून्य-मुद्रा
 

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पृथ्वी-मुद्रा

इस मुद्रा को करने के लिए अनामिका (तीसरी) अंगुली को अंगूठे से लगाकर रखें। इसका नियमित अभ्‍यास करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है, और आप एनर्जेटिक रहते हैं। यह मुद्रा पाचन-क्रिया ठीक करती है, दिमाग को शांत करती है, तथा यह शरीर में विटामिन की कमी को दूर करती है।

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पृथ्वी-मुद्रा
 

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सूर्य-मुद्रा

इसे करने के लिए अनामिका (तीसरी) अंगुली को अंगूठे के मूल पर लगाकर दबायें। इस मुद्रा का अभ्‍यास करने से शरीर संतुलित होता है, वजन घटता है। इसके अलावा तनाव में कमी होती है, खून में कोलेस्ट्रॉल का स्‍तर कम होता है। यह मुद्रा मधुमेह और दिल की बीमारियों को भी दूर करता है। इसे गर्मी में ज्यादा समय तक न करें।

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सूर्य-मुद्रा
 

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वरूण मुद्रा

इस मुद्रा का अभ्‍यास करने के लिए कनिष्ठा (छोटी) अंगुली को अंगूठे से लगाकर मिलायें। यह मुद्रा शरीर में रूखापन दूर करके चिकनाई बढ़ाती है, इससे त्‍वचा की खोई रंगत वापिस आती है त्‍वचा मुलायम हो जाती है। चर्मरोग, रक्त विकार एवं शरीर में पानी की कमी से उत्‍पन्‍न बीमारियों केा दूर करने के लिए इस अभ्‍यास को करें। इससे मुहांसे भी दूर होते हैं।

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वरूण मुद्रा
 

बैठे-बैठे करें ये 5 योगासन, दूर होंगी 10 बीमारियां

नियमित योग का अभ्‍यास करने से शरीर लचीला और निरोग होता है, योगासन में ‘आसन’ शब्‍द का अर्थ है ‘बैठना’, यहां हम बैठकर करने वाले योग के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिनका अभ्‍यास आप कहीं भी कर सकते हैं।
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      बैठकर किये जाने वाले योग

      योगासन के कई प्रकार हैं और इसमें से कई के बारे में आप भी जानते होंगे, लेकिन इस स्‍लाइडशो में हम आपको ऐसे योगासन के बारे में बता रहे हैं जिसे बैठकर किया जाता है। योग आसन में ‘आसन’ शब्‍द का अर्थ है ‘बैठना’, तो इसे बैठकर करना अधिक फायेदमंद है। योग का नियमित अभ्‍यास हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से बहुत ही फायदेमंद है, इससे हमारा शरीर लचीला तो होता है साथ ही सामान्‍य और खतरनाक बीमारियों से भी बचाव होता है। तो आगे के स्‍लाइडशो में जानिये बैठकर किये जाने वाले योगासनों के बारे में। इनको आप कभी भी और कहीं पर भी आसानी से कर सकते हैं।

      बैठकर किये जाने वाले योग
       
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      सुखासन

      जैसा की नाम से इंगित हो रहा है कि बैठ कर किये जाने वाले योग में सुखासन सबसे आसान योग है। इसे करने के लिए आप जमीन पर पैर मोड़ कर आराम से बैठ जाइए। दोनों हाथों की हथेलियों को खोल कर एक-के ऊपर एक रख दीजिए। इस आसन को करते समय अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा कर के बैठें और उसे बिल्‍कुल भी ना मोड़े। सुखासन से पैरों का रक्त संचार कम हो जाता है और अतिरिक्त रक्त अन्य अंगों की ओर संचारित होने लगता है जिससे उनमें क्रियाशीलता बढ़ती है। यह तनाव हटाकर चित्त को एकाग्र कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।

      सुखासन
       
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      पद्मासन

      संस्कृत शब्द पद्म का अर्थ होता है कमल। इसीलिए पद्मासन को कमलासन भी कहते हैं। ध्यान मुद्रा के लिए यह आसन सबसे अच्छी मुद्रा है। इस आसन को करने के लिए जमीन पर बैठकर बाएं पैर की एड़ी को दाई जांघ पर इस प्रकार रखते हैं कि एड़ी नाभि के पास आ जाएं। इसके बाद दाएं पांव को उठाकर बाई जांघ पर इस प्रकार रखें कि दोनों एड़ियां नाभि के पास आपस में मिल जाएं। इस मुद्रा का अभ्‍यास करते सम गहरी सांस लेने का अभ्‍यास करें।

      पद्मासन
       
 
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    सिद्धासन

    इस आसन को करने के लिए दंडासन में बैठकर पैरों को एक दूसरे पर रखें और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और अपने हथेलियों को घुटनों पर आराम से रखें। सिद्धासन कूल्‍हों और रीढ की हड्डी की मजबूती प्रदान करता है। लेकिन इस पूरे आसन के दौरान गहरी सांसें लेना ना भूलें।

    इसे भी पढ़ें: इन 5 योगासनों से मजबूत होगी पाचन शक्ति और दूर रहेंगी लिवर की बीमारियां

    सिद्धासन
     
  • 5

    बालासन

    बालासन को आप किसी भी समय कर सकते हैं, यहां तक के रात के खाने के बाद भी इस योग को किया जा सकता है। इस आसन को करने से पेट की चर्बी कम होती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके लिए, घुटने के बल जमीन पर बैठ जाएं जिससे शरीर का सारा भाग एड़ियों पर हो। गहरी सांस लेते हुए आगे की ओर झुकें। आपका सीना जांघों से छूना चाहिए और माथे से फर्श छूने की कोशिश करें। कुछ सेकेंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए वापस उसी अवस्था में आ जाएं।

    इसे भी पढ़ें: झड़ते बाल, कमजोर दिमाग और दिल की बीमारियों को ठीक करता है ये एक योगासन

    बालासन
     
  • 6

    शशकासन

    इस आसन को करते समय खरगोश जैसी आकृति बन जाने के कारण इसे शशकासन कहते हैं। इस आसन को करने के लिए वज्रासन में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों को सांस भरते हुए ऊपर उठा लें। कंधों को कानों से सटा हुआ महसूस करें। फिर सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाते हुए, सांस बाहर निकालते हुए हथेलियां को जमीन पर टिका दें। फिर माथे को भी जमीन पर टिका दें। कुछ समय तक इसी स्थिति में रहकर वापस वज्रासन की‍ स्थिति में आ जाये। यह आसन पीठ, कंधे और बाहों खिंचाव में मदद करता है।

    शशकासन
     
  • 7

    अर्ध-मत्स्येन्द्रासन

    अर्ध मत्स्येन्द्रासन रीढ़ को आराम देने के साथ पीठ दर्द या पीठ संबंधी परेशानियों से निजात दिलाता है। इस आसन को करने के लिए पैरों को सामने की तरफ फैलाकर बैठ जाएं, रीढ़ तनी हो और दोनों पैर एक-दूसरे से लगे हों। अपने बाएं पैर को मोड़ें और उसकी एड़ी को पुष्टिका के दाएं हिस्से की और ले जाएं। अब दाएं पैर को बाएं पैर की ओर लाएं और बायां हाथ दाएं घुटनों पर और दायां हाथ पीछे ले जाएं। कमर, कन्धों और गर्दन को इस क्रम में दाईं और मोड़ें। लम्बी सांसे लें और छोड़ें।  शुरुआती मुद्रा में आने के लिए सांस छोड़ना जारी रखें।

    अर्ध-मत्स्येन्द्रासन
     
  • 8

    भद्रासन

    यह आसन टांगों को बल देने के साथ फेफड़ों के लिए भी फायदेमंद होता है। इस आसन को करने के लिए अपने पैरों की एड़ियों को उल्टा कर जमीन पर जांघों में अंतर पर रखें और घुटने टिका कर बैठ जाइए। फिर दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जा कर अपने दोनो हाथों से दोनों पैरों के अंगूठों को पकडें। ताकि बायें पैर का अंगूठा दायें हाथ में आ जाए और दायें पैर का अंगूठा बायें हाथ में आ जाये। इस आसन को करते समय अपनी कमर को सीधा रखें।

    भद्रासन
     
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योगा करने से पहले कभी ना खाएं ये 5 जीजें, हो सकती हैं जानलेवा

योग सिखाने वाले गुरू बताते हैं कि योग करने से कम से कम 2 घंटे पहले तक कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके पीछे कई वाजिब कारण होते हैं, जैसे आप जो और जैसा खाते हैं उसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है और खराब खाने से न तो योग का फायदा होता है।
    • 1

      योगा क्लास से पहले क्या न खाएं

      योग सिखाने वाले गुरू बताते हैं कि योग करने से कम से कम 2 घंटे पहले तक कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके पीछे कई वाजिब कारण होते हैं, जैसे आप जो और जैसा खाते हैं उसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है और खराब खाने से न तो योग का फायदा होता है, बल्कि शरीर को नुकसान भी हो सकता है। चलिए जानें ऐसी कुछ चीज़ें जिन्हें योगा क्लास से पहले कभी नहीं खाना चाहिए और इनकी जगह आप क्या खा सकते हैं।   
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      योगा क्लास से पहले क्या न खाएं
       
    • 2

      नट्स का सेवन

      जहां एक और नट्स बेहद पौष्टिक और हेल्दी होते हैं, इनमें वसा और प्रोटीन भी काफी मात्रा में होता है और इसका सेवन योग से पहले करने पर ये रक्त संचार को बाधित कर सकते हैं। तो योग करने से पहले इन खाद्य का सेवन करने से बेहतर है कि आप ताजा रास्पबेरी खाएं।  
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      नट्स का सेवन
       
    • 3

      तला हुआ भोजन

      हम सभी जानते हैं कि तला हुआ भोजन जैसे फ्रैंच फ्राइज़ आदि को पचने में बहुत अधिक समय लगता है। तो अगर आप योग करने से दो घंटे पहले तक भी इनका सेवन करते हैं तो ये असहजता का कारण बनते हैं। इनके सेवन से बेहतर होगा कि आप ककड़ी या खीरे आदि का सेवन कर लें।  
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      तला हुआ भोजन
       
 
  • 4

    चीज़, मीट और मछली

    चीज़ हालांकि प्रोटीन और वस का एक अच्छा शाकाहारी विकल्प है, लेकिन वसा और प्रोटीन की उच्च मात्रा होने के कारण ये पचने में काफी समय लेता है। तो योग से पहले इसकी जगह आप एक डार्क चॉकलेट खा सकते हैं। वहीं मीट और मछली भी वसा और प्रोटीन से भरी होती हैं और धीमी गति से पचती हैं, योग से पहले इसकी जगह आप सेब खा सकते हैं। 
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    चीज़, मीट और मछली
     
  • 5

    एवोकाडो या फिर तीखा खाना

    आमतौर पर एवोकाडो को सूपरफूड माना जाता है, और ये होता भी है, लेकिन योग करने से पहले इसका सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके पाचन में शरीर को समय लगता है और यह योगाभ्यास के लिए सही नहीं है। इसकी जगह आप खट्टे फलों या उबली सब्जियों का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा मसालेदार और तीखे खाद्य भी योग करने से पहले नहीं खाने चाहिए।  
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    एवोकाडो या फिर तीखा खाना
     
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नाक की एलर्जी से छुटकारा दिलाएंगे ये 3 योग

ये नाक की गंदगी को साफ करने में मदद करते हैं साथ ही स्‍वसन प्रणाली को सही करते हैं। आज हम आपको इस लेख के माध्‍यम से इन योगासन को करने का तरीका बताएंगे।
    • 1

      नाक की एलर्जी

      नाक की एलर्जी से परेशान हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। कई योगासन ऐसे हैं जो श्वसन नली की एलर्जी में सुधार लाने के लिए प्रभावी माने जाते हैं। इसके लिए सेतुबंधासन, सर्वांगासन, वीरभद्रासन और अर्ध चंद्रासना क्रियाएं आपकी मदद कर सकते हैं। ये नाक की गंदगी को साफ करने में मदद करते हैं साथ ही स्‍वसन प्रणाली को सही करते हैं। आज हम आपको इस लेख के माध्‍यम से इन योगासन को करने का तरीका बताएंगे।

      नाक की एलर्जी
       
    • 2

      सेतुबंधासन

      अपनी पीठ के बल लेट जायें। अपने बाज़ुओं को धड़ के साथ रख लें। टांगों को मोड़ कर पैरों को अपने कूल्हों के करीब ले आयें। अब हाथों पर वज़न डाल कर धीरे धीरे कूल्हों को उपर उठायें। ऐसा करते वक़्त श्वास अंदर लें। पैरों को मज़बूती से टिका कर रखें। पीठ जितनी मोडी जाए, उतनी ही मोड़ें। अब दोनो हाथों को जोड़ लें। आपके लिए मुमकिन हो तो दृष्टि नाक पर केंद्रित करें वरना छत की ओर देख सकते हैं। इस मुद्रा में 5-10 सेकेंड रहें, फिर कूल्हों को वापस ज़मीन पर टिकायं। नीचे आते वक़्त श्वास छोड़ें। हो सके तो 2 से 3 बार दौहरायें।

      सेतुबंधासन
       
    • 3

      सर्वांगासन

      सबसे पहले आप साफ-सुथरी जगह पर चटाई बिछाकर लेट जाएं। अब अन्दर की और धीरे-धीरे सांस ले और पैरों को ऊपर की और उठाएं। इस क्रिया में पहले पैरों को ऊपर उठाएं, फिर कमर को, इसके पश्चात अपने छाती तक के भाग को ऊपर की और उठाये। इस क्रिया को करते वक्त पैरों को सीधा रखें, अपने घुटनों को मौड़े नहीं। आप अपनी कमर को सहारा देने के लिए अपने दोनों हाथों को कोहनी से मोड़कर कमर पर लगाकर इसे सहारा दें। इस आसन में शरीर का पूरा भार कंधों पर रहता है। इस अवस्था में आपको सामान्य रूप से सांस लेना और छोड़ना है। जब आपको इसकी अच्छी प्रैक्टिस हो जाये तक आसन के अभ्यास का समय बढ़ाकर आप 3 मिनट तक का कर सकते है।

      सर्वांगासन
       
 
  • 4

    वीरभद्रासन

    इसे करने के लिए पैरों के बीच दो से ढाई फुट का अंतर रखें, फिर हाथों को एकदम सीधा रखें। आगे की तरफ झुकें, ध्‍यान रखें कि आपका पैर पूरी तरह से खिंचा हुआ होना चाहिए। फिर हाथों को जोड़कर ऊपर ले जायें। फिर शुरूआत करने की स्थिति में आयें।

    वीरभद्रासन
     
  • 5

    अर्ध चंद्रासना

    अर्ध चंद्रासन करने के लिए, शुरू करने के साथ ही अपने पैरों को एक साथ करके  खड़े हो जाये। फिर दाएं हाथ को उपर सीधा कान और सिर से सटा हुआ रखते हुए ही कमर से बाईं ओर झुकते जाएं। जहां तक हो सके बाईं ओर झुके फिर इस अर्ध चंद्र की स्थिति में 30-40 सेकंड तक रहें। वापस आने के लिए धीरे-धीरे पुन: सीधे खड़े हो जाएं। इस आसन को 4 से 5 बार करने से लाभ होगा।

    अर्ध चंद्रासना
     
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कड़कड़ाती सर्दी में भी बॉडी को गर्म रखती हैं घर की ये 5 औषधियां

कुछ औषधियों को आहार में शामिल करने से हमारा पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है और रक्त प्रवाह सही रहता है, जिस कारण शरीर में गर्मी बनी रहती है। तो आइये आपको बताते हैं कि कौन-कौन सी औषधियां सर्दियों में शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं। ये औषधियां आमतौर पर हर भारतीय घरों में मौजूद होती है।
    • 1

      अदरक

      अदरक का सेवन करने से शरीर में रक्त प्रवाह को ठीक रखता है जो कि शरीर की गर्मी को बढ़ाने का भी कार्य करता है। अदरक का इस्तेमाल करके आप नहा भी सकते हैं और सर्दी-खांसी जैसी समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए थोड़े अदरक को पानी के साथ उबालें और नहाने वाले पानी में मिला दीजिए और शावर ले लीजिए।

      अदरक
       
    • 2

      काली मिर्च

      काली मिर्च बहुत फायदेमंद जड़ी-बूटी होती है, जिसका सर्दियों में जरुर सेवन करना चाहिए। इसके एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण सर्दियों में सूप या चाय आदि जैसी गर्म चीजों के साथ काली मिर्च को मिलाकर सेवन करने से शरीर खांसी और जुखाम जैसी बीमारियों से भी दूर रहता है।

      काली मिर्च
       
    • 3

      दालचीनी

      दालचीनी में कई औषधीय गुण होते हैं जो हमारी त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। लेकिन यह शरीर के अंदर अतिरिक्त नमी को सूखाने और गर्म रखने में मदद करती है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं और पाचन तंत्र को सही करने वाले तत्व भी होते हैं।

      दालचीनी
       
 
  • 4

    इलायची

    इलायची में कई स्वास्थ्यवर्धक तत्व होते हैं, यह आपके मुंह से बदबू दूर करने के साथ शरीर को गर्म भी रखती है। इसके अंदर एक्स्पेक्टोरेंट गुण होते हैं, जो श्वास प्रणाली को सही रखती है। दूसरी तरफ इलायची आपके शरीर का अंदरूनी तापमान बढ़ाती है और पसीना बाहर निकालती है साथ ही ठंड की वजह से होने वाले सिरदर्द को भी दूर करती है।

    इलायची
     
  • 5

    लाल मिर्च

    लाल मिर्च में विटामिन सी होता है, जो खांसी और बलगम की समस्या को खत्म करने में मदद करती है। इसके अंदर उच्च मात्रा में पाया जाने वाला कैप्साइसिन शरीर का मेटाबॉलिक रेट और अंदरूनी तापमान बढ़ाने में मदद करता है।

    लाल मिर्च
     
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वेजिटेरियन्स अच्छी बॉडी बनाने के लिए खाएं ये 5 फूड्स

तो शाकाहारी रहकर अगर आप भी अच्‍छी बॉडी पाना चाहते हैं तो हम आपको 5 ऐसे फूड के बारे में बता रहें जिन्‍हें आप ट्राई कर सकते हैं।
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      बॉडी बिल्डिंग

      बॉडी बिल्डिंग की बात आती है तो हमें एक बहुत बड़ा मिथ सुनने को मिलता है कि अच्छी बॉडी केवल नॉन वेजिटेरियन (मांसाहारी) की ही बन सकती है। मगर ऐसा बिल्कुल भी नही हैं, क्यों कि भारत में कई ऐसे बॉडीबिल्डर और पहलवान हुए हैं जो शाकाहारी रहकर अच्छी बॉडी बना पाने में सफल ही नही रहे बल्कि, उन्होंने दुनिया में अपना नाम किया है। तो शाकाहारी रहकर अगर आप भी अच्छी बॉडी पाना चाहते हैं तो हम आपको 5 ऐसे फूड के बारे में बता रहें जिन्हें आप ट्राई कर सकते हैं।

      बॉडी बिल्डिंग
       
    • 2

      अश्‍वगंधा

      अश्‍वगंधा ऐसी जड़ी-बूटी है जो दुनिया भर में फेमस है। इसे शक्तिवर्धक हर्ब्‍स के तौर पर भी जाना जाता है। यह टेस्‍टोस्‍टेरॉन लेवल को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है, जिससे व्‍यक्ति की शारीरिक ताकत बढ़ती है और मसल्‍स बिल्डिंग भी बढ़ती है। यह कोलेस्‍ट्रॉल को कंट्रोल कर ह्रदय संबंधी समस्‍याओं को दूर करता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और स्‍ट्रेस लेवल को कम करता है।

      अश्‍वगंधा
       
    • 3

      सतावरी

      सतावरी में फाइबर, फोलिक एसि‍ड, विटमिन ए, सी और ई भरपूर मात्रा में पाई जाती है। यह एक एंटीऑक्‍सीडेंट हर्ब्‍स है। सेल डैमेज को सही करता है। सतावरी में हाई लेवल एमीनो एसिड पाया जाता है। जो शरीर से अतिरिक्‍त पानी और नमक को यूरीन के रास्‍ते से बाहर करता है, इससे बॉडी बनाने में सहायता मिलती है।

      सतावरी
       
 
  • 4

    बीन्‍स

    बीन्‍स में किसी भी हरी सब्जियों से कहीं ज्‍यादा प्रोटीन और सॉल्‍यूबल फाइबर्स होते हैं। लेकिन एमिनो एसिड चेन पूरे न होने के कारण इसका प्रोटीन अधूरा होता है, अगर बीन्‍स को ब्राउन राइस के साथ खाया जाए तो यह पूरा हो जाता है। हैवी वर्कआउट के बाद इसे ले सकते हैं।

    बीन्‍स
     
  • 5

    लो फैट मिल्‍क और मिल्‍क प्रोडक्‍ट

    यह व्‍हे प्रोटीन और कैसिईन प्रोटीन बहुत अच्‍छा जरिया होता है। व्‍हे प्रोटीन एग प्रोटीन के मुकाबले ज्‍यादा अच्‍छा होता है। जबकि कैसिईन प्रोटीन थोड़ा स्‍लो डाइजेस्टिव प्रोटीन होता है जो व्‍हे प्रोटीन के साथ मिलकर पॉजिटिव नाइट्रोजन को बॉडी में बैलेंस करता है और बॉडी में लंबे समय ते प्रोटीन की जरूरत को पूरा करता है, जिससे बॉडी बिल्डिंग में मदद मिलती है।

    लो फैट मिल्‍क और मिल्‍क प्रोडक्‍ट
     
  • 6

    पी नट बटर

    यह प्रोटीन का बहुत अच्‍छा जरिया है जो कि मसल्‍स बनाने और उसकी मरम्‍मत करने के लिए बहुत अच्छा होता है। इसमें मोनो और पॉलीसेचुरेटेड फैट्स पाए जाते हैं जो मसल्‍स के लिए बहुत फायदेमंद है। एक हैवी वेट वर्कआउट के बाद इसे ले सकते हैं। इसके अलावा ड्राई फूड और केले का भी सेवन मसल्‍स बनाने के लिए किया जा सकता है।

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    पी नट बटर
     
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इन 5 तरीकों से कभी ना करें शहद का सेवन, बन जाएगा जहर

शहद में इतने गुण समाए हैं कि इसे एक औषधी कहा जाता है।
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      शहद का सेवन

      शहद में इतने गुण समाए हैं कि इसे एक औषधी कहा जाता है। शहद में कई बीमारियों का समाधान छिपा है। लेकिन आपको ये जानना भी जरूरी है कि अगर शहद का सही तरीके से सेवन ना किया जाए तो ये हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर भी डालता है। आयुर्वेद में यह बताया गया है कि शहद को किन चीजों के साथ खाएं और किनके साथ नहीं। आइए जानते हैं किन रूपों में हानिकारक है शहद का सेवन।

      शहद का सेवन
       
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      गर्म चीजों के साथ

      गर्म चीजों के साथ शहद का सेवन जहर के समान माना जाता है। शहद की तासीर गर्म होती है। अगर इसे गर्म खाने के साथ खाते हैं तो दस्त यानि कि लूज मोशन होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इसके अलावा भी कई हेल्थ प्रॉब्लम्स होने का डर बना रहता है।

      गर्म चीजों के साथ
       
    • 3

      चाय या कॉफी

      अगर आपको लगता है कि सर्दी-जुकाम होने पर अगर चाय के साथ शहद का सेवन किया जाए तो बहुत फायदेमंद होगा तो आपको बता दें कि ऐसा कभी भूलकर भी ना करें। चाय या कॉफी के साथ शहद का इस्तेमाल करने से ये बॉडी का टेम्प्रेचर बढ़ा देता है। जिसके चलते शरीर में घबराहट और स्ट्रेस बढ़ता है।

      चाय या कॉफी
       
 
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    मूली के साथ

    शहद और मूली आपस में एक दूसरे के धुरविरोधी हैं। शहद के साथ मूली खाने से बॉडी में टॉक्सिन्स बनने लगते हैं। इससे बॉडी पार्ट डेमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। शहद और मूली के बीच में करीब 1 घंटे का अंतर होना चाहिए।

    मूली के साथ
     
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    गर्म पानी के साथ

    हालांकि शहद को गुनगुने पानी के साथ लेने की ही सलाह दी जाती है। लेकिन अगर आप इसे ज्यादा गर्म के साथ लेते हैं तो ऐसा करना छोड़ दें। ज्यादा गर्म पानी के साथ शहद लेने से बॉडी में गर्मी पैदा होती है। जिसके चलते पेट खराब और अन्य रोग होने की संभावना बढ़ जाती हैं।

    गर्म पानी के साथ
     
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सुर्य मुद्रा से 15 दिन में घटेगा वजन, पेट की बीमारियां हो जाएंगी छूमंतर!

सूर्य मुद्रा को लोग अग्नि मुद्रा के नाम से भी जानते हैं। मोटापा व डायबिटीज आदि समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए इस मुद्रा का अभ्यास बेहद फायदेमंद होता है। चलिए जानते है कैसे करें सूर्य मुद्रा और क्या हैं इसके फायदे।
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      सूर्य मुद्रा और इसके फायदे

      हमारे जीवन में योग का बेहद महत्व है और योग में सूर्य मुद्रा का बहुत महत्व है। मुद्राएं करने से शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक लाभ होते हैं। ऐसी ही एक लाभदायक मुद्रा है सूर्य मुद्रा। सूर्य मुद्रा को लोग अग्नि मुद्रा भी पुकारते हैं। मोटापा व डायबिटीज आदि समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए इस मुद्रा का अभ्यास बेहद फायदेमंद होता है।

      सूर्य मुद्रा और इसके फायदे
       
    • 2

      सूर्य मुद्रा करने की विधि

      सूर्य मुद्रा करने के लिए सिद्धासन, पदमासन या सुखासन में बैठ जाएं। इसके बाद अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रख लें और हथेलियां ऊपर की ओर रखें। अब पहले अनामिका उंगली (अनामिका उंगली आपकी रिंग फिंगर को कहा जाता है) को मोड़कर अंगूठे की जड़ में छुलाएं और अंगूठे से इसे दबा लें। ऐसे में आपकी बाकी बची हुई तीनों उंगलियों को बिल्कुल सीधी रखें। इस प्रकार बनने वाली मुद्रा को अग्नि या सूर्य मुद्रा कहा जाता है।

      सूर्य मुद्रा करने की विधि
       
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      सूर्य मुद्रा को करने के लाभ

      • दिन में दो बार 15 मिनट के लिए सूर्य मुद्रा का अभ्यास करने से कोलेस्ट्राल का स्तर कम होता है।
      • शरीर में सूजन होने पर भी सूर्य मुद्रा करने से यह दूर होती है।
      • सूर्य मुद्रा का नियमित अभ्यास करने से शरीर में बल पैदा होता है और पेट के रोग दूर होते हैं।
      • साथ ही इसके अभ्यास से मानसिक तनाव दूर होता है और भय, शोक आदि दूर होते हैं।

       

      सूर्य मुद्रा को करने के लाभ
       
 
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    वज़न कम करें

    सूर्य मुद्रा करने से वजन भी कम होता है। मोटापे से पीड़ित लोगों को अपना अतिरिक्त वजन कम करने के लिए भी इस मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए। खासतौर पर प्रसव के बाद जिन महिलाओं में मोटापा बढ़ जाता है उनके लिए सूर्य मुद्रा बहुद फायदेमंद होती है। क्योंकि इस मुद्रा के अभ्यास से पाचन प्रणाली बेहतर बनती है।

    वज़न कम करें
     
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    कब न करें सूर्य मुद्रा

    • एसिडिटी और अम्लपित्त की समस्या होने पर यह मुद्रा ना करें।
    • शरीर बहुत ज्यादा कमजोर हो तो भी आपको सूर्य मुद्रा नहीं करनी चाहिए।
    • सूर्य मुद्रा करने से शरीर का ताप बढ़ता है इसलिए गर्मियों में इस मुद्रा करने से पहले थोड़ा पानी पी लेना चाहिए।
    • आमतौर पर योगाभ्यास खाली पेट किया जाता है, लेकिन सूर्य मुद्रा को आप कुछ खाने के बाद 10 मिनट के अंतराल पर भी कर सकते हैं।

     

    कब न करें सूर्य मुद्रा
     
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15 दिन में छूटेगी सिगरेट की लत, रोजाना करें ये 4 योगासन

अगर आप इस आदत को छोड़ना चाहते तो इन 4 योगासन से 15 दिन में ही सिगरेट की लत छूट सकती है। हालांकि इसके लिए दृढ़ निश्‍चय आपको ही करना होगा।
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      सिगरेट की लत

      सिगरेट, तंबाकू, गुटखा जैसी चीजें कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारक है। इन दुर्व्‍यसनों से ना सिर्फ आप स्‍वयं बल्कि आपका पूरा परिवार प्रभावित होता है। इस बुरी लत को छोड़ना ही बीमारी पर विजय पाना है। अगर आप इस आदत को छोड़ना चाहते तो इन 4 योगासन से 15 दिन में ही सिगरेट की लत छूट सकती है। हालांकि इसके लिए दृढ़ निश्‍चय आपको ही करना होगा।

      सिगरेट की लत
       
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      सुखासन

      सुखासन करने की विधि बड़ी सरल है। इसमें सिर और गर्दन को एक सीध में रखकर तथा रीढ़ की हड्डी को सीधा कर बैठना पड़ता है। दोनों पैरों को मोड़कर अपने हाथों को पैरों पर रख दें। इससे पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहता है। ज्यादातर लोग तनाव की वजह से ही सिगरेट पीना शुरू करते हैं। ऐसे में तनाव दूर करने के लिए इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।

      सुखासन
       
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      कपालभाति प्राणायाम

      कपालभाति प्राणायाम शरीर में रक्त के संचार को दुरुस्त करता है। इससे शरीर की तंत्रिकाएं ऊर्जा से भरपूर होती हैं। कपालभाति मस्तिष्क की कोशिकाओं को जीवंत करने में मददगार है। इससे आपकी इच्छाशक्ति मजबूत होती है जिससे आप सिगरे पीने की आदत को छोड़ने में मदद मिलती है।

      कपालभाति प्राणायाम
       
 
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    अनुलोम-विलोम

    अनुलोम विलोम नासिका छिद्रों से बारी-बारी सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया है। इससे दिमाग तो शांत रहता ही है साथ ही साथ तंत्रिका-तंत्र की सेहत भी बेहतर रहती है।

    अनुलोम-विलोम
     
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    शवासन

    शवासन सभी आसनों को कर लेने के बाद सबसे अंत में करना चाहिए। इसे करने के लिए एकाग्रता की बहुत जरूरत होती है। इसमें आपको अपने पूरे शरीर को ढीला छोड़कर सीधा लेटना होता है। इस आसन को करते हुए शव जैसी स्थिति हो जाने की वजह से ही इसे शवासन कहा जाता है।

    शवासन
     
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इन 5 बीमारियों का काल है ये ‘आयुर्वेदिक जूस’

जब भी किसी स्‍वस्‍थ्‍यवर्धक पेय पदार्थ की बात होती है तो फलों और सब्जियों के जूस की चर्चा जरूर होती है। मगर ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि कौन सा जूस किस बीमारी में या किन परिस्थितियों में पिया जाए तो उससे गंभीर से गंभीर बीमारियां दूर रहती है। तो चलिए आज हम आपको 5 ऐसी बीमारियों को नष्‍ट करने के लिए 5 आयुर्वेदिक जूस के बारे में बता रहे हैं जिसे बनाना बहुत आसान है और आपके बजट में भी है। इसे आप अपने दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।
    • 1

      माइग्रेन (अधकपारी)

      एक गिलास पानी में एक नींबू का रस और एक चम्मच अदरक का रस मिलाकर पियें। माइग्रेन की समस्‍या से छुटकारा मिलेगा।

      माइग्रेन (अधकपारी)
       
    • 2

      गठिया

      गर्म पानी में शहद के साथ नींबू का रस पियें। गर्म पानी में एक-एक चम्मच लहसुन और प्याज के रस का सेवन किया जा सकता है। गठिया के रोगी को फनसी और चेरी का रस विशेष रूप से पीनी चाहिए। आलू का रस भी उपयोगी हो सकता है। शराब, मांसाहार तथा अत्यधिक प्रोटीनयुक्त आहार का त्याग करें।

      गठिया
       
    • 3

      फ्रेक्चर

      अगर हड्डी टूट गई है तो आप पालक, चौलाई, मेथी, सहजन और अजवाइन के रसों को मिलाकर सेवन करें। आंवला, तरबूज, गाजर, अमरूद और पपीते का रस पीने सेचोट वाले हिस्से को विशेष आराम मिलता है और उचित मात्रा में प्रोटीन प्राप्त होता है। ऐसा आप डॉक्‍टर से इलाज करने के बाद ही करें तो बेहतर रहेगा। इस जूस से हड्डी जल्‍दी जुड़ती है।

      फ्रेक्चर
       
 
  • 4

    अपच

    सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू निचोड़ कर पियें। भोजन के समय से आधा घंटा पहले एक चम्मच अदरक का रस पियें। पपीता, अनानास, ककड़ी और पत्ता गोभी का रस तथा गाजर, बीट और पालक के मिश्रित रस का सेवन करें।

    अपच
     
  • 5

    अनिद्रा

    कुछ लोगों को अनिद्रा की शिकायत रहती है। देर रात तक नींद नही आती है। ऐसी स्थिति में सेब, अमरूद और आलू का रस इसके अलावा पालक और गाजर के मिश्रित रस को अनिद्रा की स्थिति में पीना फायदेमंद होता है।

    अनिद्रा
     
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सेहत को फायदा ही नहीं नुकसान भी पहुंचाता है करेले का जूस

डायबिटीज से लेकर वजन घटाने तक, सभी बीमारियों के लिए वरदान माने जाने वाला करेले का जूस हर किसी के लिए सिर्फ फायदों से भरपूर हो, ऐसा जरूरी भी नहीं है।
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      नुकसान भी पहुंचाता है करेले का जूस

      करेले का जूस बहुत ही फायदेमंद है क्योंकि इसमें शरीर की जरूरत को पूरा करने के लिए सभी जरूरी विटामिन्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं। जी हां डायबिटीज से लेकर वजन घटाने तक, सभी बीमारियों के लिए वरदान माने जाने वाला करेले का जूस हर किसी के लिए सिर्फ फायदों से भरपूर हो, ऐसा जरूरी भी नहीं है। क्‍योंकि किसी भी चीज की अति आपके लिए नुकसानदायक होती है।  इसमें कोई शक नहीं है कि करेले का जूस ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। लेकिन कहते हैं न कि किसी भी चीज की अति नुकसानदायक होती है। ऐसा ही करेले के साथ भी है शुगर को कम करने के लिए लोग इसका जरूरत से ज्‍यादा सेवन कर लेते हैं जिससे सेहत को नुकसान हो सकता है। हम आपको कुछ ऐसे कारण बता रहे हैं जिनसे साबित होता है कि करेला सिर्फ फायदेमंद ही नहीं नुकसानदायक भी होता है। आइए जानें क्‍या है वह कारण।

      नुकसान भी पहुंचाता है करेले का जूस
       
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      लिवर व किडनी के मरीजों के लिए नुकसानदायक

      लिवर व किडनी के मरीजों के लिए के लिए इसका अत्याधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है। यह लिवर में एन्जाइम्स का निर्माण बढ़ा देता है जिससे लिवर प्रभावित होता है। करेले का बीज में लेक्टिन नामक तत्व है जो आंतों तक प्रोटीन के संचार को रोक सकता है।

      लिवर व किडनी के मरीजों के लिए नुकसानदायक
       
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      हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा

      ब्लड में शुगर की मात्रा अधिक होने से डायबिटीज होता हैं और ब्लड में शुगर की कमी हो जाए तो उसे ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ कहते हैं। शुगर की कमी, शुगर बढ़ने से कहीं ज्यादा हानिकारक हो सकती है। इसमें मरीज को चक्कर आना, बेहोश होकर कहीं भी गिर जाना जानलेवा हो सकता है। यानी यह एक ऐसी स्थिति है जब ब्लड शुगर कम होने से व्यक्ति बेहोश हो जाता है। और जब हम करेले के जूस का जरूरत से ज्‍यादा सेवन करते हैं तो यह स्थिति उत्‍पन्‍न हो जाती है।

      हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा
       
 
  • 4

    पेट में हो सकती है गड़बड़

    करेला खाने से पेट की समस्याएं हो सकती हैं। इसके दस्त और पेट में दर्द होने जैसे कुछ साइड इफेक्ट होते हैं। इसके अलावा ज्यादा मात्रा के सेवन से आपको गले और सीने में जलन भी महसूस हो सकती है।

    पेट में हो सकती है गड़बड़
     
  • 5

    प्रेगनेंसी में नुकसानदायक

    करेले के जूस में मोमोकैरिन नामक तत्व होता है जो पीरियड्स के बहाव को बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान करेले के जूस का अधिक सेवन करने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। कई बार इसके अ धिक सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान पीरियड्स की स्थिति भी पैदा हो सकती है। साथ ही करेले में एंटी लैक्टोलन तत्व भी होते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान दूध बनने की प्रक्रिया में परेशानी का सबब बन सकता हैं।

    प्रेगनेंसी में नुकसानदायक
     
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    हीमोलाइटिक एनीमिया का खतरा

    करेले के अत्याधिक सेवन से हीमोलाइटिक एनीमिया हो सकता है। इस स्थिति में पेट में दर्द, सिर दर्द, बुखार या कोमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हीमोलाइटिक एनीमिया में एनीमिया के कारण लाल रक्त कोशिकाएं बड़ी संख्या में तेजी से फटने लगती है। इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली की खराबी भी इसका एक कारण है।
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    हीमोलाइटिक एनीमिया का खतरा
     
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सेहत और स्‍वाद से भरपूर हैं किचन में मौजूद ये स्‍टार शेप्‍ड मसाले

मसालों के औषधीय गुणों के बारे में आप जानते ही होगें लेकिन आज हम आपको आपकी ही किचन में मौजूद स्‍टार शेप्‍ड मसालों के फायदे के बारे में बताते हैं, आइए जानें।
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      स्‍टार शेप्‍ड मसाले

      मसाले हमारी रसोई का अभिन्‍न अंग है। हम अपनी रसोई में कई तरह के मसालों का इस्‍तेमाल करते हैं, जैसे हल्दी, धनिया, जीरा, मेथी, अजवाइन, हींग आदि रोजाना के खाने में शामिल होते है। लेकिन यह मसाले खाने को सुगंधित और लजीज ही नहीं बनाते बल्कि सेहत को भी दुरुस्त रखते हैं।  इनका सही तरीके से इस्तेमाल हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है और इनमें से ज्‍यादातर मसालों के औषधीय गुणों के बारे में हम आपको पहले बता भी चुके हैं। लेकिन आज हम आपको आपकी ही किचन में मौजूद स्‍टार शेप्‍ड मसालों के फायदे के बारे में बताते हैं, आइए जानें।

      स्‍टार शेप्‍ड मसाले
       
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      स्‍टार शेप वाला जीरा

      स्‍टार शेप के इस मसाले को ज्‍यादातर छौंके के लिए पसंद किया जाता है। जीरा आयरन का बहुत अच्‍छा स्रोत है। इसका सेवन नियमित रूप से करने से खून की कमी को दूर किया जा सकता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण ट्यूमर को बढ़ने से रोकते है। इसके अलावा जीरे का सेवन बवासीर में भी लाभकारी माना जाता है। साथ ही इन छोटे-छोटे बीजों में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जो आपकी पाचन क्रिया को ठीक करता है। जीरा त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंजाइम्स, विटामिन और मिनरल त्वचा को हेल्दी रखते हैं। जीरे के एंटी एजिंग गुण झुर्रियों को आने से रोकते हैं।

      स्‍टार शेप वाला जीरा
       
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      एंटीसेप्टिक गुणों वाली लौंग

      लौंग एक गर्म मसाला है जो पाचन तंत्र को ठीक रखता है। दांत दर्द से बचने के लिए लौंग के तेल का इस्‍तेमाल किया जाता है। इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक गुणों के कारण इसे बेहतर माउथवॉश भी कहते है। इसमें प्रोटीन, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं। इसमें विटामिन ‘ए’ और ‘सी’, मैगनीशियम और फाइबर भी पाया जाता है। यह सभी शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इसके अलावा यह मुहांसों को दूर करने में भी मदद करता है।

      एंटीसेप्टिक गुणों वाली लौंग
       
 
  • 4

    सुगंधित अजवाइन

    अजवाइन खाने में सुगंध के अलावा शरीर को स्‍वस्‍थ बनाए रखने में भी मदद करती है। इसमें भरपूर मात्रा में मौजूद एंटी-ऑक्‍सीडेंट दिमाग के लिए एक औषधि की तरह काम करता है। अजवायन रुचिकारक एवं पाचक होती है। यह भूख व पाचन शक्ति को बढ़ाकर पेट संबंधी अनेक रोग जैसे- गैस, अपच, कब्ज आदि को दूर करने में सहायक होती है। साथ ही अजवायन डायबिटीज रोगी को फंगल इंफेक्शन से भी बचाती है।

    सुगंधित अजवाइन
     
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    चक्र फूल या स्‍टार ऐनिस

    स्‍टार आकार का यह मसाला गर्म मसाले का मुख्‍य घटक है जिसे चक्र फूल या स्‍टार ऐनिस के नाम से जानते हैं। अपनी तेज, सुखद खुशबू के कारण, इसका इस्‍तेमाल बिरयानी, सीफूड और अन्‍य शाकाहारी व्‍यंजनों में किया जाता है। ऐनिस में आपकी पसंदीदा मसाला चाय के मुख्य घटकों में से एक है। भोजन के बाद ऐनिस की चाय लेने से सूजन, गैस, अपच और कब्ज जैसे पाचन संबंधी रोगों के इलाज में मदद मिलती है। इसके अलावा स्‍टार ऐनिस में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट और विटामिन ए और सी, डायबिटीज और जल्‍द उम्र बढ़ने के लिए जिम्‍मेदार फ्री रेडिक्‍लस से लड़ने में मदद करता है।

    चक्र फूल या स्‍टार ऐनिस
     
  • 6

    धनिया के बीज

    धनिया हर रसोई की शान है। बतौर मसाला और व्‍यंजनों का स्‍वाद बढ़ाने के इसे खूब इस्‍तेमाल किया जाता है। साबुत धनिये में ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करने की क्षमता होती है। धनिये में ऐसे तत्‍व होते है जो शरीर से कोलेस्‍ट्रॉल को कम कर देते है या उसे कंट्रोल में रखते हैं। इसके अलावा धनिये के बीज में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्‍सीडेंट, मिनरलल, विटामिन ए, सी और  आयरन पाया जाता है जो एनिमिया की समस्‍या को दूर करने और कैंसर से बचाव में मदद करता है।

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    धनिया के बीज
     
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कभी नहीं लेनी पड़ेगी नींद की गोली, अगर करेंगे ये काम

क्‍या आप भी बिस्‍तर पर सोने जाते हैं लेकिन आंखे बंद करने के बाद नींद नहीं आती? सोते हुए दिमाग में कुछ न कुछ चलता रहता हैं? अगर हां तो परेशान न हो, बस यहां दिये उपाय को अपनाएं फिर देखें कमाल।
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      अनिद्रा के लिए उपाय

      क्‍या आपको भी रोजाना नींद के लिए संघर्ष करना पड़ता है? काम करते समय नींद आती है लेकिन सो नहीं पाते? बिस्‍तर पर सोने जाते हैं लेकिन आंखे बंद करने के बाद नींद नहीं आती? सोते हुए दिमाग में बहुत सारे विचार आते हैं? नींद की कमी के कारण आपका स्‍वभाव भी चिड़चिड़ा हो गया है, हर बात पर आपको गुस्‍सा आने लगा है और अगले दिन का काम भी प्रभावित होने लगा है तो सतर्क हो जाएं। क्‍योंकि यह इनसोमनिया यानी अनिद्रा का संकेत हो सकता है। इस समस्‍या से बचने के लिए लोग नींद की गोलियों का सेवन करने लगते हैं। लेकिन इससे आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर विपरीत असर पड़ने लगता है। लेकिन परेशान न हो क्‍योंकि कुछ योगासन की मदद से आप इस समस्‍या से बच सकते हैं। जी हां इन योगासनों को अपने रूटीन में शामिल कर देखिए, यकीनन आपको अच्‍छी नींद आएगी और आप तरो-ताजा भी महसूस करेंगे।

      अनिद्रा के लिए उपाय
       
    • 2

      शवासन

      शवासन को करने से तन और मन दोनों ही तनावमुक्‍त रहते हैं, जिससे आपको सुकून की नींद आती है। इस आसन को करना बेहद ही आसान है। इसे करने के लिए आप चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं और हाथ-पांव को थोड़ा बाहर की तरफ सीधा रखें। अपने शरीर के हर अंग को रिलैक्स होने दें। इस आसन को आप किसी भी समय कर सकते हैं।

      शवासन
       
    • 3

      विपरीत करणी योग

      इस आसान को करने से आपकी हार्ट बीट सही चलती है और दिमाग की नसें भी सही काम करती है। इस आसन को आप सोने से पहले या फिर शाम को भी कर सकते है। इसे करने के लिए आप चटाई पर पीठ के बल लेट जाएं और इसके बाद अपने पैरों को जितना हो सके ऊपर तक उठाएं और स्ट्रेच करें। इसमें पैर मुड़़ने नहीं चाहिए। आपके हाथ सिर से पीछे (ऊपर) की ओर होने चाहिए। बांहों को शरीर से कुछ दूरी पर जमीन से लगाकर रखें। ऐसा करते समय आप लंबी सांस भरते रहें। हालांकि, यह ध्यान रखें कि आप इतना स्ट्रेच न करें कि आपको कमरदर्द की शिकायत हो जाए।

      विपरीत करणी योग
       
 
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    योग निंद्रा

    योग निद्रा का मतलब आध्यात्मिक नींद होता है। इसमें आप जागते हुए सोते है। सोने व जागने के बीच की स्थिति को योग निद्रा कहा जाता है। योग निंद्रा बरसों चली आ रही योग विधि हैं। यह दिमाग और शरीर के लिए थेरेपी कि तरह काम करती है। योग कि इस तकनीक में सिर्फ सांसों के आवागमन को महसूस करना होता है। इससे आप अनिद्रा की समस्‍या के साथ-साथ थकान, जोड़ों का दर्द, अवसाद आदि को भी दूर कर सकते हैं।

    योग निंद्रा
     
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    सर्वांगासन

    सर्वागासन में संपूर्ण शरीर का व्यायाम होता है इसीलिए इसे सर्व-अंग-आसन यानी सर्वांगासन कहा जाता है। सर्वांगासन करने के लिए सबसे पहले जमीन पर पीठ के बल लेट जाएं। फिर अपने दोनों हाथों को शरीर के साइड में रखें और दोनों पैरो को धीरे-धीरे ऊपर की और उठाइये। अपने पूरे शरीर को गर्दन से समकोण बनाते हुए सीधा करें और ठोड़ी को सीने से लगाएं। इस अवस्‍था में 7-10 बार गहरी सांस ले और फिर धीरे-धीरे नीचे आएं। सर्वांगासन में ब्लड सर्कुलेशन ब्रेन की ओर होने से एकाग्रता और बुद्धि में वृद्धि होती हैं। साथ ही आपको अच्‍छी नींद आती है।

    सर्वांगासन
     
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    सेतुबंध आसन

    इस आसन को करने से तनाव दूर होता है और आपको अच्‍छी नींद आती है। साथ ही यह आसन एनर्जी से भरपूर होता है। इसे आसन को करने के लिए पीठ के बल सीधा लेट जाएं, दोनों हाथ शरीर के बगल में सीधे रखें। हथेलियों को जमीन पर सटाकर रखें। अब दोनों घुटनों को मोड़ लें जिससे सिर्फ तलवे ही जमीन से छुएं। फिर सांस लेते हुए कमर को ऊपर उठाने की कोशिश करें। कोशिश करें कि आपका सीना ठुड्डी को छुएं। इस दौरान बाजुओं को कोहनी से मोड़ लें और हथेलियों को कमर के नीचे रखकर सहारा दें। कुछ देर बाद कमर नीचे लाएं और पीठे के बल सीधे लेट जाएं।
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    सेतुबंध आसन
     
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7 अद्भुत एंटीवायरल फूड के बारे में जानें

हालांकि बुखार, सर्दी या खांसी आदि से लड़ने में दवाएं अच्छी तरह से काम करती हैं, तो ऐसे में एंटी-वायरल गुणों वाले ये खाद्य पदार्थों का सेवन आपके शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। लिए ऐसी ही 7 प्राकृतिक एंटीवायरल चीज़ों के बारे में जानते हैं।
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      प्राकृतिक एंटीवायरल चीज़ें

      हम सभी जानते हैं कि आम सर्दी और फ्लू जैसे वायरस जनित संक्रमण हमें मौसमी में परिवर्तन के साथ कैसे परेशान करते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करने पर भी वे वायरस को प्रभावित नहीं कर पाते हैं। ऐसे में एंटी-वायरल गुणों वाले कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन इस तरह के मामूली संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा करने के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि बुखार, सर्दी या खांसी आदि से लड़ने में दवाएं अच्छी तरह से काम करती हैं, तो ऐसे में एंटी-वायरल गुणों वाले ये खाद्य पदार्थों का सेवन आपके शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। चलिए आज ऐसी ही कमाल की 7 प्राकृतिक एंटीवायरल चीज़ों के बारे में जानते हैं।  
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      प्राकृतिक एंटीवायरल चीज़ें
       
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      अदरक (Ginger)

      अदरक एक शक्तिशाली मसाला है जिसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। अदरक और शहद का सेवन कई प्रकार की मौसमी स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए किया जाता है। साथ ही जब आप फ्लू या सर्दी से पीड़ित होते हैं तो अदरक की चाय पीने से काफी राहत मिलती है। 
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      अदरक (Ginger)
       
    • 3

      हल्दी (Turmeric)

      हल्दी में मौजूद करक्यूमिन (Curcumin) नाम का तत्व एक अच्छा प्राकृतिक एंटी-वायरल होता है। अपने भोजन में हल्दी का प्रयोग करने से कई स्वास्थ्य समस्या को रोकने में मदद मिलती है। फ्लू या सर्दी आदि समस्याओं में भी हल्दी के दूध का सेवन बेहद लाभदायक होता है। 
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      हल्दी (Turmeric)
       
 
  • 4

    लहसुन (Garlic)

    लहसुन भी एक कमाल का औषधीय घटक होता है, जिसमें जीवाणुरोधी और एंटी-वायरल दोनों ही गुण पाए जाते हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि कच्चे लहसुन खाने से वायरल संक्रमण होने का जोखिम 60 प्रतिशत तक कम हो जाता है।  
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    लहसुन (Garlic)
     
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    मशरूम (Mushrooms)

    अधिकांश खाए जा सकने वाले मशरूम एंटीवायरल यौगिकों के भरपूर होते हैं। एंटीवायरल गुणों के मामले में शिटाकी मशरूम सबसे अच्छे होते हैं। इसका सेवन करने से फ्लू या सर्दी जैसी वायरल समस्याओं में लाभ होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत बनती हैं। 
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    मशरूम (Mushrooms)
     
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    ग्रीन टी, ऑलिव की पत्ततियां और लीकोरिस (Licorice)

    ग्रीन टी में कैटेचिन्स (catechins) होते हैं। माना जाता है कि इनसे वायरस के कुछ प्रकारों को रोका जा सकता है। इसलिए रोज़ाना एक कप ग्रीन टी का सेवन करें। इसके अलावा जैतून की पत्तियों में भी जीवाणुरोधी और एंटी-वायरल दोनों ही गुण पाए जाते हैं। इससे वायरल को रोका जा सकता है। लीकोरिस (Licorice) में भी शक्तिशाली एंटीवायरल गुण होते हैं और ये वायरस को कोशिका झिल्ली पर हमला करने से रोकता है। 
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    ग्रीन टी, ऑलिव की पत्ततियां और लीकोरिस (Licorice)
     
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जानें, रोगों के इलाज में कैसे करें मिट्टी का उपयोग

मिट्टी में बड़ी ताकत होती है, और इसका उपयोग कई तरह के रोगों के इलाज में भी किया जाता है। तो चलिए जानें रोगों के इलाज में मिट्टी का उपयोग और उपयोग का तरीका क्या होता है।
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      रोगों के इलाज में मिट्टी का उपयोग

      धरती के साथ मां शब्द को जोड़कर प्रयोग किया जाता है। कहा जता है कि सभी मिट्टी से पैदा हुए हैं और मिट् में ही विलीन हो जाते हैं। हो भी क्यों ना, मिट्टी दुनिया का सारा कूड़ा और सभी प्रकार की गन्दगी को भीतर समा लेती है और खुद को शुद्ध भी रखती है। जमीन के अंदर जो भी दबाया वो मिट्टी ही बन जाता है। मिट्टी में बड़ी ताकत होती है, और इसका उपयोग कई तरह के रोगों के इलाज में भी किया जाता है। 
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      रोगों के इलाज में मिट्टी का उपयोग
       
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      मिट्टी के चिकित्सीय गुण

      मट्टी नमें अनेक चिकित्सकीय गुण होते हैं, जैसे इसमें विषाक्त पदार्थों को भीतर खींच लेने का गुण होता है। त्वचा रोगों जैसे फोड़े-फुंसी, सूजन, दर्द आदि होने पर भी मड बथ काफी लाभदायक होती है। मिट्टी जलन, स्राव और तनाव आदि को दूर करती है। शरीर की अतिरिक्त ताप को मिट्टी सामान्य करती है। मिट्टी शरीर को ठंडक पहुंचाती है। यह तन की दुर्गंध और दर्द आदि को भी दूर करने वाली होती है। इसके अलावा यह शरीर को चुम्बकीय ताकत देती है जिससे उसमें चुस्ती-फुर्ती और ताकत आती है।
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      मिट्टी के चिकित्सीय गुण
       
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      इस्तेमाल में आने वाली मिट्टी

      ‘मिट्टी चाहे कोई सी भी किस्म की क्यों न हो लेकिन होनी साफ-सुथरी जगह की चाहिए जैसे जहां सूरज की रोशनी पहुंचती हो तथा जमीन से दो या ढाई फुट से निकाली हुई हो। हर मिट्टी को धूप में सुखाकर और छानकर इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है। इसके अलावा दीमक के टीले की भुरभुरी मिट्टी भी बहुत गुणकारी होती है। नहाने, सिर धोने या तैलीय त्वचा के फेस पैक के लिए मुलतानी मिट्टी बहुत लाभकारी होती है।
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      इस्तेमाल में आने वाली मिट्टी
       
 
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    क्या हैं मिट्टी के अलग-अलग प्रयोग

    मिट्टी में सोने से कई फायदे होते हैं। इससे नींद न आना, स्नायु की कमजोरी और खून की खराबी आदि रोग दूर होते हैं। इसके अलावा मिट्टी की मालिश-मिट्टी को शरीर पर अच्छी तरह से मलने से और शरीर पर लगाने से जहरीले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं। साबुन के स्थान पर शुद्ध मिट्टी लगाकर नहाने से कई प्रकार के रोगों में फायदा होता है। मिट्टी पर नंगे पैर चलने से गुर्दे के रोगों में आराम होता है, आंखों की रोशनी बढ़ती है और शरीर को चुम्बकीय शक्ति प्राप्त होती है। 
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    क्या हैं मिट्टी के अलग-अलग प्रयोग
     
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जानें, वरुण मुद्रा करने का तरीका और इसके फायदे

वरुण मुद्रा जल की कमी (डिहाइड्रेशन) से होने वाले सभी तरह के रोगों से बचाती है, साथ ही इसके कई और लाभ भी होते हैं। चलिए जानें मुद्रा करने का तरीका और इसके फायदे क्या हैं।
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      वरुण मुद्रा और इसके लाभ

      वरुण मुद्रा जल की कमी (डिहाइड्रेशन) से होने वाले सभी तरह के रोगों से बचाती है, साथ ही इसके कई और लाभ भी होते हैं। सालों से इस योह मुद्रा का अभ्यास किया जाता रहा है और लोग इससे लाभान्वित होते रहे हैं। कमाल की बात तो ये है कि इस मुद्रा का अभ्यास आप कभी भी और कहीं भी कर सकते हैं। चलिए जानें मुद्रा करने का तरीका और इसके फायदे क्या हैं। 
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      वरुण मुद्रा और इसके लाभ
       
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      क्या होती हैं मुद्राएं

      दरअसल कुंडलिनी या ऊर्जा स्रोत को जाग्रत करने के लिए मुद्राओं का अभ्यास किया जाता है। कुछ मुद्राओं के अभ्यास से आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।  योगानुसार चरम अभ्यस्थता के साथ इसे करने से अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों की प्राप्ति हो सकती है। लेकिन साधारण रूप से इसका अभ्यास करने से भी कई फायदे होते हैं। 
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      क्या होती हैं मुद्राएं
       
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      वरुण मुद्रा करने की विधि

      वरुण मुद्रा दो प्रकार की होती है। सबसे छोटी उंगली (कनिष्का) को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाने पर वरुण मुद्रा बनती है। दरअसल हाथ की सबसे छोटी उंगली को जल तत्व का प्रतीक माना जाता है और अंगूठे को अग्नि का। तो जल तत्व और अग्नि तत्व को एक साथ मिलाने से बदलाव होता है। बस आपको करना ये है कि, छोटी उंगली के सिरे को अंगूठे के सिरे से स्पर्श करते हुए धीरे से दबाएं। बाकी की तीन उंगुलियों को सीधा रखें।  
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      वरुण मुद्रा करने की विधि
       
 
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    वरुण मुद्रा करने के लाभ

    यह शरीर के जल तत्व के संतुलित बनाए रखती है। आंत्रशोथ तथा स्नायु के दर्द और संकोचन से बचाव करती है। एक महीने तक रोजाना 20 मिनट तक इस मुद्रा का अभ्यास करने से ज्यादा पसीना आने और त्वचा रोग को दूर करने में सहायक होती है। यह साथ ही इसके नियमित अभ्यास से रक्त भी शुद्ध होता है और शरीर में रक्त परिसंचरण बेहतर होता है। शरीर को लचीला बनाने में भी वरुण मुद्रा उपयोग होती है। यह मुद्रा त्वचा को भी सुंदर बनाती है।
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    वरुण मुद्रा करने के लाभ
     
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    कब करें और कब ना करें

    इस मुद्रा को सर्दी के मौसम में कुछ अधिक समय के लिए न करें। आप गर्मी या दूसरें मौसम में इस मुद्रा को 24 मिनट तक कर सकते हैं। वरुण मुद्रा को अधिक से अधिक 48 मिनट तक किया जा सकता है। जिन लोगों को सर्दी और जुकाम की शिकायद रहती है, उन्हे वरुण मुद्रा का अभ्यास अधिक समय तक नहीं करना चाहिए। 
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    कब करें और कब ना करें
     
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बच्‍चों को बनाना है बुद्धिमान, तो रोजाना कराएं ये 5 योगासन

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्‍चा होनहार और बुद्धिमान बने, उनका बेटा या बेटी हर प्रतिस्‍पर्धा में अव्‍वल रहे। मगर ऐसा बहुत कम हो पाता है, क्‍यों कि जिस प्रकार की परवरिश बच्‍चों को मिलनी चाहिए वह उन्‍हें नहीं मिल पाती है। ऐसे में बच्‍चे सेहत और जीवन के हर मोड़ पर पीछे रह जाते हैं। आज हम आपको 5 ऐसे योगासन के बारे में बता रहे हैं जिन्‍हें रोजाना करने से आपके बच्‍चे बुद्धिमान बनेंगे साथ ही वह शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ और क्रियाशील रहेंगे।
    • 1

      ॐ का उच्चारण

      ॐ का उच्‍चारण करने से मस्तिष्क में रक्तसंचार बढ़ जाता है। उनमें ध्यान लगाने की शक्ति का विकास होता है। इसे करने के लिए सुखासन में बैठ जाएं। हाथों को ज्ञानमुद्रा में रखें या फिर दोनों हथेलियों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़ें। लंबी सांस लेकर ॐ का उच्चारण करते हुए सांस छोड़ें। 3-5 बार दोहराएं। 

      ॐ का उच्चारण
       
    • 2

      ब्राह्मरी

      ब्राह्मरी आसन ग़ुस्से और थकान के कारण होने वाले तनाव को कम करता है, वोकल कॉर्ड्स को मज़बूत बनाता है, नींद की कमी को दूर भगाता है और बॉडी टिश्यूज़ को हील करने की प्रक्रिया को तेज़ करता है। इसे करने के लिए सुखासन में बैठें। आंखें बंद करके सांस लें और कानों में उंगली डालकर हम्मम की आवाज़ से सांस छोड़ें।

      ब्राह्मरी
       
    • 4

      भुजंगासन

      इस आसन से हाथ की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं, जिससे बच्चों को लेखन में काफ़ी मदद मिलती है। बच्चों की रीढ़ की हड्डी और पीठ भी मज़बूत बनती है। साथ ही यह आसन पाचनक्रिया को बेहतर बनाकर फेफड़ों को मज़बूत बनाता है। इसे करने के लिए पेट के बल सीधे लेट जाएं। दोनों हथेलियों को सीने के पास रखें। सांस लेकर सिर, कंधे और सीने ऊपर की ओर उठाएं। सांस छोड़ते हुए सिर को नीचे लाएं और थोड़ी देर रिलैक्स करें।

      भुजंगासन
       
 
  • 5

    त्रिकोणासन

    यह बॉडी स्ट्रेचिंग के लिए बहुत अच्छा आसन है। इससे हाथ, पैर, कूल्हे, रीढ़ की हड्डी, सीना आदि मज़बूत होते हैं। यह नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता है। सीधे खड़े होकर सांस अंदर लें। दोनों पैरों के बीच दूरी बनाते हुए सांस छोड़ें। दोनों हाथों को ऊपर उठाकर बाईं ओर झुकें। दाएं हाथ से बाएं पैर को छुएं और बाईं हथेली की ओर देखें। थोड़ी देर इसी अवस्था में रहें, फिर पहलेवाली स्थिति में आ जाएं। यही क्रिया दाईं ओर भी दोहराएं।

    त्रिकोणासन
     
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हर्ब्‍स के फायदे बताते हैं आयुर्वेद के ये 10 दोहे

कई तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से बचाने वाले आसान घरेलू हर्ब्‍स को लोगों ने दोहों के माध्‍यम से बताया है। आइए ऐसे ही कुछ आयुर्वेदिक दोहों के बारे में जानते हैं जिनमें आसान हर्ब्‍स के फायदे छिपे हैं।
    • 1

      सेहतमंद आयुर्वे‍दिक दोहे

      हमारी किचन में कई ऐसी हर्ब हमेशा मौजूद रहते है, जिनकी मदद से हम कई तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को आसानी से दूर रह सकते हैं। इन आसान नुस्‍खों को लोगों ने दोहों के माध्‍यम से बताया है। इन दोहों में बीमारियों से बचने और हेल्दी रहने के उपाय बताए गये हैं। आइए ऐसे ही कुछ आयुर्वेदिक दोहों के बारे में जानते हैं जिनमे आसान घरेलू नुस्‍खे छिपे हैं। इन्हें आजमाकर आप हेल्थ से जुड़ी समस्‍याओं को दूर कर सकते हैं।

      सेहतमंद आयुर्वे‍दिक दोहे
       
    • 2

      नीम की पत्तियां

      नीम पत्र को पीसिये, गाढ़ा लेप लगाय।
      चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय।। 

      नीम के पत्‍तों को पीसकर और गाढ़ा लेप लगाने से त्‍वचा सबंधी रोग दूर होते हैं और आपकी त्‍वचा खिल उठती है।

      नीम की पत्तियां
       
    • 3

      हरड़-बहेड़ा, आंवला

      हरड़-बहेड़ा, आंवला, घी सक्‍कर में खाए।
      हाथी दाबे कांख में, साठ कोस ले जाए।। 

      इस दोहे का मतलब है कि हरड़, बहेड़ा, आंवले को घी और शक्‍कर में मिलाकर खाने से शरीर मजबूत होता है

      हरड़-बहेड़ा, आंवला
       
 
  • 4

    मिश्री कत्‍था

    मिश्री कत्‍था तनिक सा, चूसें मुंह में डाल।
    मुंह में छाले हों अगर, दूर होंय तत्‍काल।। 

    इस दोहे का अर्थ है कि मुंह में छाले को तुरंत दूर करने के लिए आप घर में मौजूद थोड़ी से मिश्री और कत्‍थे को मुंह में डालकर चूसें।

    मिश्री कत्‍था
     
  • 5

    सुबह पानी पीना

    प्रात काल खाट से उठके तुरंत पिए जो पानी।
    वा घर वैद्य कबहूं न जावे, बात खुसरो ने जानी।। 

    इस आयुर्वेंदिक दोहे के अनुसार, सुबह उठने के साथ ही पानी पीने से कई प्रकारी की बीमारियों से बचाव होता है।

    सुबह पानी पीना
     
  • 6

    पुदीना और इलायची

    पुदीना और इलायची, लीजै दो-दो ग्राम।
    खायें उसे उबाल कर, उल्‍टी से आराम।। 
     

    अगर आप उल्‍टी की समस्‍या से परेशान हैं तो दो-दो ग्राम पुदीना और इलायची लेकर उसे पानी में उबालकर ठंडा करके पीने से उल्‍टी की समस्‍या दूर हो जाती है।

    पुदीना और इलायची
     
  • 7

    लौकी का रस और तुलसी

    लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्‍त पिसान।
    तुलसी, गुड़, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान।। 

    हृदय की समस्‍या में लौकी का रस, चोकर युक्‍त आटा, तुलसी, गुड़ और सेंधा नमक फायदा करता है।

    लौकी का रस और तुलसी
     
  • 8

    आलू का रस और हल्‍दी

    आलू का रस अरू शहद, हल्‍दी पीस लगाव।
    अल्‍प समय में ठीक हो, जलन फंफोले, घाव।। 

    घाव होने पर आलू के रस में शहद और हल्‍दी मिलाकर बने पेस्‍ट को जलने से हुए घाव पर लगाने से यह जल्‍दी ठीक हो जाते हैं।

    आलू का रस और हल्‍दी
     
  • 9

    जामुन की गुठली

    प्रात संध्‍या पीजिए, खाली पेट स्‍नेह।
    जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह।। 

    डायबिटीज की समस्‍या में जामुन की गुठली सुखाकर और पीसकर सुबह-शाम पीने से डायबिटीज में लाभ होता है।

    जामुन की गुठली
     
  • 10

    मुलेठी

    रोज मुलेठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय।
    बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय।। 

    मुलेठी गले के लिए बहुत अच्‍छी होती है। कफ की समस्‍या होने पर मुलेठी चूसने से आराम मिलता है। इससे कफ की समस्‍या दूर होने के साथ आवाज भी सुरीली होती है।

    मुलेठी
     

 

साइंटिफिक तरीके से 3 स्टेप्स में कम करें वजन, शरीर को नहीं होगा नुकसान

By Anurag Gupta , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 26, 2018

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QUICK BITES
  • हमारे शरीर का एक विज्ञान है, जिसके अनुसार ये काम करता है।
  • वजन घटाने का ये तरीका सबसे सुरक्षित है क्योंकि वैज्ञानिक है।
  • गलत तरीके से वजन घटाने से शरीर को होते हैं कई तरह के नुकसान।
 

वजन घटाने के तरह-तरह के नुस्खे आप रोज पढ़ते हैं। उनमें से कुछ नुस्खे आपने अपनाए भी होंगे और शायद असफल हुए होंगे। ऐसे में आपको लग सकता है कि वजन घटाना बहुत कठिन काम है। मगर आज जो टिप्स हम आपको बता रहे हैं उन्हें आजमा कर आप निराश नहीं होंगे क्योंकि ये सभी टिप्स साइंटिफिक हैं और दुनियाभर के न्यूट्रीशनिस्ट और वेलनेस एक्सपर्ट इन टिप्स पर अपनी मुहर लगा चुके हैं। तो आइये देखते हैं कि साइंटिफिक तरीके से आपका वजन घटाने के लिए आपको क्या करना होगा।

कैसे होगा वजन कम?

आपके मन में भी ये सवाल आ रहा होगा कि आखिर वजन कम करने के पीछे क्या साइंटिफिक बात हो सकती है। दरअसल हमारा शरीर भी विज्ञान के नियमों के अनुसार ही काम करता है। इन नियमों की हममें से ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं होती इसलिए हम अपने ही शरीर को नहीं समझ पाते हैं। 
वजन घटाने के लिए आप अब तक जो भी नुस्खे ट्राई करते थे, उसका आपके शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए वजन घटाने के दौरान आपको इन 3 बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

  • आपको कभी भी भूखे रहकर वजन नहीं घटाना है।
  • आपको धीरे-धीरे अपनी खुराक साइंटिफिक तरीके से कम करनी है।
  • इसी के साथ आपको अपना मेटाबॉलिज्म भी ठीक रखना है ताकि शरीर कमजोर न हो।

अगर आप इन 3 बातों का ध्यान रखेंगे, तो वजन घटाने के दौरान आपकी सेहत पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। आइये अब आपको बताते हैं कि आपको वजन घटाने के लिए करना क्या होगा।

शुगर और स्टार्च का कम प्रयोग

हमारा वजन सबसे ज्यादा शुगर और कार्बोहाइड्रेट की वजह से बढ़ता है। इसलिए वजन घटाने की ट्रेनिंग के दौरान आपको इन चीजों का प्रयोग बहुत कम करना होगा। स्टार्च और शुगर वाले आहारों में चावल, आलू, मिठाई, कॉफी, चाय, ऑयली फूड्स, मैदे से बनी चीजें आदि शामिल हैं।

क्या है साइंटिफिक कारण- दरअसल जब आपका शरीर थोड़ा बहुत भूखा होता है और आपके दिमाग को भूख लगने के संकेत भेजता है, तब अक्सर आप उस समय अपनी भूख और अपने शरीर की जरूरत से ज्यादा चीजें खा लेते हैं। ऐसे में कुछ मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स एनर्जी में बदल जाते हैं और आपको अपना पेट भरा लगने लगता है और शरीर में एनर्जी आ जाती है। मगर जो कार्बोहाइड्रेट्स आपने अपने शरीर की जरूरत से ज्यादा खा लिया है, वो अतिरिक्त फैट के रूप में शरीर में जमा हो जाता है और वजन बढ़ने का कारण बनता है। इसलिए अपनी डाइट में लो कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें शामिल करें।

प्रोटीन युक्त आहार और सब्जियों का सेवन करें

अक्सर जब आप वजन घटाना चाहते हैं, तो बहुत सारी चीजें खाना-पीना बंद कर देते हैं जिससे आपके शरीर को सभी जरूरी तत्व और प्रोटीन नहीं मिल पाते हैं और आपका शरीर कमजोर हो जाता है। वजन घटाने के दौरान आपको कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार लेने चाहिए मगर ऐसे आहारों का चुनाव करें जिनमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो। प्रोटीन के लिए आप दोपहर के खाने में चिकन, मछली, अंडे और दालों का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा रात के खाने में आपको लो कार्बोहाइड्रेट वाली ढेर सारी रंगीन सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

लो-कार्बोहाइड्रेट वाली सब्जियां- फूल गोभी, पत्ता गोभी, पालक, टमाटर, केल, खीरा, शिमला मिर्च, हरी मिर्च आदि।

बदलें अपना कुकिंग ऑयल- आप जिस तेल से खाना बनाते हैं उसमें भी आपको बदलाव करना होगा। गुड फैट वाले ऑयल जैसे- ऑलिव ऑयल, कोकोनट ऑयल, बटर या एवोडैको ऑयल में बने खाने से आपको पूरा पोषण मिलेगा। फैट का नाम सुनकर डरें नहीं क्योंकि ये आपके शरीर के लिए जरूरी हैं। दरअसल आप एक ही समय में लो-कार्बोहाइड्रेट फूड्स और लो-फैट ऑयल का इस्तेमाल करेंगे तो आपका शरीर कमजोर हो जाएगा और शरीर में एनर्जी नहीं रहेगी। इसलिए इस दौरान आपको फैट वाले ऑयल में खाना पकाना चाहिए।

क्या है साइंटिफिक कारण- प्रोटीन हमारे शरीर के लिए जरूरी है क्योंकि ये शरीर में होने वाली कई तरह की क्रियाओं के लिए जरूरी है। इसके अलावा लो कार्बोहाइड्रेट वाली सब्जियों का सेवन शरीर में पर्याप्त एनर्जी के लिए जरूरी है। अगर आप हाई प्रोटीन चीजें खाते हैं, तो इससे आपका पेट देर तक भरा रहता है और आपका दिमाग बार-बार खाने के बारे में नहीं सोचता है। देर रात कुछ भी खाने से बचें।

सप्ताह में 3 बार थोड़ी एक्सरसाइज करें

अगर आप वजन घटाना चाहते हैं, तो इस तरह की डाइट से भी आपको फर्क दिखने लगेगा मगर अगर आप तेजी से वजन घटाना चाहते हैं, तो आपको खाने-पीने में बदलावों के साथ-साथ थोड़ी एक्सरसाइज करना भी जरूरी है। इसके लिए आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। एक्सरसाइज के लिए एक सप्ताह में 3-4 दिन के लिए, 24 घंटे में से सिर्फ 30 मिनट निकालिए और आप देखेंगे कि आपका वजन तेजी से घटना शुरू हो गया है। इस दौरान आप थोड़ी वार्मअप एक्सरसाइज करें, वेट लिफ्टिंग करें, साइकिलिंग करें या धीमी गति में दौड़ें। आप चाहें तो जिम भी ज्वाइन कर सकते हैं।

क्या है साइंटिफिक कारण- दरअसल जब आप शारीरिक रूप से कोई मेहनत नहीं करते हैं, तो आपके शरीर का मेटाबॉलिज्म बहुत घट जाता है। दिन में थोड़ी बहुत एक्सरसाइज भी कर लेंगे, तो आपका मेटाबॉलिज्म ठीक रहेगा और शरीर में ब्लड फ्लो अच्छा रहेगा। इससे आप मेंटली भी अच्छा फील करेंगे।

इन बातों का भी जरूर रखें ध्यान

  • दिन में 3-4 बार से ज्यादा खाना न खाएं।
  • भूख से ज्यादा खाना न खाएं।
  • चाहें तो सप्ताह में एक दिन कुछ हाई कार्बोहाइड्रेट फूड्स जैसे ओट्स, राइस, आलू और फल भी शामिल कर सकते हैं।
  • कभी भी ब्रेकफास्ट करना न भूलें। ब्रेकफास्ट आपके दिन के खाने से भी ज्यादा जरूरी है।
  • ब्रेकफास्ट में हाई प्रोटीन चीजों को शामिल करें।
  • फ्रूट जूस और शुगर वाले ड्रिंक्स का सेवन बंद कर दें।
  • खाने से आधा घंटे पहले पानी पिएं।
  • अगर बहुत जरूरी लगे तो दिन में 2 से ज्यादा चाय और कॉफी न पिएं।
  • तले और पके आहारों से ज्यादा कच्चे आहारों जैसे फल, सब्जियों, ड्राई फ्रूट्स आदि को शामिल करें।
  • 2 दिन में कम से कम एक बार अपना वजन जरूर चेक करें।
  • रात में सोने से 2 घंटा पहले खाना खा लें।
  • देर रात तक न जगें और 6-7 घंटे से ज्यादा की नींद न लें।
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ग्रीन टी से भी ज्यादा फायदेमंद है ग्रीन कॉफी, रोज पिएं स्वस्थ रहें

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 07, 2018

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QUICK BITES
  • ग्रीन कॉफी के सेवन से भी आसानी से वजन कम किया जा सकता है।
  • ये प्राकृतिक और कच्चे रूप में काम में लिए जाते हैं।
  • यह मेटाबॉलिज्म रेट को बढ़ाकर आपकी ऊर्जा को बढ़ाता है।
 

सुबह उठने के बाद कई लोगों को चाय पीना अच्छा लगता है, तो कई लोगों को कॉफी। वजन घटाने और स्वस्थ रहने के लिए कई लोग ग्रीन टी पीते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि ग्रीन टी से कहीं ज्यादा ग्रीन कॉफी आपकी सेहत के लिए फायदेमंद है। असल में कच्चे, बिना सिके हुए कॉफी के बीज होते हैं। इन्हें इसी स्वरूप में पीसकर काम में लाया जाता है। चूंकि ये प्राकृतिक और कच्चे रूप में काम में लिए जाते हैं, इसलिए इसे ग्रीन कॉफी कहा जाता है। आइए जानते हैं इसके क्‍या-क्‍या फायदे हैं।

वजन घटेगा तेजी से

जैसे ग्रीन टी वजन घटाने में मददगार होती है ठीक वैसे ही ग्रीन कॉफी के सेवन से भी आसानी से वजन कम किया जा सकता है। ग्रीन कॉफी को लेकर शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि सुबह-सुबह खाली पेट यानी नाश्ते से पहले ग्रीन कॉफी का नियमित रूप से सेवन किया जाए तो आप आसानी से अपना वजन कम कर सकते हैं। ग्रीन कॉफी से आपके फैट के खत्म होने के प्रक्रिया एकदम तेज हो जाती है। ग्रीन कॉफी का सबसे बड़ा फायदा है कि आप एक महीने में ही लगभग 2 किलोग्राम वजन आसानी से कम कर सकते हैं। इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त मेहनत भी नहीं करनी होगी।

इसे भी पढ़ें:- कैंसर, डायबिटीज और लिवर रोगों से बचाती है मूंग दाल, ऐसे करें सेवन

ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल

कुछ लोगों में इसके सेवन से उच्च रक्तचाप को कम करने में सहायता मिलने के भी प्रमाण मिले हैं। सुबह-सुबह खाली पेट यानी नाश्ते से पहले ग्रीन कॉफी का नियमित रूप से सेवन किया जाए तो आप आसानी से अपना वजन कम कर सकते हैं।

कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव

कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचने में भी ग्रीन कॉफी का सेवन मददगार है। इसके प्रयोग से शरीर में ट्यूमर बनने की संभावना कम होती है जो कैंसर की वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो न केवल आपको जवान बनाए रखने में सहायक होते हैं, बल्कि तनाव और डिप्रेशन से भी आपको बचाते हैं और मानसिेक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करते हैं।

ठीक करती है मेटाबॉलिज्म

यह मेटाबॉलिज्म रेट को बढ़ाकर आपकी ऊर्जा को बढ़ाने और पाचन तंत्र को सुचारू रखने के लिए भी मददगार साबित होती हैं। इसमें भुनी कॉफी की अपेक्षा अधिक पोषक तत्व होते हैं। ग्रीन कॉफी मेटाबॉलिजम रेट को बढ़ाती है जो कि आपकी दिनचर्या को पूरा करने में ऊर्जा देता है। ग्रीन कॉफी को पीने से आपका मूड तो अच्छा हो ही जाता है लेकिन ये आपके दिमाग को भी तेज करता है। ये आपके दिमाग की गतिविधियों, प्रतिक्रिया, याददाश्त, सतर्कता को तेज करता है।

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मूड ठीक करती है ग्रीन कॉफी

ग्रीन कॉफी में कोलोरोजेनिक एसिड होता है, जो आपके मूड को भी अच्‍छा बनाने में मदद करता है। साइकोफॉर्मेसी के एक शोध में यह बात सामने आई। हाल में हुए इस शोध के मुताबिक कैफीनयुक्‍त और कैफीन रहित दोनों ही कॉफी, जिनमें कोलोरोजेनिक एसिड होता है मूड को सकारात्‍मक बनाने में मदद करती है। अधिक उम्र के लोगों के लिए यह खासतौर पर बहुत मददगार होती है।

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इसके साथ मिलाकर खाएं जीरा, यकीनन 1 हफ्ते में घट जाएगा वजन

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 06, 2018

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QUICK BITES
  • विटमिन ए-ई से भरपूर जीरे में विटमिन ई पाया जाता है।
  • विटमिन ई से त्वचा संबंधी कई संक्रमण दूर होते हैं।
  • जीरे में मौजूद पोषक तत्व एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करते हैं।
 

विटमिन ए-ई से भरपूर जीरे में विटमिन ई पाया जाता है, जो त्वचा के लिए काफी लाभदायक होता है। इसमें कुछ ऐसे तत्व भी मौजूद होते हैं, जो त्वचा को संक्रमण रहित बनाते हैं। यदि किसी के चेहरे पर दाग-धब्बे, पिंपल या किसी प्रकार का कोई इन्फेक्शन हो गया हो तो थोडा-सा जीरा पीसकर किसी भी फेस पैक में मिलाकर लगाने से आराम मिलेगा। इसमें मौजूद विटमिन ई से त्वचा संबंधी कई संक्रमण दूर होते हैं। इसका नियमित सेवन त्वचा में कसाव लाता है। त्वचा ढीली होने के बाद ही झुर्रियां बनती हैं, जो बुढापे की निशानी होती हैं। जीरे में मौजूद पोषक तत्व एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करते हैं।

घटाता है वजन

विशेषज्ञों के अनुसार जीरे में मौजूद पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सीडेंट्स चयापचय यानी मेटाबॉलिज्म को बढाते हैं, जिनसे पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है। यह चर्बी मोटापे को दावत देती है, जो जीरे के इस्तेमाल से खत्म की जा सकती है। एक अध्ययन में पता चला है कि जीरा पाउडर के सेवन से शरीर में वसा का अवशोषण कम होता है, जिससे स्वाभाविक रूप से वजन को कम करने में मदद मिलती है। अदरक और नींबू जीरे की वजन कम करने की क्षमता को बढाते हैं। इसके लिए गाजर और थोडी सब्जियों को उबाल लें और इसमें अदरक को कद्दूकस करके या बारीक पीस कर मिलाएं। इसमें एक मध्यम आकार के नींबू का रस डालें। ऊपर से जीरा पाउडर डालें और रात में इसे खाएं। इसके अलावा आप नीचे बताए गए तरीके से भी जीरे का प्रयोग कर सकते हैं।

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कैसे करें प्रयोग

3 ग्राम जीरा पाउडर को पानी में मिलाएं। इसमें कुछ बूंदें शहद की डालकर सेवन करें। वेजटेबल सूप में एक चम्मच जीरा डालें। ब्राउन राइस में भी जीरा डाल सकते हैं। यह सिर्फ स्वाद ही नहीं बढाएगा बल्कि वजन भी कम करेगा।

किसमें मिलाएं जीरा

5 ग्राम ताजी दही में एक चम्मच जीरा पाउडर मिलाकर यदि रोजाना सेवन करें तो इससे वजन कम करने में काफी मदद मिल सकती है। एक ग्लास पानी में 2 टेबलस्पून जीरा डालकर रात भर भिगो दें। सुबह इसे उबालें और गर्म चाय की तरह पिएं। बचा हुआ जीरा भी चबा लें। इसके रोजाना सेवन से शरीर के किसी भी कोने से अनावश्यक चर्बी बाहर निकल जाती है।

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क्या आप भी सच मानते हैं चावलों से जुड़े ये 5 मिथ? जान लें सच

By Atul Modi,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 07, 2018

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QUICK BITES
  • वल व्यापक रूप से दुनिया के अधिकांश भागों में प्रयोग होता है।
  • चावल से जुड़े कई मिथक हैं जो लोगों को चावल का सेवन करने से रोकते हैं।
  • जैसे ब्राउन राइस, वाइट राइस की तुलना में काफी स्वस्थ होते हैं।
 

भारत के कई राज्यों में चावल मुख्य भोज्य के रूप में प्रयोग किया जाता है। वास्तव में, चावल व्यापक रूप से दुनिया के अधिकांश भागों में प्रयोग होता है। लेकिन चावल से जुड़े कई मिथक हैं जो लोगों को चावल का सेवन करने से रोकते हैं। जैसे ब्राउन राइस, वाइट राइस की तुलना में काफी स्वस्थ होते हैं। सेलिब्रिटी न्यूट्रीशियस्ट रुजुता दिवेकर का कहना है कि चावलों को लेकर लोगों ने सिर्फ भम्र पाल रखा है। वह कहती हैं कि एक कप सफेद चावल में करीब ३५ ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। एक कप चावल में करीब 165 कैलोरी और 3-4 ग्राम प्रोटीन की मात्रा होती है। ब्राउन राइस में भी अधिक विटामिन और मिनरल्स होते हैं। आज हम आपको चावलों से जुड़े कई ऐसे मिथ बता रहे हैं जिन्हें लोग सच मान लेते हैं। आइए जानते हैं क्या है चावल से जुड़े मिथ और सच—

मिथ : चावलों में काफी ग्लूटन होता है

सच : यह एक बहुत ही लोकप्रिय मिथक है कि चावलों में ग्लूटन होता है। जबकि सच यह है कि चावल पूरी तरह ग्लूटन फ्री होते हैं। रुजुता दिवेकर तो यहां तक कहती हैं कि अन्य अनाजों से शरीर में एलर्जी होने का खतरा रहता है जबकि चावलों के साथ कभी यह दिक्कत नहीं हो सकती है।

मिथ : चावल खाने से मोटापा बढ़ता है

सच : चावलों से जुड़ा यह मिथ बहुत ज्यादा प्रचलित है। जबकि रुजुता दिवेकर का कहना है कि चावल में फैट तो कम होता ही है साथ ही यह कोलेस्ट्राल से भी मुक्त होती है। साथ ही यह शरीर में कॉम्प्लेक्स, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन बी की भी आपूर्ति करता है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि चावल ऊर्जा का एक बहुत अच्छा स्त्रोत है।

मिथ : चावलों में प्रोटीन नहीं होता

सच : यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि चावलों में प्रोटीन नहीं होता है। लोग चावलों को ऐसा भोज्य पदार्थ मानते हैं जो प्रोटीन रहित होता है। एक कप चावल में करीब 3-4 ग्राम प्रोटीन की मात्रा होती है। प्रोटीन की इतनी मात्रा किसी और अनाज में नहीं होती है।

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मिथ : रात में चावल नहीं खाना चााहिए

सच : चावलों का एक सच यह है कि चावल आसानी से पच जाता है और जिन लोगों को रात में नींद की समस्या होती है उनके लिए रात में चावल का सेवन फायदेमंद होता है क्योंकि इससे नींद अच्‍छी आती है। इससे शरीर में लेप्टिन संवेदनशीलता बढ़ जाती है. लेप्टीन एक फैटी टिश्यू द्वारा उत्पादित होता है जो शरीर में वसा भंडारण को कंट्रोल करता है. इसके अलावा, रात में हाई कार्बोज़ युक्‍त भोजन खाया जा सकता है क्योंकि वे ग्लूकोज में बदल जाता है। रात में, ग्लूकोज आसानी से ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। जब चावल को दिन में खाया जाता है, तो ग्लूकोज वसा में परिवर्तित हो जाता है।

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मिथ : चावलों में काफी नमक होता है

सच : यह भी एक मिथ है कि चावलों में नमक होता है। अन्य अनाजों की तुलना में चावल में सोडियम की मात्रा बेहद कम होती है। इसलिए ब्लड प्रेशर के पीड़ित भी इसे आसानी से खा सकते हैं।

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वजन घटाने में मदद करता है आड़ू, 1 बार के इस्तेमाल से ​ही दिखेगा फर्क

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 07, 2018

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QUICK BITES
  • आडू में 80 प्रतिशत पानी होता है जो हमें हाइड्रेट रखता है।
  • आड़ू के छिलके में भी प्रचुर मात्रा में‍ विटामिन और मिनरल होते हैं।
  • आड़ू फाइबर का बहुत अच्छा स्त्रोत है यह पेट को भी स्वस्थ रखता है।
 

आड़ू एक ऐसा फल है जो स्वादिष्ट होने के साथ साथ स्वाथ्यवर्धक भी है। इस फल में कई ऐसे एंटीआॅक्सीडेंट और पोषक तत्व होते हैं जिनके सेवन से न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहते हैं। आडू में 80 प्रतिशत पानी होता है। यह फल फाइबर का बहुत अच्छा स्त्रोत है। इसके अलावा आड़ू में मौजूद एंजाइम, प्राकृतिक विटामिन और फाइबर के उच्‍च स्‍तर के कारण यह आपके शरीर के लिए भी बेदह फायदेमंद होता है। आड़ू के छिलके में भी प्रचुर मात्रा में‍ विटामिन और मिनरल होते हैं। इसलिए डॉक्टर भी इसे छिलके समेत खाने की सलाह देते हैं। आज हम आपको आड़ू से वजन कम करने का तरीका बता रहे हैं।

वजन कम करने में कैसे मदद करता है आड़ू

आडू ही एक ऐसा फल है जिसमें सिर्फ 68 कैलोरी और फैट की मात्रा केवल 1 फीसदी होती है। आड़ू में फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। जिसके चलते ये पेट और लिवर से टॉक्‍सिन को हटाने में मदद करता है। आड़ू में मौजूद एंटी आक्सीडेंट शरीर के संक्रामक एजेंटों के खिलाफ भी काम करते हैं। एक्सपर्ट् कहते हैं कि यदि रोज 1 आड़ू का सेवन किया जाए तो वजन घटाने में काफी मदद मिल सकती है।

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कैसे वजन कम करता है आड़ू

फलों के सेवन से उम्र के असर को बेअसर किया जा सकता है। और आड़ू में जरूरी एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं जो वृद्धावस्था की प्रक्रिया का मुकाबला करने में सक्षम होते हैं। साथ ही आड़ू में विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो एंटी-ऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। यह हमारे इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता है। इसके अलावा आड़ू में पाये जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट आपको कैंसर से तो बचाते ही हैं साथ ही कुछ अध्‍ययनों के अनुसार ये कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट से बचने की क्षमता को भी बढ़ाते है।

बहुत कम होती है कैलोरी

आड़ू एक ऐसा फल है जिसमें बहुत कम मात्रा में कैलोरी होती है। आडू ही एक ऐसा फल है जिसमें सिर्फ 68 कैलोरी और फैट की मात्रा केवल 1 फीसदी होती है। 100 ग्राम आड़ू में केवल 39 कैलोरी होते हैं। आड़ू में फाइबर बहुत अधिक मात्रा में होता है। इसलिए, आप वजन कम करने के लिए आड़ू का सेवन कर सकते हैं। ये आपको बहुत जल्दी लाभ पहुंचाता है।

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अधिक होता है पानी

आड़ू में पानी की मात्रा 88 प्रतिशत होती है। यह आपको लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखता है और शरीर में कैलोरी मात्रा भी नहीं बढ़ने देता। गर्मियों में इस फल का फायदा इसलिए भी अधिक होता है क्योंकि अगर आप ​व्यस्त होने के चलते पानी नहीं पी पा रहे हैं तो आप आड़ू के सेवन से हाइड्रेट रह सकते हैं।

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कैंसर, डायबिटीज और लिवर रोगों से बचाती है मूंग दाल, ऐसे करें सेवन

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 06, 2018

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QUICK BITES
  • एक कप मूंग से आपको केवल 31 कैलोरीज मिलती हैं।
  • मूंग दाल के सेवन से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम हो जाता है।
  • शाकाहारी लोगों में प्रोटीन की कमी पूरा करने का सबसे अच्छा स्रोत है मूंग।
 

दालों को प्रोटीन का पावर हाउस कहा जाता है क्योंकि इनमें ढेर सारे प्रोटीन्स, विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में हमारी मदद करते हैं। दालों का सेवन 6 माह के शिशु के लेकर बूढ़े व्यक्ति तक सभी के लिए फायदेमंद होता है। मूंग को बीजों को हम दाल के रूप में, स्प्राउट्स के रूप में और अगल-अलग डिशेज बनाने में इस्तेमाल करते हैं। अंकुरित मूंग में इतना पोषण होता है कि इसे सबसे पौष्टिक ब्रेकफास्ट माना जाता है। आइये आपको बताते हैं कि मूंग आपके सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है और इसे शामिल करें अपने आहार में।

पौष्टिक तत्वों से भरपूर है मूंग

मूंग की दाल मैग्नीज, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉलेट, कॉपर, जिंक और कई तरह के विटामिन्स से भरपूर होती हैं। इनमें प्रोटीन, रेजिस्टेंट स्टार्च और डाइट्री फाइबर की मात्रा भी भरपूर होती है। मूंग के एक कप उबले बीज में 212 कैलोरीज, 14 ग्राम प्रोटीन, 15 ग्राम फाइबर, 1 ग्राम फैट, 4 ग्राम शुगर, 321 माइक्रोग्राम फॉलेट, 97 मिलीग्राम मैग्नीशियम, 7 मिलीग्राम जिंक, 55 मिलीग्राम कैल्शियम होते हैं। इसके अलावा विटामिन बी1 या थियामिन, विटामिन बी5 और विटामिन बी6 भी होता है।
अगर आप मूंग को बिना उबाले यानि कच्चा खाते हैं, तो एक कप मूंग से आपको केवल 31 कैलोरीज मिलती हैं जबकि प्रोटीन 3 ग्राम और फाइबर 2 ग्राम मिलता है।

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कैंसर से बचाव

मूंग दाल में एमिनो एसिड्स जैसे पॉलीफेनॉल्स, ऑलिगोसेकेराइड्स आदि भी होते हैं इसलिए इनके सेवन से कैंसर जैसे गंभीर रोगों से भी बचाव रहता है। ये सभी तत्व शरीर में एंटीऑक्सि़डेंट्स की तरह काम करते हैं, जिससे सेल म्यूटेशन की प्रक्रिया नहीं हो पाती है और डीएनए डैमेज नहीं होते हैं। इसमें मौजूद फ्लैवेनाइड्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं।

डायबिटीज से बचाव

शोधों से पता चला है कि मूंग के दाल के सेवन से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है। इसके सेवन से प्लाज्मा सी-पेप्टाइड, ब्लड ग्लूकोज और कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इसके अलावा ये शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ाने में मददगार है इसलिए मूंग दाल का सेवन डायबिटीज की आशंका को कम करता है।

लिवर रोगों से बचाती है मूंग

मूंग में मौजूद प्रोटीन न सिर्फ हड्डियों और मांसपेशियों को पोषण देते हैं बल्कि ये लिवर को भी कई तरह के रोगों से बचाते हैं। शाकाहारी लोगों में प्रोटीन की कमी को पूरा करने का सबसे अच्छा स्रोत मूंग है। इसे खाने से लिवर डैमेज होने की आशंका कम हो जाती है। मूंग दाल में मौजूद तत्व लिवर को ठीक से काम करने में सहायता करते हैं।

पचाने में आसान

अक्‍सर जब घर में कोई बीमार होता है या पेट संबंधी कोई समस्या होती है तो उसे मूंग की दाल के साथ चावल खिलाए जाते हैं। दरअसल, दाल-चावल आपकी पाचन क्रिया को आराम देता है। इसमें पाए जाने वाले प्रोटीन आसानी से टूट जाते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया पर ज़ोर नहीं पड़ता।

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ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल करे कम

अपने नियमित भोजन में स्‍प्राउट्स का एक सीमित भाग रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। इसमें सोडियम नहीं होता। सोडियम हाईबीपी की सबसे बड़ी वजह होता है। इसके अलावा, अंकुरित रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है, पाचन स्वास्थ्य में सुधार, रक्त को साफ कर आपकी त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

खून को करती है साफ

मूंग के बीज रक्त को शुद्ध करने में लाभकारी होते हैं। ये आपकी त्वचा से लेकर आपके बालों को निखारने में मदद करती हैं। अगर आप बाल झड़ने की समस्या से परेशान हैं तो आप अंकुरित मूंग की एक कटोरी रोज़ सुबह नाश्‍ते में लें। ऐसा करने से आपके बालों को सही पोषण मिलेगा और त्वचा भी चमकदार और खूबसूरत रहेगी।

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शरीर में दोगुनी ताकत बढ़ाते हैं ये 5 सुपर फूड्स, नहीं होने देते कमजोरी

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 06, 2018

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QUICK BITES
  • गुड फैट यानी ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर के लिए अच्छा है।
  • आंखों के लिए स्ट्रॉबेरी को पीनट बटर के साथ मिला कर खाएं।
  • टमी के कारण शर्मिंदगी महसूस करते हों तो घबराएं नहीं।
 

खाना सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं होता, बल्कि शरीर के पूरे सिस्टम को चलाने के लिए यह जरूरी ईंधन है। कई बार डाइनिंग टेबल पर सजी खाने की थाली को देखकर पता नहीं चलता कि इससे हमें कितना न्यूट्रिशन मिल रहा है। कुछ खाद्य सामग्रियों को कॉम्बो के तौर पर लिया जाए तो उनसे सेहत को कई फायदे हो सकते हैं। गुड फैट शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है। गुड फैट यानी ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर के लिए अच्छा है। इससे कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिलती है। इसके बिना शरीर विटमिन ‘के’ को एब्जॉर्ब नहीं कर सकता है। इस विटमिन के स्रोत- पालक, शलजम के पत्ते, ब्रॉक्ली, पत्ता गोभी, स्प्राउट्स आदि। गुड फैट्स के स्रोत- सभी तरह के नट्स, ऑलिव, कैनोला और तिल का तेल।

कॉम्बो आइडियाज़- विटमिन ‘के’ और गुड फैट को एक साथ पकाने से दिल और हड्डियां स्वस्थ बनती हैं। इन दोनों का कॉम्बिनेशन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है। गाजर में बीटा कैरोटीन और विटमिन ए होता है। बीटा कैरोटीन से स्किन ग्लो करती है। एवोकैडो से भी विटमिन ए की प्राप्ति होती है, जिससे चमकदार और खूबसूरत स्किन मिलती है। बीटा कैरोटीन के स्रोत : गाजर, शकरकंद, पपीता, पालक, खुबानी और पत्ता गोभी।

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कॉम्बो आइडियाज़ : अवन में शकरकंद को रोस्ट कर उसमें ऑलिव ऑयल डालें। एवोकैडो की डिप बनाएं और उसमें गाजर डाल कर खाएं। यह स्किन के लिए बहुत फायदेमंद है। प्याज- लहसुन सिर्फ खाने का स्वाद नहीं बढ़ाता, बल्कि इनमें मौज़ूद सल्फर कंपाउंड जि़ंक को शरीर में जज़्ब करने में मदद करता है। इससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और घाव समय पर भरते हैं। जि़ंक के स्रोत- सभी अनाजों में, जैसे ब्राउन राइस या ब्राउन ब्रेड आदि। सल्फर कंपाउंड- प्याज और लहसुन।

कॉम्बो आइडियाज़- ब्राउन राइस को प्याज के साथ कैरेमलाइज करके खाएं या फिर ब्राउन ब्रेड या रोटी पर क्रीम या चीज़ के साथ प्याज की स्लाइसेज रोल कर खाएं।आयरन मस्तिष्क, मसल्स और पूरे शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। आयरन के स्रोत- पालक, ओटमील, टोफू, काले चने और स$फेद छोले आदि। विटमिन-सी के स्रोत- सिट्रस फल, कीवी, अमरूद, स्ट्रॉबेरी, टमाटर, ब्रॉक्ली। कॉम्बो आइडियाज- पालक को संतरे के साथ मिला कर सैलेड के रूप में खा सकते हैं। यह तुरंत एनर्जी प्रदान करता है। आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो स्ट्रॉबेरी को पीनट बटर के साथ मिला कर खाएं। ये दोनों ही विटमिन ई और विटमिन सी के अच्छे स्रोत हैं। विटमिन ई के स्रोत- बादाम या बादाम का बटर, पीनट या पीनट बटर, गेहूं, सूरजमुखी के बीज, सोयाबीन आदि।

विटमिन सी के स्रोत- सिट्रस फल, कीवी, अमरूद, ब्रॉक्ली, लाल, हरी, पीली शिमला मिर्च, स्प्राउट्स, टमाटर, स्ट्रॅाबेरी, आलू। कॉम्बो आइडियाज़ -पीनट बटर और स्ट्रॉबेरी स्लाइसेज को सैंडविच या टोस्ट में दबा कर खाएं। मछली पोषक तत्वों से पूर्ण है। ब्रॉक्ली व मछली का कॉम्बो कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है। ब्रॉक्ली में पर्याप्त कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को स्ट्रॉन्ग बनाता है। कैल्शियम के स्रोत- ब्रॉक्ली, दूध, योगर्ट, चीज़, ऑरेंज जूस, सोया, दूध, चावल। विटामिन डी के स्रोत- सालमन, टूना सार्डिनेस, अंडे का पीला भाग।

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कॉम्बो आइडियाज़- सालमन ग्रिल कर ब्रॉक्ली के साथ खाएं। टमी के कारण शर्मिंदगी महसूस करते हों तो घबराएं नहीं, कैल्शियम यानी दूध और इनुलिन (कार्ब का नैचरल स्टोरेज) यानी केले का कॉम्बो आजमा कर देखें। कैल्शियम के स्रोत- दूध, योगर्ट, चीज़, ब्रॉक्ली, सालमन, सार्डिनेस, टोफू, ऑरेंज जूस, बादाम, सोया, चावल। इनुलिन के स्रोत- प्याज, लहसुन, केला, गेहूं का आटा, एस्पैरेगस आदि। कॉम्बो आइडियाज़- केले और कॉर्नफ्लेक्स को स्किम्ड दूध के साथ लेना अच्छा है।

इन्हें दोबारा गर्म न करें

  • आलू में कई पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो आपको चुस्त-दुरुस्त महसूस कराते हैं। लेकिन आलू की सब्जी को दोबारा गर्म करने पर ये पौष्टिक तत्व बेकार हो जाते हैं और इनका शरीर पर खतरनाक प्रभाव पड़ता है।
  • मशरूम को दोबारा गर्म न करें। थोड़ा पकने पर ही इसे खा लेना चाहिए। दोबारा गर्म करने से यह अनहेल्दी हो जाता है।
  • पालक में नाइट्रेट नामक तत्व पाया जाता है। इसे ताजा पका हुआ ही खाना चाहिए। दोबारा गर्म करने पर यह एसिड बन जाता है और पेट और पाचन क्रिया को नकसान पहुंचा सकता है।

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प्रोटीन के इन 4 स्त्रोत के बारे में आपने कभी नहीं सुना होगा, फायदे कर देंगे हैरान

By  ओन्लीमाईहैल्थ लेखक,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 05, 2018

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QUICK BITES
  • बीन्स और फलियां हैं प्रोटीन का बेहतर स्रोत।
  • पनीर में होता है अंडे से ज्यादा प्रोटीन।
  • मछली ओमेगा-3 फैटी एसिड का है सबसे अच्छआ स्रोत।
 

प्रोटीन हमारी सेहत के लिए एक जरूरी तत्व है। प्रोटीन हमारे शरीर में कोशिकाओं के निर्माण और उनकी मरम्मत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी जरूरत हर उम्र में और हर इंसान को होती है। गर्भावस्था में प्रोटीन ज्यादा जरूरी हो जाता है क्योंकि इस दौरान शिशु के निर्माण प्रक्रिया में भी प्रोटीन की अहम भूमिका होती है। चूंकि प्रोटीन की जरूरत हमें पूरी जिंदगी थोड़ी मात्रा में पड़ती है इसलिए प्रकृति ने प्रोटीन का स्रोत खाने-पीने की चीजों को बनाया है। आप दिनभर में जो कुछ खाते हैं, उनमें से ज्यादातर चीजों में कुछ-न-कुछ प्रोटीन होता है। लेकिन कुछ आहार ऐसे भी हैं, जिनमें अपेक्षाकृत ज्यादा प्रोटीन होता है।

एक दिन में कितने प्रोटीन की जरूरत?

यूनाइटेड स्‍टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्‍चर (यूएसडीए) प्रोटीन के आरडीए के अनुसार, आपको अपने शरीर के वजन के हिसाब से प्रतिदिन 0.8 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, यदि आपका वजन 60 किलों है तो आपको 48 ग्राम (60kg X 0.8) प्रोटीन प्रति दिन जरुरत पडे़गी। अगर आप स्‍ट्रेंथ ट्रेनिंग कर रहे हैं, तो आपको प्रतिदिन आपके वजन के हिसाब से प्रति किलोग्राम 1.5 से 2 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है।

बीन्स और फलियां

बीन्स और फलियां प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत हैं। डाइटीशियन इन्हें प्रोटीन का पावर हाउस कहते हैं। इनमें भरपूर मात्रा में फाइबर भी होता है, जो शरीर के लिए जरूरी है। बीन्स और फलियों में सभी प्रकार के सूखे और हरे बीन्स, मटर और दालें शामिल हैं।
हरी बीन्स के सेवन से शरीर को जरूरी पोषक तत्‍व आसानी से मिल जाते हैं। इसमे पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के और विटामिन बी6 पाया जाता है। यह फॉलिक एसिड का भी एक अच्छा स्त्रोत है। इसके अलावा इनमें कैल्शियम, सिलिकन, आयरन, मैगनीज, बीटा कैरोटीन, प्रोटीन, पोटैशियम और कॉपर की भी जरूरी मात्रा होती है। एक कप उबली हुई बीन्स में लगभग 7 ग्राम प्रोटीन होता है।

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मछली

मछलियों में आवश्यक अमीनो एसिड की भरपूर मात्रा में होने के कारण मछली प्रोटीन का एक अच्छा स्त्रोत है। मछली प्रोटीन लाइसीस और थ्रियोनियन में समृद्ध होती है जो अनाज में पाए जाने वाले प्रोटीन के साथ एक पूरक आहार बनाती है। छोटी मछलियां को अगर हड्डी समेत खाया जाये तो यह कैल्शियम का भी बहुत अच्छा स्त्रोत है। मछली में पाये जाने वाले लो सेचुरेटेड फैट, अधिक मात्रा में प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड के कारण मछली का सेवन सेहत के लिए स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक होता है। मछली में विटामिन, मिनरल और कई प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते हैं इसलिए मछली को खाने से शरीर को सभी आवश्‍यक पोषक तत्‍व मिलते हैं। जो शरीर के लिए आवश्यक होते हैं।

अंडा

अंडे खाने से आपके शरीर को जरूरी विटामिन व मिनरल्स मिलते हैं। अंडे में ढेर सारे पौष्टिक तत्व होते हैं इसलिए इसे खाने से शरीर को ढेर सारे विटामिन्स और प्रोटीन्स मिलते हैं। 100 ग्राम उबले हुए अंडे में विटामिन ए 10 %, विटामिन डी 21%, विटामिन बी-12 18%, विटामिन बी-6 5%, मैग्नीशियम 2%, आयरन 6 %, सोडियम 124 मिलीग्राम, पोटैशियम 126 मिलीग्राम, कोलेस्ट्रॉल 373 मिलीग्राम और प्रोटीन 13 ग्राम होता है। अंडे में मौजूद इतने सारे तत्वों के कारण इसे ब्रेकफास्ट के लिए सबसे अच्छा आहार माना जाता है। गर्भवती महिलाओं को अपने खाने में अंडे को जरूर शामिल करना चाहिए यह भ्रूण के विकसित में मदद करता है।

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पनीर और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स

पनीर, योगर्ट, चीज़ आदि कुछ डेयरी प्रोडक्ट्स में प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। चीज़ के मुकाबले पनीर और योगर्ट में कैलोरी भी कम होती है इसलिए इसे खाने से आपके डाइट प्लान पर भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। गाय के दूध से बने 100 ग्राम पनीर में 18.3 ग्राम प्रोटीन होता है जो अंडे से कहीं ज्यादा है। पनीर से भी कई तरह की स्वादिष्ट डिशेज बनाई जा सकती हैं।

अंकुरित अनाज

अंकुरित अनाज जैसे गेंहूं, चना, मूंग दाल आदि में भी प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। एक कप अंकुरित अनाज में 13 से 16 ग्राम तक प्रोटीन होता है। खास बात ये है कि इनमें कैलोरी बहुत कम होती है और आप इन्हें कच्चा या सलाद में मिलाकर भी खा सकते हैं। अंकुरित अनाज को उबालकर खाने से भी इसमें मौजूद प्रोटीन का फायदा आपको मिलता है।

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अलसी के ज्‍यादा सेवन से हो जाता है पेट खराब, जानें कितना और कैसे खाना चाहिए

By Atul Modi,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 04, 2018

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QUICK BITES
  • अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड का इससे अच्‍छा और कोई स्रोत नहीं है।
  • स्वयं को निरोग और चुस्त-दुरुस्त रखना चाहते हैं, तो रोजाना सेवन करें।
  • अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है
 

अलसी वास्‍तव में गुणों की खान है। यह बात दीगर हैं कि लोग इसके प्रति अधिक सजग नहीं होते। अलसी का नियमित सेवन हमें कई प्रकार के रोगों से छुटकारा दिला सकता है। अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है, जो हमें कई रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है। ओमेगा 3 हमारे शरीर के अंदर नहीं बनता इसे भोजन द्वारा ही ग्रहण किया जा सकता है। शाकाहारियों के लिए अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड का इससे अच्‍छा और कोई स्रोत नहीं है। मांसाहारियों को तो यह मछली से मिल जाता है। अगर आप स्वयं को निरोग और चुस्त-दुरुस्त रखना चाहते हैं, तो रोजाना इसका सेवन कर सकते हैं।

अलसी का सेवन कैसे और कितना करना चाहिए

अलसी का सेवन करना जितना फायदेमंद होता है उतना ही नुकसान भी करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अलसी का सेवन ज्‍यादा नहीं करना चाहिए, इसे रोजाना 20 से 30 ग्राम तक ही लेना चाहिए। इसके अलावा अलसी खाने के भी कई तरीके हैं। इसे आप अलग-अलग चीजों में मिलाकर खा सकते हैं।

अलसी को भूनकर खाएं

कुछ लोग सादी अलसी को खाना पसंद नहीं करते उन्हें चाहिए कि वह अलसी का सेवन भूनकर करें ऐसा करने से अलसी स्वादिष्ट हो नहीं होती, बल्कि इसका स्वाद भी कुरकुरा हो जाता है और यह अलसी खाने का तरीका बहुत आसान और उपयोगी है।

गर्म पानी के साथ खाएं अलसी

अलसी को पीसकर उसका पाउडर बना कर इस्तेमाल करना बहुत ही अच्छा तरीका होता है। इसके लिए आप गर्म पानी के एक गिलास के साथ एक चम्मच अलसी के पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हो। लेकिन आप को इस बात का ध्यान रखना होता है कि अलसी का पाउडर अधिक न हो क्योंकि यह पाउडर जल्दी ही खराब हो जाता है।

दही में इस्तेमाल

अगर आप दही खाना पसंद करते हो तब आप के लिए अलसी का रायता एक अच्छा विकल्प है। इसको रायते में इस्तेमाल करने एक कप कसी हुई लौकी, एक कप दही, आधा चम्मच मोटी पीसी अलसी, आधा चम्मच काला नमक, और थोड़ी सी चीनी डालकर एक घंटे के लिए ठंडा होने के लिए रख दे फिर इसका इस्तेमाल करें।

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रोटी के रूप में

अलसी में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है और शक्कर की मात्रा न्यूनतम होती है। इसके स्वास्थ्य लाभों को प्राप्त करने के लिए आप इसका इस्तेमाल रोटी या पराठे के रूप में भी कर सकते हो। इसके लिए आप आटे को गूंथते समय अलसी को पीसकर आटे में मिक्स कर लें।

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गर्म दूध में अलसी

एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच अलसी का पाउडर मिलाकर पीने से सेरोटोनिन का स्तर बढ़ता है, जिससे आपको नींद अच्छी आती है।

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3 दिन में करेगी लिवर की सफाई, किशमिश से बनाएं ये हेल्दी ड्रिंक

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 05, 2018

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QUICK BITES
  • लिवर शरीर के जहरीले पदार्थों को बाहर निकलता है।
  • किशमिश से बनी ये ड्रिंक 3 में करेगी लिवर की सफाई।
  • इसमें काफी मात्रा में आयरन, पोटैशियम, विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं।
 

लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो रक्त को शुद्ध करने और भोजन को पचाने में मदद करता है। इससे बने बाइल जूस से खाना पचाने में मदद मिलती है। लेकिन हमारी बुरी आदतों जैसे ज्‍यादा तले भुने खाना, एक्‍सरसाइज न करना, जरूरत से ज्यादा धूम्रपान करना और शराब पीना जैसी बुरी लत का लिवर पर बहुत असर पड़ता है। अधिक दबाव पड़ने पर लिवर सही तरीके से विषाक्त पदार्थों को बाहर नहीं निकाल पाता। शरीर से विषाक्त पदार्थ या गंदगी बाहर निकालने के लिए आप एक खास ड्रिंक की मदद ले सकते हैं।
ये ड्रिंक बनती है किशमिश से और इसे पीने से सिर्फ 3 दिन में ही आपके लिवर की सारी गंदगी साफ हो जाती है। इसे बनाना भी बेहद आसान है। आइये आपको बताते हैं किशमिश से लिवर डिटॉक्स करने की ड्रिंक बनाने की विधि।

क्यों फायदेमंद है किशमिश की ये ड्रिंक

किशमिश के पानी में भरपूर विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं जो हेल्थ के लिए बेनिफिशियल हैं। किशमिश एनर्जी से भरपूर लो फैट फूड है इसमें काफी मात्रा में आयरन, पोटैशियम, विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं। इसको पानी में भिगोने पर इसके फायदे ओर भी बढ़ जाते हैं। यदि किशमिश के पानी का हम हर सुबह खाली पेट सेवन करे तो हमे कई तरह के फायदे होते है।

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ड्रिंक बनाने के लिए सामग्री

  • 2 कप (लगभग 400 मिलीग्राम) पानी
  • 150 ग्राम किशमिश

ड्रिंक कैसे बनाएं

  • गहरे रंग की 150 ग्राम किशमिश को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें।
  • 2 कप पानी को उबालने के लिए रख दें।
  • जब पानी उबलने लगे, तो इसमें किशमिश डाल दें।
  • 20 मिनट तक उबालने के बाद आंच बंद कर दें।
  • अब किशमिश को रात भर के लिए इसी पानी में छोड़ दें।
  • सुबह तक ये ड्रिंक तैयार हो जाता है।

कैसे करें इस ड्रिंक का सेवन

सुबह खाली पेट नाश्ते से आधे घंटे पहले इस पानी को लें और किशमिश को इसमें से छानकर अलग कर लें। अब इस पानी को पी लें और किशमिश को नाश्ते में चबाकर खाएं। केवल 3 दिन के प्रयोग से ही आपके लिवर में मौजूद सभी विषाक्त पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाएंगे और आपका लिवर पूरी तरह साफ हो जाएगा।

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और भी हैं इस ड्रिंक के फायदे

  • किशमिश के पानी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स बॉडी के सेल्स को हेल्दी बनाकर कैंसर जैसी बीमारियों से बचाते हैं।
  • किशमिश के पानी में अमीनो एसिड्स होते हैं जो एनर्जी देते हैं। थकान और कमजोरी दूर करने में मददगार हैं।
  • इस पानी में विटामिन A, बीटा केरोटीन और आंखों के लिए फायदेमंद फायटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं। इससे नज़र की कमजोरी दूर होती है।
  • किशमिस का पानी मेटाबॉलिज़्म अच्छा करके फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज़ करता है। इससे वेट लॉस में मदद मिलती है।
  • किशमिश के पानी में भरपूर कैल्शियम होता है। ये हड्डियों को मजबूत बनाता है। आर्थराइटिस और गठिया से बचाता है।
  • किशमिश में मौजूद सॉल्युबल फाइबर्स पेट की सफाई करके गैस और एसिडिटी से छुटकारा दिलाते हैं।
  • किशमिश के पानी में आयरन, कॉपर और B कॉम्प्लेक्स की भरपूर मात्रा होती है। ये खून की कमी दूर करके रेड ब्लड सेल्स को हेल्दी बनाता है।

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बारिश के मौसम में इन 5 फूड्स से रहें दूर, बना सकते हैं बीमार

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 04, 2018

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QUICK BITES
  • बारिश में पत्तेदार हरी सब्जियां भी बना सकती हैं बीमार।
  • बाजार में खुले में बिकने वाले आहारों से रहें सावधान।
  • बारिश में 4 घंटे से ज्यादा पके खाने को खाना हो सकता है खतरनाक।
 

बारिश के मौसम में बीमारियों और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है इसलिए इस मौसम में हर तरह से सावधान रहने की जरूरत पड़ती है। बारिश में होने वाली ज्यादातर बीमारियों का कारण गलत आदतें और गलत खान-पान होता है। बारिश का मौसम वायरस और बैक्टीरिया के अनुकूल होता है क्योंकि वातावरण में नमी के कारण ये जल्दी और तेजी से बढ़ते हैं। इस मौसम में खान-पान में विशेष सावधानी रखनी चाहिए क्योंकि गलत खान-पान इस मौसम में आपको बीमार बना सकता है। आइये आपको बताते हैं वो 5 फूड्स, जिन्हें बरसात के मौसम में खाना आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

पत्ते वाली सब्जियां आमतौर पर बहुत हेल्दी मानी जाती हैं और डॉक्टर इन्हें खाने की सलाह देते हैं मगर बारिश के मौसम में पत्ते वाली सब्जियों को खाने से आपके बीमार होने की भी आशंका होती है। दरअसल बारिश के मौसम में खेतों में कीड़े-मकोड़े और कीट बहुत ज्यादा पैदा हो जाते हैं, जो इन पत्तियों को खाते हैं और दूषित कर देते हैं। ऐसे में इन पत्ते वाली सब्जियों को खाने से आपको कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।

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बाजार में बिकने वाले जूस, शेक और फल

बाजार में खुले में बिकने वाले जूस और फल बरसात के मौसम में आपको बीमार बना सकते हैं। बारिश का मौसम इस तरह के पदार्थों के सेवन के लिए अनुकूल नहीं है। फिर भी अगर आपको इन्हें पीना ही है तो घर पर पूरी साफ-सफाई के साथ इन्हें बनाएं और बिल्कुल ताजा पिएं। बाजार में बिकने वाले कटे फलों का सेवन भी इस मौसम में आपकी सेहत बिगाड़ सकता है। दरअसल इस मौसम में कटे हुए फल और सब्जियां या पके हुए भोजन जल्दी खराब हो जाते हैं।

सी फूड्स का सेवन

मॉनसून में सी फूड्स का सेवन भी आपकी सेहत बिगाड़ सकता है। दरअसल बारिश का मौसम मछलियों और झींगों के प्रजनन का समय होता है। इसलिए इस दौरान इन्हें खाने से कई तरह के संक्रमण का खतरा होता है। अगर आप नॉन वेजिटेरियन फूड्स के शौकीन हैं, तो इस मौसम में चिकन और मटन ही खाएं। इन्हें खाने में भी आपको सावधानी रखनी चाहिए कि ये बहुत ज्यादा समय से कटे हुए न हों और इन्हें बनाने में पर्याप्त साफ-सफाई का ध्यान रखा गया हो।

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फ्राइड फूड्स से बचें

इस मौसम में कई बार बारिश के कारण हल्की ठंड जैसा माहौल हो जाता है। ऐसे में लोगों को फ्राइड फूड्स बहुत पसंद आते हैं मगर आपको बता दें कि बारिश के मौसम में फ्राइड फूड्स के सेवन से बचना चाहिए। हाई ह्यूमिडिटी के कारण ये फूड्स आपको पेट से संबंधित बीमारियों जैसे- पेट दर्द, अपच, कब्ज, एसिडिटी और फूड प्वायजनिंग का शिकार बना सकते हैं। समोसा, कचौड़ी, पकौड़ी, फ्राइज आदि के सेवन से इस मौसम में बचना चाहिए।

बासी खाना

बारिश के मौसम में बासी खाना खाने से बचें। कई बार आप खाना फेंकना नहीं चाहते हैं इसलिए सुबह का खाना रात में या रात का खाना सुबह खा लेते हैं मगर बारिश के मौसम में ऐसा करने से आप गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। दरअसल आम में जहां तापमान कम होने के कारण और बहुत कम ह्यूमिडिटी के कारण पके हुए खाने में 6 घंटे में फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू होती हैं वहीं बारिश के मौसम में हाई ह्यूमिडिटी के कारण ये प्रक्रिया 4 घंटे में ही शुरू हो सकती है। इसलिए ज्यादा समय का बना हुआ खाना खाना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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लीची खाने से पहले देख लें ये चीज, नहीं तो हो जाएगा ‘लीची सिंड्रोम’

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 03, 2018

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QUICK BITES
  • मानसून में लीची खाना खतरे से खाली नहीं है।
  • लीची सिंड्रोम एक प्रकार का वायरल संक्रमण है।
  • ज्यादा मात्रा में लीची खाने से ‘लीची सिंड्रोम’ हो सकता है। 
 

गर्मियों का प्रमुख फल लीची का नाम आते ही सबसे मुंह में पानी आने लगता है। लीची बच्‍चों से लेकर बड़ों तक सबका पसंदीदा फल है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि स्‍वाद में मीठी और रसीली होने के साथ काफी पौष्टिक भी होती है। जीं हां लीची सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन सी, विटामिन ए और बी कॉम्प्लेक्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और आयरन जैसे मिनरल भी पाए जाते हैं। इन्‍हीं गुणों के कारण इसे सुपर फल भी कहा जाता है। लेकिन आज हम आपको ये बता रहे हैं कि मानसून में लीची खाना खतरे से खाली नहीं है। आजकल बरसात के मौसम में लीची खाना काफी खतरनाक साबित हो सकता है। 

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डॉक्टर्स का कहना है कि आजकल ज्यादा मात्रा में लीची खाने से ‘लीची सिंड्रोम’ हो सकता है। इससे न सिर्फ कई तरह के संक्रमण हो सकते हैं, बल्कि तेज बुखार और दस्‍त भी हो सकते हैं। अक्‍सर बरसात के मौसम में लीची सिंड्रोम के मामले सामने आते है। अगर आपने इस बीमारी का नाम पहली बार सुना है और आप इसके बारे में कुछ नहीं जानते हैं तो आपको परेशान होने की जरूरत है। आइए जानते हैं क्या होता है लीची सिंड्रोम और क्यों है ये खतरनाक।

क्या है लीची सिंड्रोम

लीची सिंड्रोम एक प्रकार का वायरल संक्रमण है जो कच्ची या आधी पक्‍की लीची खाने पर हो सकता है। इस संक्रमण से पीड़ित मरीज को तेज बुखार, तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टियां व पेट में दर्द जैसे लक्षण होते हैं। आपको ये बात पता होनी चाहिए कि लीची गर्मियां का फल है और इसका सीजन 2 से 3 महीने ही रहता है। बरसात के दौरान लीची में कीड़े पड़ जाते हैं जो आसानी से दिखते नहीं हैं। इसलिए बारिश के दौरान इसे खाना बंद कर दें।

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लीची खाने के फायदे

  • लीची में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होने के कारण यह मोटापा कम करने में सहायक होती है।
  • लीची में पाया जाने वाला भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट आपकी त्वचा को स्वस्थ और खूबसूरत बनाए रखने में सहायक होता हैं।
  • कई अध्‍ययनों से यह पता चला है कि विटामिन सी से भरपूर लीची में कैंसर से लड़ने के गुण पाये जाते हैं। लीची एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट भी है।
  • लीची में मौजूद पोटैशियम और कॉपर दिल की बीमारियों से बचाव करने में मदद करता हैं। यह दिल की धड़कन की अनियमितता अथवा अस्थिरता और बीपी को नियंत्रित रखता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम कम हो जाता है।
  • लीची को एनर्जी का प्रमुख स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद नियासिन हमारे शरीर में एनर्जी के लिए आवश्यक स्टेरॉयड हार्मोन और हीमोग्लोबिन का निर्माण करता है, इसलिए लीची खाने से आप ऊर्जावान महसूस करने लगते हैं। 

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स्किन के लिए विटामिन्स ही नहीं रेटिनॉयड तत्व भी है जरूरी, जानें फायदे

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 03, 2018

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QUICK BITES
  • रेटिनॉयड तत्व नई स्किन सेल्स बनाने का काम करता है।
  • आमतौर पर सभी खट्टे फलों में विटमिन सी पाया जाता है। 
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड भी स्किन के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है।
 

अपनी त्वचा को रिंकल्स, एक्ने और टैनिंग से बचाने के लिए आप जितनी भी तरह के क्रीम या लोशन का इस्तेमाल करती हैं, उन सब में विटमिन ए मौज़ूद होता है। इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो स्किन के लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं। इसमें मौज़ूद रेटिनॉयड नामक तत्व नई स्किन सेल्स बनाने और रंगत निखारने का काम करता है। हरी पत्तेदार सब्जि़यों के अलावा पीले, नारंगी और लाल रंग के फलों में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं। अगर सभी तरह की सब्जि़यों के साथ पपीता, आम, सेब, अनार, गाजर और चुकंदर जैसे फलों का सेवन किया जाए तो शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटमिन ए मिल जाता है।      

कोलेजन बनाए विटमिन सी

एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर विटमिन सी न केवल व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है बल्कि स्किन की बाहरी लेयर एपीडर्मिस और भीतरी लेयर डर्मिस के लिए भी बहुत फायदेमंद साबित होता है। इसमें भी कैंसररोधी तत्व पाए जाते हैं। विटमिन सी कोलेजन नामक तत्व का भी निर्माण करता है, जो त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मददगार होता है। इसी वजह से जयादातर एंटी एजिंग ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इसका इस्तेमाल होता है। आमतौर पर सभी खट्टे फलों में विटमिन सी पाया जाता है। स्किन को सूर्य की हानिकारक किरणों यूवीए से बचाने के लिए संतरा, स्ट्रॉबेरी, नींबू, मौसमी, अंगूर और अनन्नास जैसे खट्टे फलों का सेवन करना फायदेमंद साबित होता है। यह चोट, खरोंच या कटने पर त्वचा की हीलिंग में मददगार होता है। रोज़मर्रा की डाइट से ही शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटमिन सी मिल जाता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह लिए बिना इसका सप्लीमेंट न लें।

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विटमिन डी की डोज़

आमतौर पर लोग इसे हड्डियों की सेहत से जोड़कर देखते हैं पर इसके साथ ही विटमिन डी स्किन के लिए बहुत ज़रूरी है। यह त्वचा की कोशिकाओं के विकास और उनकी मरम्मत का काम करता है। स्किन की ड्राईनेस दूर करने के साथ झुर्रियों और एक्ने से बचाव में भी मददगार होता है।

प्रमुख स्रोत : यह सूर्य की रोशनी के अलावा मिल्क प्रोडक्ट्स, फिश और ड्राई फ्रूट्स में भी पाया जाता है। अत: स्वस्थ त्वचा और मज़बूत हड्डियों के लिए दूध, दही, पनीर, अखरोट, बादाम और फिश को अपनी डाइट में प्रमुखता से शामिल करें। 

त्वचा का रखवाला विटमिन ई

इसे त्वचा के लिए सबसे अधिक फायदेमंद माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे तैलीय तत्व पाए जाते हैं, जो स्किन को रूखेपन से बचाकर उसे स्वाभाविक चमक प्रदान करते हैं। वसा मे घुलनशील विटमिन ई में कुछ ऐसे एंटी ऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो स्किन को हर तरह के इन्फेक्शन से बचाते हैं। इसमें मौज़ूद एंटी एजिंग तत्व रिंकल्स से बचाव में मददगार होते हैं। इसीलिए हर स्किन केयर प्रोडक्ट में इसे ज़रूर शामिल किया जाता है। 

प्रमुख स्रोत : बादाम, अखरोट, मूंगफली, सनफ्लॉवर सीड्स, मकई, सोयाबीन, पालक और ब्रोक्ली में भरपूर मात्रा में विटमिन ई पाया जाता है। अगर इन चीज़ों को डाइट में शामिल किया जाए तो पर्याप्त पोषण मिल जाता है। इसके अधिक सेवन से खून पतला हो जाता है, जो सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सप्लीमेंट नहीं लेना चाहिए।

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इन्हें भी अपनाएं

ओमेगा-3 फैटी एसिड भी स्किन के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है। इसलिए अगर आप नॉन-वेजटेरियन हैं तो अपनी डाइट में फिश, बादाम, पालक और हरी मेथी को प्रमुखता से शामिल करें।

सेलेनियम भी त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है। तरबूज, सीताफल और खरबूजे के बीज में यह तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

असली खूबसूरती के लिए स्किन का हेल्दी होना बहुत ज़रूरी है। यहन्‍ तभी संभव है, जब आप स्वस्थ खानपान अपनाएंगी। हर तरह की सब्जि़यों और फलों के अलावा बीजों और अनाजों में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्किन को हेल्दी बनाने में मददगार होते हैं। 

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फेफड़ों को लंबे समय तक रखना है स्वस्थ, तो आहार में शामिल करें ये 5 चीजें

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 02, 2018

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QUICK BITES
  • हम फेफड़ों के जरिए ही सांस लेते हैं।
  • हमारे खान-पान का असर हमारे फेफड़ों पर भी पड़ता है।
  • गलत खान-पान और प्रदूषण के कारण फेफड़ों के रोग हो जाते हैं।
 

फेफड़े हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग हैं क्योंकि हम फेफड़ों के जरिए ही सांस लेते हैं। सांसें हमारे जिंदा रहने के लिए जरूरी हैं। फेफड़ों का काम वातावरण से हवा को लेना फिर ऑक्‍सीजन को अवशोषित कर कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण में छोड़ना है। ये ऑक्सीजन धमनियों और रक्त के सहारे दिल तक पहुंचता है और फिर वहां से शरीर के बाकी अंगों में पंप किया जाता है। इसलिए हमारे शरीर के लिए फेफड़े बहुत जरूरी हैं।
हमारे खान-पान का असर हमारे फेफड़ों पर भी पड़ता है। गलत खान-पान और हवा में घुले प्रदूषण के कारण फेफड़े संबंधी कई रोग जैसे- टीबी, अस्थमा, निमोनिया, इन्फ़्लुएन्ज़ा, फेफड़े का कैंसर आदि का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन अगर आप कुछ सावधानियां रखें और सही आहार लें, तो फेफड़ों के इन रोगों से आसानी से बचा जा सकता है।

विटामिन सी वाले आहार

फेफड़ों के लिए विटामिन सी बहुत फायेदमंद है। विटामिन सी एक तरह का एंटीऑक्सीडेंट हैं जो सांस लेने के बाद ऑक्सीजन को सभी अंगों तक पहुंचाने में मदद करता है। सभी खट्टे फलों में विटामिन सी की मात्रा पर्याप्त होती है जैसे- संतरा, नींबू, टमाटर, कीवी, स्ट्रॉबेरी, अंगूर, अनानास व आम आदि। इसके अलावा विटामिन सी वाले आहारों का सेवन करने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

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लाइकोपेन वाले आहार

फेफड़ों के लिए लाइकोपेन वाले आहारों का सेवन बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इन आहारों में कैरोटीनॉयड होता है। ये एक ऐसा एंटीऑक्सीडेंट है जो अस्थमा से बचाता है और फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम करता है। लाइकोपेन के लिए आप टमाटर, गाजर, तरबूज, पपीता, शकरकंद और हरी सब्जियां खा सकते हैं।

लहसुन जरूर खाएं

लहसुन को कफनाशक समझा जाता है। भोजन के बाद लहसुन का सेवन करने से छाती साफ रहती है और कई रोगों से रक्षा होती है। लहसुन में एलिसीन होता है जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा लहसुन में कई एंटीऑक्सीडेंट हेते हैं जो संक्रमण से लड़ते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। अस्थमा रोगियों को अपने आहार में लहसुन को जरूर शामिल करना चाहिए।

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मुनक्‍का

मुनक्‍का के ताजे और साफ 15 दाने रात में 150 मिलीलिटर पानी में भिगो दें। सुबह बीज निकालकर फेंक दें। गूदे को खूब अच्‍छी तरह चबा-चबाकर खायें। बचे हुए पानी को पी लें। एक महीने तक इसका सेवन करने से फेफड़े मजबूत होते हैं।

तुलसी की पत्तियां

तुलसी के सूखे पत्‍ते, कत्‍था, कपूर और इलायची समान मात्रा में ले ल‍ीजिए। इसमें नौ गुना चीनी मिलाकर बराबर मात्रा में पीस लें। इस मिश्रण की चुटकी भर मात्रा दिन में दो बार खायें। इससे फेफड़ों में जमा कफ निकल जाता है।

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5 प्रकार के होते हैं नमक, जानिए सेहत के लिए कौन सा है सबसे ज्यादा फायदेमंद

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 01, 2018

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QUICK BITES
  • टेबल सॉल्ट में सोडियम की मात्रा सबसे अधिक होती है।
  • सोडियम खाना पचाने के साथ ही हमारे पाचन तंत्र को भी अच्छा रखता है।
  • काला नमक का सेवन हर तरह के व्यक्ति के लिए फायदेमंद होता है।
 

नमक किचन का राजा होता है। यह एक एक ऐसा मसाला है जो हर चीज में इस्तेमाल होता है। कुछ लोग कम नमक खाना पसंद करते हैं तो कुछ लोग ​अधिक नमक खाना पसंद करते हैं। नमक सोडियम का सबसे अच्छा और सीधा स्त्रोत है। सोडियम खाना पचाने के साथ ही हमारे पाचन तंत्र को भी अच्छा रखता है। लेकिन जब लोग सोडियम का अधिक मात्रा में सेवन करने लगते हैं तो ये शरीर को फायदे की जगह नुकसान पहुंचाता है। हालांकि अपने शुद्ध रूप में नमक सोडियम और क्लोराइड से बना होता है। हमारा शरीर इन तत्वों को अपने आप नहीं बना सकता है, इसलिए हमें इन्हें अपने आहार से प्राप्त करना होता है। सोडियम और क्लोराइड हमारे शरीर की हर कोशिका के अंदर और बाहर मौजूद अन्य खनिजों के साथ तालमेल बनाकर शरीर को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि नमक सिर्फ 1 नहीं बल्कि पूरे 5 प्रकार का होता है। आइए जानते हैं कौन सा नमक है हमारी सेहत के लिए सबसे अच्छा।

टेबल सॉल्ट (सादा नमक)

इस नमक में सोडियम की मात्रा सबसे अधिक होती है। टेबल सॉल्ट में आयोडीन भी पर्याप्त मात्रा में होता है, जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यदि नमक का सीमित मात्रा में सेवन किया जाए तो यह कई फायदे करता है लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन हमारी हड्डियों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। जिससे हड्डियों कमजोर होने लगती हैं। 
आजकल के युवा कई तरह के हड्डी रोगों से प्रभावित है। इसका सबसे बड़ा कारण नमक का अधिक सेवन और फास्ट फूड की लत है।

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सेंधा नमक

इसे रॉक सॉल्ट, व्रत का नमक और लाहोरी नमक से भी पुकारा जाता है। यह नमक बिना रिफाइन के तैयार किया जाता है। हालांकि इसमें कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम की मात्रा सादे नमक की तुलना में काफी ज्यादा होती है। साथ ही यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा होता है। जिन लोगों को हार्ट और किडनी सें संबंधित परेशानियां होती हैं उनके लिए इस नमक का सेवन बहुत फायदेमंद साबित होता है।

काला नमक (ब्लैक सॉल्ट)

काला नमक का सेवन हर तरह के व्यक्ति के लिए फायदेमंद होता है। इसके ​सेवन से कब्ज, बदहजमी, पेट दर्द, चक्कर आना, उल्टी आना और जी घबराने जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है। गर्मियों के मौसम में डॉक्टर भी नींबू पानी या फिर छाछ के साथ काला नमक का सेवन करने की सलाह देते हैं। आपको बता दें कि काला नमक भले ही सेहत के लिए कई मायनों में फायदेमंद है लेकिन इसमें फ्लोराइड मौजूद होता है इसलिए इसके अधिक सेवन से नुकसान होने का खतरा भी रहता है।

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लो-सोडियम सॉल्ट

इस नमक को मार्किट में पौटेशियम नमक भी कहा जाता है। हालांकि सादा नमक की तरह इसमें भी सोडियम और पौटेशियम क्लोराइड होते हैं। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की समस्या होती हैं उन्हें लो सोडियम सॉल्ट का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा हदय रोगी और मधुमेह रोगियों के लिए भी यह नमक फायदेमंद होता है।

सी सॉल्ट

यह नमक वाष्पीकरण के जरिए बनाया जाता है और यह सादा नमक की तरह नमकीन नहीं होता है। सी सॉल्ट का सेवन पेट फूलना, तनाव, सूजन, आंत्र गैस और कब्ज जैसी समस्याओं के वक्त सेवन करने की सलाह दी जाती है।

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थुलथुले बाजू और जांघों से पाना है छुटकारा, तो रोज करें ये 5 एक्सरसाइज

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 01, 2018

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QUICK BITES
  • ज्यादा चर्बी जम जाने के कारण अंग थुलथुले हो जाते हैं।
  • अंगों के थुलथुलेपन से कई परेशानियां होती हैं।
  • एक्सरसाइज और योगासन द्वारा इसे आसानी से कम कर सकते हैं।
 

कई लोगों की बाजू और जांघों में ज्यादा चर्बी जम जाने के कारण ये अंग थुलथुले हो जाते हैं। थुलथुले अंग देखने में खराब लगते हैं क्योंकि इसमें मांस शरीर पर अलग से लटकता हुआ मालूम पड़ता है। चलने-फिरने या काम करने के दौरान इन अंगों के हिलने की वजह से कई बार परेशानी भी होती है। बांहें, जांघ और हिप्स ऐसे अंग है जहां चर्बी सबसे पहले और सबसे ज्यादा जमा होती है। कई लोग इस चर्बी को घटाने के लिए बाजार में मौजूद हानिकाकर तरीकों जैसे- दवाएं, जेल, क्रीम और ड्रिंक्स आदि का इस्तेमाल करते हैं मगर इनका शरीर पर दुष्प्रभाव होता है इसलिए ये सुरक्षित नहीं माने जा सकते हैं। कुछ आसान एक्सरसाइज के द्वारा आप इन अंगों की चर्बी को कम कर सकते हैं और थुलथुलें अंगों से छुटकारा पा सकते हैं।

पुश अप

पुश अपने आप में एक पूर्ण वर्कआउट होता है। न सिर्फ बाजुओं बल्कि पूरे अपर बॉडी पार्ट पर काम करने वाले पुश अप को बिना किसी उपकरण की मदद से इसे कहीं भी किया जा सकता है। यह बाहों पर से चर्बी कम करने का बेहतरीन तरीका है। इसके नियमित अभ्यास से आपके सीने व बाहों को सुडौल एवं मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलती है।

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भुजंगासन

भुजंगासन भी बाजुओं को मजबूत बनाता है और बाजुओं व इनके नीचे लटकी अतिरिक्त चर्बी को भी कम करता है। भुजंगासन के अभ्यास से पेट की चर्बी भी कम होती है और रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है। भुजंगासन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल सीधे लेट जाएं और फिर दोनों हाथों को माथे के नीचे टिका लें। इसके बाद दोनों पैरों के पंजों को एक साथ रखें और माथे को सामने की तरफ उठाएं और दोनों भुजाओं को कंधों के समानांतर ले आएं। इस स्थिति में शरीर का भार बाजुओं पर आ जाएगा। फिर शरीर के आगे वाले हिस्से को बाजुओं के बल उठाएं और लंबी सांस लेते हुए शरीर को स्ट्रेच करें।

शलाभासन

इस आसन के लिए सबसे पहले पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब अपने हाथों को पोट से सटाते हुए हथोलियों से जमीन को टच करते रहें। इस दौरान गहरी सांस लें। अपने पैरों को एक-एक करके ऊपर उठाएं और तिरछी अवस्था में रखें। थोड़ी देर के बाद अपनी सामान्य अवस्था में आ जाएं और फिर दोहराएं। इस आसन को करने से जांघों की मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है, जिससे जांघों व हिप्स की चर्बी कम होने लगती है।

सूर्य नमस्कार

नियमित सूर्य नमस्कार करने से बाजुएं मजबूत बनती हैं और उन पर मौजूद अतिरिक्त चर्बी भी कम होती है। सूर्य नमस्कार का अभ्यास बाजुओं के ल‌िए किसी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज से कम नहीं होता है। सूर्य नमस्कार से न सिर्फ बाजिएं सुडोल होती हैं बल्कि शरीर मजबूत बनाता है और प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाती है।

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वीरभद्रासन

सबसे पहले अपने दोनों पैरों पर सीधे खड़े हो जाएं। पैरों के बीच कम से कम 3 से 4 फीट की दूरी रहे। अब अपने बाएं पैर को सीधा रखें, इसे हल्का बाएं ओर ही घुमाएं। दाएं पैर को थोड़ा आगे बढ़ाएं। इसके बाद दोनों पैरों को थोड़ा मोड़ें। अपने हाथों को नमस्‍ते का आकार देते हुए ऊपर की ओर रखें। थोड़ी देर इसी मुद्रा में रहें।

खान-पान में बरतें सावधानी

शरीर के किसी भी भाग से चर्बी कम करने में आहार के बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। तो आपको खाने में हेल्दी फूड शामिल करें। ऐसा जाइच प्लान तैयार करें जो न सिर्फ आसानी से बनाया जा सके, बल्कि जिसमें सभी तरह के पौष्टिक तत्व भी मौजूद हों। ज्यादा तैलीय व जंक फूड को कम करें। इस संदर्भ में आप किसी आहार विशेषज्ञ की मदद भी ले सकते हैं।

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इस वीकेंड बनाएं अंडों से बनी ये डिश, बच्चे हो जाएंगे खुश

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 01, 2018

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फ्राइड, बेक्ड, पोच्ड या स्क्रम्बल्ड, चाहे जैसे भी बनाएं, अंडों से बने नाश्ते से दिन की स्वादिष्ट और पौष्टिक शुरुआत से अच्छा कुछ और नहीं हो सकता। न्यूट्रिशनिस्ट मेहर ने अंडे से बनी हेल्दी ब्रेकफस्ट की विधि शेयर की है, जानें इसे कैसे बनाएं।

क्या चाहिए सामग्री?

ब्रेकफस्ट में अंडे से बनी कोई भी डिश मिल जाए तो समझें कि दिन की शुरुआत अच्छी रहेगी। आप चाहें तो इसका ऑमलेट बनाकर खाएं या फिर इसे पोच विधि से पकाएं। दोनों ही तरह से यह आपको खाने में स्वादिष्ट ही लगेगा। इस बार पोच्ड एग को ऐस्पैरेगस के साथ हेल्दी ट्विस्ट देकर तैयार किया गया है, जिससे इसकी कैलरीज़ कुछ हद तक कम हो गई हैं। 1 अंडा, ज़रूरत भर पानी, एक टेबलस्पून व्हाइट विनेगर, 4 टीस्पून ऐस्पैरेगस पेस्ट, थोड़े चिकेन की पतली स्लाइस,  1 पीस फ्रेंच ब्रेड, थोड़ा सा ऑलिव ऑयल, कुछ हब्र्स।

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बनाने की विधि

  • सॉसपैन में पानी और विनेगर डालकर उबाल आने दें। अब अंडा डालें। ध्यान रखें, अंडे को सिर्फ पोच करना है, इसे उबालना नहीं है। छीलकर अलग रखें। 
  • फ्राइंग पैन में चिकेन स्लाइस को दोनों तरफ से हलका सेंक लें। ऊपर से काली मिर्च पाउडर छिड़कें और अलग रखें। अब उसी पैन में तेल डालकर ऐस्पैरैगस पेस्ट डालकर भूनें।
  • फ्रेंच ब्रेड को टोस्ट कर लें। प्लेट में ब्रेड रखने के बाद ऐस्पैरेगस पेस्ट रखें। चिकेन की स्लाइस और अंडे को दो हिस्सों में रखें। अब नमक, काली मिर्च पाउडर, हब्र्स और ऑलिव ऑयल डालकर सर्व करें।

स्पेशल टिप्स

फिटपास की न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. मेहर राजपूत के मुताबिक, इस डिश में टेस्टी और हेल्दी ट्विस्ट देना चाहती हैं तो इसमें चेरी टमैटो और नींबू का रस ऐड करें। डिश पूरी तरह से तैयार हो जाए, तब इसमें बॉलसैमिक विनेगर डालकर गर्मागर्म परोसें।

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आपको अपनी डाइट में क्यों शामिल करना चाहिए खरबूजा? जानिए 5 बड़े फायदे

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 01, 2018

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  • खरबूजे में काफी मात्रा में पानी पाया जाता है।
  • खरबूजे में ढेर सारे मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं।
  • खरबूजे के सेवन से पेट के रोगों से जल्दी छुटकारा मिलता है। 
 

खरबूजा गर्मियों का एक ऐसा सदाबहार फल है जो न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि कई स्वास्थ्य लाभों से भरपूर भी होता है। आजकल के मौसम में जिस तरह हर वक्त शरीर को हाईड्रेट करने की जरूरत पड़ती है ठीक उसी तरह दिमाग को भी हाइड्रेट रखना जरूरी हो जाता है। खरबूजे के सेवन से इन दोनों को संतुलित किया जा सकता है। खरबूजा मीठा और स्वादिष्ट होता है इसलिए हर उम्र के लोग इसे खूब पसंद करते हैं। खरबूजे में काफी मात्रा में पानी पाया जाता है इसलिए गर्मी के मौसम में इसके सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है और डिहाइड्रेशन से बचाव रहता है। इसके अलावा खरबूजे में ढेर सारे मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं। आज हम आपको बता रह हैं कि खरबूजा खाना क्यों फायदेमंद होता है।

हदय स्वास्थ्य के लिए

आजकल बुजुर्गों की तरह ही युवा और बच्चे भी हार्ट प्रॉब्लम का शिकार हो रहे हैं। जिसका सबसे बड़ा कारण खराब खानपान और बिगड़ता हुआ लाइफस्टाइल है। ऐसे में खरबूजे का सेवन हदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। खरबूजे में एडिनोसिन होता है, जो शरीर में खून को पतला करता है। इससे रक्त के जमने या गाढ़ा होने का खतरा नहीं होता है और रक्त का प्रवाह ठीक बना रहता है। खरबूजे में मौजूद पोटैशियम दिल की बीमारियों जैसे हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट, स्ट्रोक आदि से बचाता है। यदि आप अपने हदय को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो खरबूजे का सेवन शुरू कर दें।

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हड्डियों को बनाता है मजबूत

यदि आप अपनी हड्डियों को मजबूत बनाना चाहते हैं तो आज से ही खरबूजे का सेवन शुरू कर दीजिए। खरबूजे में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो शरीर को लाभ पहुचांने के साथ ही हड्डियों को भी मजबूत बनाते हैं। खरबूज हमारी त्वचा को भी स्वस्थ रखना है। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को नष्ट करता है जिससे त्वचा स्वस्थ रहती है। इससे त्वचा पर उम्र का प्रभाव धीरे होता है और स्किन लंबे समय तक ग्लो करती रहती है।

आंखों की देखभाल

जिन लोगों को आंखों में जलन, पानी निकलने या फिर धुंधला दिखने की शिकायत होती है उन्हें खरबूजे का सेवन करना चाहिए। यह आंखों की केयर करने का एक संपूर्ण पैकेज है। क्योंकि खरबूजे में विटामिन ए और विटामिन सी की मात्रा काफी होती है जो आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक होता है। ये विटामिन्स आंखों की रेटीना की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं जिससे आंखें लंबे समय तक ठीक तरह से काम कर पाती हैं। बच्चों के लिए खरबूजे का सेवन और भी जरूरी होता है।

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वेट लॉस

स्लिम फिगर की चाह रखने वालों के लिए खरबूजे का सेवन किसी वरदान से कम नहीं है। खरबूजे में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी बहुत ज्यादा होती है। इसमें मौजूद शुगर आसानी से टूट जाते हैं इसलिए ये शरीर को एनर्जी देते हैं मगर वजन नहीं बढ़ाते हैं। साथ ही शुगर में ज्यादातर वजन इसमें मौजूद पानी का होता है इसलिए इसे खाने से पेट भरा हुआ लगता है मगर भारीपन नहीं लगता है। खरबूजे में फाइबर की मात्रा अधिक होने के चलते ये तेजी से वजन घटाता है।

पेट के रोग होते हैं दूर

खरबूजे के सेवन से पेट के रोगों से जल्दी छुटकारा मिलता है। यदि किसी व्यक्ति को कब्ज की समस्या है तो उसे सुबह खाली पेट खरबूजे का सेवन करना चाहिए। दरअसल फाइबर की कमी के चलते ही कब्ज और दूसरी पेट की समस्या होती है। जबकि खरबूजा फाइबर का एक बहुत बड़ा स्त्रोत है। इसलिए इसका सेवन पेट के लिए बहुत अच्छा होता है।

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इन 5 वजहों फ्रिज में नहीं रखना चाहिए अंडा, पांचवी बात है खतरनाक

By Atul Modi,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 29, 2018

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  • फ्रिज में अंडा स्टोर करने से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं
  • फ्रिज में रखे अंडों को फेंटना अपेक्षाकृत थोड़ा मुश्किल होता है
  • जिससे रंग और स्वाद दोनों में फर्क आ जाता है
 

फ्रिज में काफी चीजों को स्टोर करके रखा जाता है क्योंकि हरी सब्जियां और डेयरी प्रोडक्ट्स जल्दी खराब हो जाते हैं। इसी के साथ फ्रिज में जूस, फल और अंडे भी रखे जाते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ्रिज में अंडा स्टोर करने से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं?

तापमान

अगर आपको अंडे का इस्तेमाल बेकिंग प्रोडक्ट बनाने के लिए करना है तो बेहतर होगा कि उसे फ्रिज में न रखें। फ्रिज में रखे अंडों को फेंटना अपेक्षाकृत थोड़ा मुश्किल होता है, जिससे रंग और स्वाद दोनों में फर्क आ जाता है।

टूटने का डर

अगर आपने ध्यान दिया हो तो खरीदकर लाने के बाद अगर तुरंत ही अंडों को उबालने के लिए रखा जाता है तो वे फूटते नहीं हैं लेकिन फ्रिज में रखे अंडे को उबालने से उसके फूटने का डर थोड़ा ज्य़ादा रहता है।

बैक्टीरिया का खतरा

अंडे को फ्रिज में रखने के बाद उसे सामान्य तापमान पर रखने से कंडेनसेशन (गैस से लिक्विड बनने की प्रक्रिया) की आशंका बढ़ जाती है। कंडेनसेशन से अंडे के छिलके पर मौजूद बैक्टीरिया की गति बढ़ सकती है और उसके भीतर प्रवेश करने के चांसेस भी बढ़ जाते हैं। ऐसे अंडे का सेवन करना खतरनाक हो सकता है।

संक्रमण

कई बार अंडे के ऊपरी भाग पर गंदगी रह जाती है तो वह फ्रिज की दूसरी चीजों को भी संक्रमित कर सकती है। ऐसे में अंडे को फ्रिज में रखने से कई तरह के संक्रमणों का खतरा हो सकता है।

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ज्य़ादा सेहतमंद

यह सच है कि फ्रिज में रखे अंडे बाहर रखे अंडों की तुलना में ज्य़ादा दिन तक ठीक रहते हैं लेकिन फ्रिज में बहुत अधिक ठंड होने की वजह से अंडे के कुछ पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। कमरे के तापमान पर रखे अंडे, फ्रिज में रखे अंडों की तुलना में कहीं अधिक सेहतमंद होते हैं।

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फायदा ही नहीं नुकसान भी पहुंचाता है क्षारीय पानी, जानें पूरा सच

By  ओन्लीमाईहैल्थ लेखक,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 01, 2018

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  • क्षारीय पानी में कई अल्ट्रा-हाइड्रेटिंग गुण होते हैं।
  • क्षारीय पानी पीना एक से अधिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।
  • क्षारीय पानी को साइंटिफिक भाषा में ‘प्योर वॉटर’ भी कहते हैं।
 

ऐल्केलाइन यानि कि क्षारीय पानी स्वास्थ्य के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है। कई शोधों में यह साफ भी हो चुका है कि क्षारीय पानी को पीने से शरीर न सिर्फ रोगमुक्त रहता है बल्कि यह हमारे मेटाबॉलिज्म को भी बढ़ाता है। एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि क्षारीय पानी पीना एक से अधिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। यह उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करने में मदद करता है, शरीर के पीएच स्तर को नियंत्रित करता है और कई पुरानी बीमारियों को रोकता है। क्षारीय पानी शरीर में एसिड के स्तर को भी नियंत्रित करता है। यह क्षमता सामान्य पानी में नहीं होती है।

क्या है क्षारीय पानी

क्षारीय पानी को साइंटिफिक भाषा में ‘प्योर वॉटर’ भी कहते हैं। यानि कि क्षारीय पानी में पीएच का स्तर अधिक रहता है। पीएच स्तर एक ऐसी संख्या है जो यह बताता है कि अम्लीय या क्षारीय का स्तर 0 से 14 के पैमाने पर होता है। उदाहरण के लिए, यदि स्तर 1 है, तो इसका मतलब है कि पानी बहुत अम्लीय है और यदि यह 13 है, तो यह बहुत क्षारीय है। ऐल्कलाइन पानी में नियमित पेय जल की तुलना में अधिक पीएच स्तर होता है। क्षारीय पानी में लगभग 8 या 9 का पीएच स्तर होता है और सामान्य पानी का पीएच स्तर 7 होता है, जो तटस्थ होता है। ऐसा माना जाता है कि क्षारीय पानी शरीर में एसिड को धीरे धीरे खत्म करता है। शरीर में एसिड को लुप्त करने की यह प्रक्रिया विभिन्न बीमारियों को रोकने में भी मदद करती है। फिल्टर, नल के अनुलग्नक और पीएच स्तर को बढ़ाने वाली चीजों का उपयोग कर पानी की क्षारीय गुणों को बढ़ाया जा सकता है।

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क्या हैं क्षारीय पानी के लाभ

सामान्य पानी की तुलना में क्षारीय पानी में अल्ट्रा-हाइड्रेटिंग गुण होते हैं। जो लोग दिनभर बिजी रहते हैं या फिर काफी वर्कआउट करते हैं उन लोगों के लिए इस तरह का पानी बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि यह लंबे समय तक शरीर को हाइड्रेट रखता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि क्षारीय पानी में पानी के अणु छोटे होते हैं और आपकी कोशिकाओं द्वारा आसानी से अवशोषित होते हैं, जो आपके शरीर को फिर से हाइड्रेट करने में मदद करते हैं।

  • क्षारीय पानी में मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे कई पोषण तत्व होते हैं। ये दोनों ही तत्व संपूर्ण स्वास्थ्य के साथ ही हड्डियों को भी मजबूत बनाते हैं।
  • क्षारीय पानी में कई ऐसे एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो शरीर से हानिकारक कणों को बाहर निकालते हैं।
  • क्षारीय पानी का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि ये पेट और गैस्ट्रो-आंतों में मौजूद गंदगी और कीटाणुओं को बाहर निकालने में मदद करता है।

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क्षारीय पानी के साइड इफेक्ट्स

क्षारीय पानी के भले ही कई फायदे हों लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि ये कई मायनों में नुकसानदायक भी है। क्षारीय पानी का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट्स यह है कि यह शरीर को जल्दी कमजोर बनाता है। इसके अलावा हमारे पेट में कई ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जिन्हें साइंटिक भाषा में ‘गुण बैक्टीरिया’ कहा जाता है, ये उनका खात्मा करता है। इसके अलावा, इससे त्वचा संबंधी समस्याएं भी पैदा होने का खतरा रहता है।

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इस मानसून बनाएं टमाटर और नारियल की ये डिश, घरवालें कहेंगे ‘वाह’!

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 30, 2018

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  • घर में टमाटर न हो तो सब्जी बनाना मुश्किल हो जाता है।
  • नारियल को बारीक काट लें और उसके साथ मिक्स करें।
  • टमाटर त्वचा को लंबे समय तक युवा बनाए रखता है।
 

घर में टमाटर न हो तो सब्जी बनाना मुश्किल हो जाता है। दरअसल टमाटर सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद होता है। इसमें लाइकोपीन पर्याप्त मात्रा में होता है जो त्वचा को लंबे समय तक युवा बनाए रखता है। साथ ही इसमें एंटीकैंसर तत्व भी पाए जाते हैं। तो इस बार घर की थाली में टमाटर से बनी कुछ विशेष रेसिपीज।

टमाटर की सब्जी

1 कप कटे हुए टमाटर, 1 कप कसा हुआ नारियल, 2-3 कली लहसुन कटा हुआ, 2 टीस्पून साबुत धनिया, 1 कटा हुआ प्याज, 4-5 कश्मीरी लाल मिर्च, 5 साबुत काली मिर्च, 1/2 टीस्पून हल्दी पाउडर

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अन्य सामग्री

1-डेढ कप टमाटर कटे हुए, 1 टीस्पून कटा हुआ प्याज, 2 सूखी लाल मिर्च, 1 टीस्पून जीरा, 1 टीस्पून राई, 6-7 करी पत्ते, चुटकी भर हींग, 2 टीस्पून तेल, 1 टीस्पून हरी धनिया कटी हुई, स्वादानुसार नमक

विधि

सबसे पहले सभी सामग्रियों को धो लें और मिक्सी में डालें। उसके बाद सूखी लाल मिर्च को तोड कर उसमें डालें।

नारियल को बारीक काट लें और उसके साथ मिक्स करें। अब जार में थोडा-सा पानी मिला कर मसाले को पीस लें।

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अब कडाही में तेल गर्म करें। राई व जीरा डालकर चटकाएं। फिर कटा हुआ प्याज, करी पत्ता, सूखी लाल मिर्च और हींग डालकर कुछ देर चलाएं। टमाटर डालकर 3-4 मिनट तक पकाएं। अब पिसा हुआ मसाला डाल कर 2 मिनट पकाएं। उसके बाद 3 कप पानी और नमक डालें। इसे अच्छी तरह उबालें। आंच धीमा करके पकाएं। जब तेल छूटने लगे तब इसे आंच धीमी करके 15 मिनट तक पकाएं। हरी धनिया से सजाकर गरमागरम सर्व करें।

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समय पर भोजन न करने वालों को हो सकती हैं ये 5 बीमारियां, पांचवीं है जानलेवा

By Atul Modi,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 28, 2018

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  • हमेशा निर्धारित समय पर भी भोजन या नाश्‍ता करें।
  • गलत समय पर खाना खाने से कई तरह की समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • शरीर को सकारात्मक नहीं बल्कि नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
 

हमारा शरीर समय का पाबंद होता है। हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली से चलने का मतलब है कि हमारा शरीर उस निश्चित समय और वस्तु का बाध्य है। यदि जैसा रोजाना होता है, वैसा न हो तो शरीर को गड़बड़ी का एहसास होता है। बाडी क्लाक का बिगड़ना इसका ही रिज़ल्ट है। दरअसल हम सही समय पर पाबंद न हों तो इससे शरीर समझ नहीं पाता कि उसके साथ किस समय क्या होना है और उसे किस समय क्या करना है। ऐसे में वह हमेशा गड़बड़ रहता है। परिणामस्वरू बीमारियां हमें आ दबोचती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप हमेशा निर्धारित समय पर भी भोजन या नाश्‍ता करें। गलत समय पर खाना खाने या खाना न खाने से कई तरह की समस्‍याएं हो सकती हैं।

बढ़ता है मोटापा

अगर आप नाश्ता छोड़ते हैं और इसके बजाय किसी अन्य समय खाने को तरजीह देते हैं तो यह मोटापा बढ़ना है। दरअसल समूचे विश्व में इस बात को नोटिस किया गया है कि जो लोग नाश्ता करते हैं, वे कम मोटे होते हैं। उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इतना ही नहीं उन्हें कोई गंभीर बीमारी भी नहीं होती। दरअसल नाश्ता इसलिए सही समय पर करना जरूरी है क्योंकि इसके बात हमारा शरीर सक्रिय रहता है। हम घर से दफ्तर या कालेज पहुंचने के लिए सजग रहते हैं। मतलब यह कि हम मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से सक्रिय रहते हैं। ऐसे में सही समय पर नाश्ता कर निकलें तो यह स्वास्थ्य को ऊर्जावान बनाए रखता और अगले भोजन तक शरीर में किसी चीज की कमी नहीं होने देता।

त्‍वचा संबंधी बीमारियां

जब हम समय अनुसार खाना नहीं खाते तो कुछ भी खाने को तरजीह दे देते हैं। आपको बताते चलें कि जब हम कुछ भी खाते हैं, तो उससे न सिर्फ कैलोरी बढ़ती है बल्कि ऐसे में हम अस्वस्थ आहार चुनते हैं। यह हमारे शरीर को सकारात्मक नहीं बल्कि नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। असल में कुछ भी खाने का मतलब है हम ऐसे आहार का चयन करते हैं जो तुरत फुरत खाया जा सके या फिर पैक्ड हो जिसे चलते हुए भी खाया जा सके। कुछ लोग ऐसे में चिप्स जैसी चीजों को चुनते हैं। ये हमारे शरीर में न तो ऊर्जा भरते हैं और न किसी तरह लाभ पहुंचाते हैं। इसके उलट हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। इसे कई त्वचा सम्बंधी बीमारी हमें आ दबोचती है।

आलस

सही समय पर न खाने से हम थकन भी महसूस करते हैं। यही नहीं हर समय पेट खाली होने का एहसास बना रहता है। नतीजनत आलस और थकन हमें बुरी तरह जकड़ लेते हैं। असल में यह किसी बीमारी से कम नहीं है। सही समय पर खाना और सही चीज खाना हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। लेकिन इन्हीं चीजों की अदेखी करने का मतलब है कि हम हर समय अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आलस, थकन, बोझिल जिंदगी से निदान चाहिए तो बेहतर है समय के पाबंद बनें और कुछ भी खाने से बचें। स्वस्थवर्धक आहार ही लें।

पेट खराब रहना

असमय खाने से पेट खराब रहने की समस्या भी निरंतर बनी रहती है। असल में जब हम सही समय पर खाते नहीं है, सही समय पर सोते नहीं है तो इससे पेट खराब होना लाजिमी है। ऐसे में यह जरूरी है कि खाने, सही खाने और समय पर सोने का नियम बांधें। सही समय पर हर चीज करने से पेट सही रहता है। आपको बता दें कि पेट साफ तो आप स्वस्थ। यदि पेट से जुड़ी छुटपुट समस्या भी बनी रहती है तो यह बुरे संकेत हैं। कोई गंभीर बीमारी भी आपके दरवाजे दस्तक दे सकती है।

कोलेस्ट्रोल बढ़ना

सही समय पर न खाना या फिर गलत आहार लेने से शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ जाता है। आपको बता दें कि इसका हमारे हृदय पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अध्ययनों की मानें तो जो लोग नियमित 6 बार अलग अलग समय आहार लेते हैं, वे बेहतर जीवन व्यतीत करते हैं। जबकि जो लोग खाने के सम्बंध में समय के पाबंद नहीं होते या फिर कुछ भी कभी खाने को महत्व देते हैं, वे कोलेस्ट्रोले, हृदय सम्बंधी बीमारी से दो चार रहते हैं। ऐसे में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।

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पथरी का रामबाण इलाज है तोरई की सब्जी, जानें क्या हैं फायदे

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 29, 2018

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  • तोरई की सब्जी खाने से शरीर में रक्त का निर्माण होता है।
  • तोरई के सेवन से पथरी धीरे-धीरे गलती है और समाप्त हो जाती है।
  • इसमें विटामिन सी, राइबोफ्लेविन, जिंक, आयरन और मैग्नीशियम होता है।
 

तोरई की सब्जी बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है। गर्मियों के आस-पास आने वाली तोरई में ढेर सारे ऐसे गुण होते हैं, जो इसे आपकी सेहत के लिए परफेक्ट सब्जी बनाते हैं। तोरई की सब्जी खाने से शरीर में रक्त का निर्माण होता है और रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है। इसके अलावा इसे खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। डॉक्टर्स भी अक्सर हरी सब्जियां खाने की सलाह देते हैं। तोरई की खास बात ये है कि इसमें काफी मात्रा में पानी होता है जिसके कारण ये पाचन में आसान होती है और पेट को कई बीमारियों से बचाती है।
तोरई में इन सभी गुणों के अलावा एक और गुण है जिससे आप अब तक अंजान होंगे। तोरई को आयुर्वेद में पथरी का रामबाण इलाज माना जाता है। आइये आपको बताते हैं कि पथरी को कैसे ठीक करती है तोरई और इसके अन्य क्या फायदे हैं।

पथरी के लिए ऐसे करें प्रयोग

अगर आपकी पथरी छोटी है या पथरी की शुरुआत है, तो तोरई के सेवन से पथरी धीरे-धीरे गलती है और समाप्त हो जाती है। तोरई में काफी मात्रा में फाइबर होता है। इसके अलावा इसमें विटामिन सी, राइबोफ्लेविन, जिंक, थियामिन, आयरन और मैग्नीशियम होता है इसलिए इसे खाने से किडनी की पथरी के साथ-साथ अन्य रोग समाप्त हो जाते हैं।
किडनी की पथरी के लिए तोरई को मिक्सर में पीसकर इसका रस निकाल लें और गाय के दूध में मिलाकर इस रस को पिएं। रोज 2 बार पीने से आपकी पथरी तेजी से गलना शुरू होती है और कुछ दिन में समाप्त हो जाती है।

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लिवर रोगों में भी फायदेमंद है तोरई

लगातार तोरई का सेवन करना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। तोरई रक्त शुद्धिकरण के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है साथ ही यह लिवर के लिए भी गुणकारी होता है। पीलिया होने पर अगर रोगी की नाक में 2 बूंद तोरई के फल का रस डाल दें, तो नाक से पीले रंग का द्रव बाहर निकलता है। जिससे पीलिया रोग जल्दी समाप्त हो जाता है।

वजन भी नहीं बढ़ाती तोरई

एक तोरई में लगभग 95 प्रतिशत पानी और केवल 25 प्रतिशत कैलोरी होती है। जिससे वजन नहीं बढ़ता। इसमें संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल की भी बहुत ही सीमित मात्रा होती है जो वजन कम करने में सहायक होती है।

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आंखों के लिए तोरई है फायदेमंद

तोरई में बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो नेत्र दृष्टि बढ़ाने में मदद करता है। अगर आप अपनी आंखों की रोशनी बढ़ाना चाहते हैं तो अपने आहार में तुरई को शामिल करें।

डायबिटीज का खात्मा करे तोरई

तोरई ब्‍लड और यूरीन दोनों में शुगर के स्‍तर को कम करने में मदद करती है। इसलिए यह डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होती है। तोरई में इन्सुलिन की तरह पेप्टाईड्स पाए जाते हैं। इसलिए इसे डायबिटीज नियंत्रण के लिए एक अच्छे उपाय के तौर पर देखा जाता है। इसलिए सब्जी के तौर पर इसके इस्तेमाल से डायबिटीज में फायदा होता है।

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वजन घटाना हो या बढ़ाना, ब्रेकफास्ट में खाएं पौष्टिक मखाना

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 28, 2018

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QUICK BITES
  • वजन घटाने और बढ़ाने दोनों में कारगर है मखाना।
  • मखाने में फाइबर ज्यादा होता है और कैलोरी बहुत कम होती है।
  • मखाना प्रोटीन और कई पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है।
 

मखाना स्वादिष्ट होता है और कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होता है। मखाने से बनी खीर, सब्जी और नमकीन आदि को लोग बड़े चाव से खाते हैं। इसके अलावा हमारे यहां व्रत-त्योहारों में भी मखाने से कई फलाहारी डिशेज बनाई जाती हैं। अगर आप अपने पतले-दुबले शरीर से परेशान हैं, तो मखाना आपका वजन बढ़ाने और मसल्स को मजबूत बनाने में आपकी मदद कर सकता है। इसके अलावा मखाने के सेवन से कई तरह की बीमारियां भी दूर रहती हैं। आइये आपको बताते हैं कि किस तरह मखाना है एक सूपरफूड और क्या हैं इसे खाने के फायदे।

होते हैं ढेर सारे पोषक तत्व

मखाना प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। इसमें कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फास्फोरस, आयरन और जिंक की मात्रा भरपूर होती है। इसके अलावा मखाने में कई महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। मखाने में कई तत्व ड्राई फ्रूट्स से भी ज्यादा होते हैं। अपने इन्हीं गुणों के कारण मखाना को सुपर फूड माना जाता है। मखाना सीड्स को आप कच्चा भी खा सकते हैं और भूनकर या पीसकर भी। कई लोग मखाने के बुरादे को आटे में मिलाते हैं ताकि उसे ग्लूटेन फ्री और प्रोटीन से भरपूर बनाया जा सके।

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वजन बढ़ाए घटाए मखाना

मखाने में फाइबर ज्यादा होता है और कैलोरी बहुत कम होती है इसलिए मखाने का प्रयोग आप वजन बढ़ाने के लिए भी कर सकते हैं और वजन घटाने के लिए भी कर सकते हैं।

वजन घटाने के लिए मखाना- अगर आप वजन घटाना चाहते हैं, तो रोस्टेड मखाने को अपने ब्रेकफास्ट में शामिल करें। ये आपकी भूख शांत करता है और काफी हेल्दी होता है। मखाने को भूनने के लिए गाय का घी या लो-फैट बटर का इस्तेमाल करें और इसमें चाट मसाला छिड़ककर खाएं।

वजन बढ़ाने के लिए मखाना- अगर आप अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं, तो भी आप मखाने का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए आपको सुबह और शाम मखाने का इस तरह सेवन करना चाहिए।

  • सबसे पहले एक कप मखाने के दानों को तीन-चार छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • 4-5 बादाम को छोटे टुकड़ों में काट लें और 8-10 किशमिश के दाने लेकर अच्छी तरह धो लें।
  • अब आधा लीटर दूध में एक चम्मच चीनी मिलाएं और उबलने के लिए रख दें।
  • थोड़ी देर बाद इस दूध में सभी सामग्रियों को डाल दें और उबलने दें।
  • जब दूध पकते-पकते लगभग आधा बचे तो इसे ठंडा कर के खा लें।

लंबे समय तक दिखेंगे जवान

मखाना उम्र के असर को भी बेअसर होता है। यह नट्स एंटी-ऑक्‍सीडेंट से भरपूर होने के कारण उम्र लॉक सिस्‍टम के रूप में काम करता है और आपको बहुत लंबे समय तक जवां बनाता है। मखाना प्रीमेच्‍योर एजिंग, प्रीमेच्‍योर वाइट हेयर, झुर्रियों और एजिंग के अन्‍य लक्षणों के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

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बाहर निकाले शरीर की गंदगी

मखाने का सेवन किडनी और दिल की सेहत के लिए फायदेमंद है। फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्‍सीफाइ करने, किडनी को मजबूत बनाने और ब्‍लड का पोषण करने में मदद करता है। साथ ही मखानों का नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हमारा शरीर सेहतमंद रहता है।

हड्डियों की कमजोरी और दर्द

मखाना कैल्शियम से भरपूर होता है इसलिए जोड़ों के दर्द, विशेषकर अर्थराइटिस के मरीजों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है। साथ ही इसके सेवन से शरीर के किसी भी अंग में हो रहे दर्द जैसे से कमर दर्द और घुटने में हो रहे दर्द से आसानी से राहत मिलती है।

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पेट के निचले हिस्से की चर्बी को जल्दी करना है दूर, तो अपनाएं ये उपाय

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 28, 2018

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QUICK BITES
  • ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर के लिए काफी लाभकारी होता है।
  • पेट की चर्बी कम करने के लिए उपयुक्त आहार योजना बनाएं।
  • अपने आहार में फाइबर व रेशेयुक्त आहार शामिल करें।
 

चाहे व्यक्ति का वजन कम हो या फिर ज्यादा हो, लेकिन पेट के निचले हिस्से की चर्बी से हर कोई परेशान रहता है। बिगड़ते लाइफस्टाइल और खराब खानपान के चलते पेट की चर्बी होती है। जिसे छिपाने के लिये आप क्या कुछ नहीं करते हैं ढीले-ढाले कपड़े पहनते हैं,हमेशा तनाव में रहते हैं। लेकिन आखिर आप किन-किन उपायों से अपनी पेट की चर्बी को छुपाते फिरेगे। अब समय आ गया है कि इस चीज़ से ना भागा जाए और इसका डट कर मुकाबला किया जाए।

शक्कर को कहें नहीं…

शक्कर को सफेद जहर कहा जाता है। यह ऐसी चीज है जिसके अधिक सेवन से कई बीमारियों को निमंत्रण मिलता है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, पेट के रोग होने के साथ ही शक्कर का सेवन पेट की चर्बी भी बढ़ाता है। अगर आप जल्दी से जल्दी पेट की चर्बी से छुटकारा पाना चाहते हैं तो शक्कर का सेवन करना एकदम बंद कर दें। अगर आपके परिवार में भी कोई मीठी चाय या मीठे पकवानों का शौकीन है तो उसे भी शक्कर का सेवन न करने की ही सलाह दें।

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 ये उपाय भी हैं दमदार

  • ओमेगा 3 फैटी एसिड शरीर के लिए काफी लाभकारी होता है। मांसाहारी लोग इसे मछली के जरिए ले सकते हैं। मछलियों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा जो लोग शाकाहारी हैं वे अखरोट, पत्ता गोभी व फूल गोभी आदि का सेवन कर सकते हैं। 
  • अगर आप सोचते हैं कि हजार पुशअप्स या क्रंचेज मार लेंगे या कोई भी हेवी एक्सरसाइज करेंगे तो आपकी चर्बी कम हो जाए तो आप बिल्कुल गलत हैं। एक्सरसाइज ऐसी करें जिससे शरीर के सभी हिस्सो की मांसपेशियों में गतिविधि हो। बेली फैट कम करने के लिए कोई भी कार्डियोवास्कुलर एक्सरसाइज फायदेमंद होगी। आप चाहें तो योग का भी सहारा ले सकते हैं। 
  • अगर आप बहुत अधिक तनाव में रहते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। विटामिन सी युक्त आहार के सेवन से शरीर में कोर्टिसोल नियंत्रित हो सकता है। इसमें कार्निटाइन नामक तत्व भी पाया जाता है जो शरीर के फैट्स को बर्न करने में सहायक है। संतरे, शिमला-मिर्च, टमाटर, नींबू व अन्य साइट्रस फलों में विटामिन सी भरपूर मात्रा में मिलता है। 
 
  • पेट की चर्बी कम करने के लिए उपयुक्त आहार योजना बनाएं। इसके लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लें। अपने आहार में फाइबर व रेशेयुक्त आहार शामिल करें। तेल व मसाले युक्त भोजन की जगह स्टीम किया हुआ भोजन करें। खाने के सलाद जरूर लें। ध्यान रहे चर्बी कम करने के लिए भोजन नहीं छोड़ें। इससे आप अगले समय में ज्यादा खाना खा लेते हैं जो चर्बी बढ़ाने की मुख्य वजह है।
  •  चर्बी ना एक दिन में बनती है ना एक दिन में जाती है। इसके लिए अपनी जीवनशैली में सुधार करना जरूरी है। संतुलित आहार के साथ नियमित व्यायाम करने से ही आप पेट की चर्बी से निजात पाई जा सकती है। अगर आप पेट की चर्बी कम करने के लिए गंभीर हैं, तो जंक फूड व तेल मसाले  वाली चीजों से दूरी में ही भलाई है। 

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तेजी से पेट कम करने के ये हैं जबरदस्‍त उपाए

By Anubha Tripathi,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 28, 2018

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QUICK BITES
  • सेहत के साथ लुक को भी बिगाड़ती है पेट पर जमा चर्बी।   
  • खाने के अन्‍त में पानी पीना पेट निकलने की मुख्‍य वजहों में से एक।   
  • 25 फीसदी कैलोरीज बर्न होती है नियमित रूप से सैर पर जाने से।
  • तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन्स रिलीज होता हैं नींद पूरी न होने पर।
 

लोगों को सेहतमंद व फिट रखने में उनके आहर की अहम भूमिका होती है। व्यस्त दिनचर्या के कारण लोगों की शारीरिक गतिविधि दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है जिसकी वजह से ली गई कैलोरी फैट में तब्दील होकर आपके पेट के आस-पास के हिस्सों में नजर आने लगती है। अक्सर लोग वजन कम करने में लगे रहते हैं। लेकिन सबसे अधिक जो समस्या आती है वो है पेट के आसपास की चर्बी को हटाना। क्या आप जानते हैं कुछ लोग मोटे नहीं होते लेकिन उनके पेट के आसपास काफी चर्बी जमा हो जाती है। पेट पर जमा फैट ना सिर्फ आपकी सेहत बिगाड़ता है बल्कि यह आपके लुक को भी खराब करता है। जानिए हमारे साथ पेट पर जमा चर्बी को कम करने के आसान व असरकारी उपायों के बारे में और फर्क देखिए-

खाने के बाद पानी पीने से बचें

अक्सर देखा गया है कि खाना खाने के बाद लोग ढेर सारा पानी पी लेते हैं जो कि पेट निकलने की मुख्य वजहों में से एक है। खाने के अन्त में पानी पीना उचित नहीं, बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए। अगर आपको ज्यादा प्यास लग रही है तो खाने के बाद बस एक कप हल्का गुनगुना पीएं।

थोड़ा-थोड़ा करके खाएं

तीन टाइम खाने की जगह थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खाएं। हर दो घंटे में कुछ ना कुछ खाते रहें। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म तो ठीक रहता ही है साथ ही ऊर्जा का स्तर भी बना रहता है। खाने में प्रोटीन की मात्रा बढाएं। ये पचने में ज्यादा समय लेते हैं और पेट देर तक भरा रहता है। अंडे का सफेद भाग, फैट फ्री दूध व दही, ग्रिल्ड फिश और सब्जियां आपको स्लम व फिट बनाएंगी।

शहद है फायदेमंद

जैसा कि हम सब जानते हैं शहद गुणों की खान है। यह मोटापा कम करने में भी कारगार है। रोजाना सुबह गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीएं। नियमित रुप से इस प्रक्रिया को अपनाने से आपको जल्द ही असर दिखाई देने लगेगा।

ग्रीन टी पियें

अगर आप चाय पीने के बहुत शौकीन हैं, तो आप दूध की चाय पीने के बजाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी, या फिर ब्लैक टी पियें। इसमें थायनाइन नामक अमीनो एसिड होता है जो मस्तिष्क में ऐसे केमिकल्स का स्त्राव करता है और आपकी भूख पर कंट्रोल करता है। 

मॉर्निग वॉक करें फिट रहें

रोजाना सुबह सैर पर जाएं और रात के खाने के बाद भी सैर करना ना भूलें। इससे पेट और कमर की अतिरिक्त कैलोरी कम करने में मदद मिलेगी। क्‍योंकि नियमित रूप से सैर पर जाने से 25 फीसदी कैलोरीज बर्न होती है। पेट जल्दी कम करना है तो तीस मिनट के वॉक सेशन रखें। लगातार स्पीड से ना चल सके तो बीच में इंटरवल लें। थोड़ी देर तेजी से चलें और फिर स्पीड कम कर लें।

उपवास करें

यदि आप खाने-पीने के बहुत शौकीन हैं और अपनी इस आदत से भी परेशान हैं, तो इसका सबसे आसान तरिका ये है कि आप सप्ताह में कम से कम एक बार उपवास जरूर करें। आप चाहे तो सप्ताह में एक दिन तरल पदार्थों पर भी रह सकते हैं, जैसे- पानी, नींबू पानी, दूध, जूस, सूप इत्यादि या किसी दिन सिर्फ सलाद या फल भी ले सकते हैं।

खान-पान का रखें खयाल

यदि आप जंकफूड खूब खाते हैं या फिर आपको तैलीय खाना बहुत पसंद है तो अब इनसे परहेज करना शुरू कर दें। खाने में खासतौर पर सामान्य आटे के बजाय जौ और चने के आटे को मिलाकर चपाती खांए, इससे आप जल्द ही स्लिम ट्रि‍म होंगे। रोजाना कुछ ग्राम बादाम खाने से कमर की साइज 24 सप्ताह में साढ़े छह इंच कम हो सकती है। तो आज से ही तय करें कि रोजाना सौ ग्राम नट्स अपनी डाइट में जरूर से शामिल करेंगे। यह कैलोरी से भरपूर होने के साथ ही फाइबर युक्त भी होते हैं। भोजन में संतुलित कैलोरीज लें। आपको दिनभर में कम से कम 2000 कैलोरी जरूर ले।

नींद पूरी करें

संतुलित आहार व व्यायम के साथ पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। नींद पूरी ना होने पर तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन्स रिलीज होते हैं जो आपको खाने के लिए प्रेरित करते है जिससे पेट की चर्बी भी बढ़ती है। रात में 6 से 7 घंटे सोने वाले लोगों में पेट का फैट कम होता है। इससे ज्यादा या कम नींद लेने वाले लोगों को तोंद की समस्या ज्‍यादा होती है।

योगासन है जरूरी

कमर और पेट कम करने के लिए आप नियमित रूप से सुबह उठकर योग करें। वैसे भी आप योग से निरोग रह सकते है। लेकिन खासकर आप ऐसे आसनों को करें जिनसे आपके पेट और कमर को कम करने में मदद मिलें। रोजाना सूर्य नमस्कार की सभी क्रियाएं, सर्वांगासन, भुजंगासन, वज्रासन, पदमासन, शलभासन इत्यादि को करें।

बॉल एक्‍सरसाइज करें

जमीन पर पीठ के बल सीधा लेट जाएं। अब हाथों पर एक्‍सरसाइज वाली बडी़ बॉल को हाथों में ले कर अपने दोनों पैरों को ऊपर उठाएं। अब अपने हाथों की बॉल को अपने पैरों में पकड़ाएं और फिर पैरों को नीचे ले जा कर दुबारा बॉल ले कर ऊपर आएं। फिर पैरों से जो बॉल उठाई गई है उसे दुबारा हाथों में पकड़ाएं। इस क्रिया को लगातार 12 बार करें।ऐसा करने से पेट पर जमा फैट कुछ ही दिनों में कम होने लगेगा।

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बाजार वाले अचार के ज्यादा सेवन से ब्लड प्रेशर और कैंसर का होता है खतरा!

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 27, 2018

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QUICK BITES
  • भारतीय खानों की थाली अचार के बिना अधूरी है।
  • बाजार के अचार में नमक का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है।
  • बाजार वाले सस्ते अचारों में घटिया प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल होता है।
 

भारतीय खानों की थाली अचार के बिना अधूरी है। हमारे यहां हर मौसम में अलग-अलग फल और सब्जियों से चटपटे और स्वादिष्ट अचार बनाए जाते हैं। आजकल बाजार में भी सैकड़ों तरह के अचार मिलते हैं। नींबू, गाजर, मिर्च, लहसुन, आम, आंवला, अदरक आदि के अचार जो बाजार में मिलते हैं, उन्हें कई लोग चटखारे ले कर खाते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि अचार का ज्यादा सेवन आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। आइये आपको बताते हैं कि ज्यादा अचार के सेवन से कौन-कौन सी परेशानियां हो सकती हैं।

ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा

बाजार में मिलने वाले अचार में नमक की मात्रा काफी ज्यादा होती है। नमक चूंकि एक तरह का प्रिजर्वेटिव भी है, जो चीजों को खराब होने से बचाता है इसलिए बाजार के अचार में नमक का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है। नमक का ज्यादा सेवन सेहत के लिए खतरनाक है क्योंकि इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। अगर आप बहुत ज्यादा अचार खाते हैं तो आपके शरीर में नमक की मात्रा बढ़ जाती है और हाइपरटेंशन का खतरा होता है। ब्लड प्रेशर दिल की बीमारियों का कारण बनता है इसलिए इससे दिल की बीमारियों का खतरा भी रहता है।

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दिमाग की बीमारियां

ज्यादा मात्रा में नमक के सेवन से शरीर में पानी इकट्ठा हो जाता है और रक्तवाहिकाओं में सूजन भी आ जाती है क्योंकि नमक में सोडियम बहुत ज्यादा होता है। सोडियम का ज्यादा सेवन आपके दिमाग के लिए खतरनाक है और क्योंकि इससे दिमाग की नसों में सूजन हो सकती है और आप गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं या आपकी याददाश्त जा सकती है। हालांकि इसकी संभावना बहुत कम होती है मगर लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल करने से ऐसा हो सकता है।

पाचन हो सकता है खराब

बाजार के अचार में प्रिजर्वेटिव्स के रूप में कुछ एसिडिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ये लंबे समय तक खराब नहीं होते और इसका स्वाद भी खट्टा-चटपटा होता है। अचार अगर थोड़ी मात्रा में खाया जाए ये आपके पाचन के लिए अच्छा है क्योंकि इसमें कई तरह के आयुर्वेदिक मसालों का प्रयोग किया जाता है मगर ज्यादा मात्रा में अचार का सेवन आपके पाचन को बिगाड़ भी सकता है। दरअसल अचार के ज्यादा सेवन से शरीर में ट्राइग्लिसराइड का लेवल बढ़ जाता है।

दिल की बीमारी का खतरा

बाजार के अचार में तेल की मात्रा भी काफी ज्यादा होती है ताकि ये अचार लंबे समय तक खराब न हों और सूखें नहीं। तेल में फैट होता है जो आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है इसलिए अचार ज्यादा खाने वालों को दिल की बीमारियों का खतरा भी ज्यादा होता है। चूंकि दिल की बीमारियों की एक बड़ी वजह बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल है इसलिए आपको अचार का सेवन रोज नहीं करना चाहिए और बहुत कम मात्रा में करना चाहिए।

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कैंसर का खतरा

आपको जानकर हैरानी होगी कि अचार खाने से आपको कैंसर का भी खतरा हो सकता है। दरअसल बाजार में बिकने वाले सस्ते अचारों में घटिया प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो हानिकारक केमिकल्स से बने होते हैं। इसके अलावा इसमें इस्तेमाल होने वाला तेल-मसाला भी घटिया क्वालिटी का हो सकता है। ऐसे में केमिकलयुक्त इन अचारों को खाने से आपको कैंसर का खतरा भी हो सकता है।

कौन सा अचार खाएं

अगर आप अचार के शौकीन हैं, तो अच्छी क्वालिटी का अचार खाएं और रोजाना खाने के बजाय कभी-कभी कम मात्रा में खाएं। कम मात्रा में अचार का सेवन आपके सेहत के लिए फायदेमंद भी है। बेहतर होगा कि आप घर में ही कम तेल-मसाले और नमक वाला अचार बनाएं, जिससे आपको सेहत के लिए स्वाद से समझौता न करना पड़े।

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विटामिन बी6 की कमी होने पर आते हैं शरीर में ये भयानक बदलाव

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 27, 2018

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QUICK BITES
  • इसकी कमी से बुध्दि मंद पड़ जाती है और शरीर में एेंठन आती है। 
  • मांसाहारी पदार्थों में विटामिन बी कॉम्पलेक्स की भरपूर मात्रा होती है।
  • विटामिन बी- 6 को रसायन विज्ञान की भाषा में ‘पाइरीडॉक्सीन’ कहते हैं।
 

शरीर को स्वस्थ रखने विटामिन और पोषण तत्वों की खासी जरूरत होती है। विटामिन्स और मिनरल्स दिमाग को पोषण देते हैं और शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करते हैं। अंगों के विकास के लिए भी शरीर को अलग-अलग कई विटामिन्स की जरूरत पड़ती है। विटामिन बी- 6 को रसायन विज्ञान की भाषा में ‘पाइरीडॉक्सीन’ कहते हैं। यह त्वचा के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से बुध्दि मंद पड़ जाती है और शरीर में एेंठन आती है। यह दूध, कलेजी, खमीर, मांस और अनाज में पाया जाता है।

स्वस्थ रहने के लिए हम हमेशा संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाने की कोशिश करते हैं, परन्तु फिर भी कई बार हमारे खानपान में कोई न कोई ऐसी कमी रह ही जाती है, जिससे सेहत संबंधी कई समस्याएं हमें परेशान करने लगती हैं। शरीर को सुचारु रूप से चलाने में विटामिन्स और माइक्रोन्यूट्रीएंट्स बहुत जरूरी होते हैं। विटामिन बी 6 या पायरीडॉक्सामाइन भी शरीर के लिए जरूरी तत्व है। ये त्वचा, इम्यून सिस्टम और मेटाबॉलिज्म आदि को ठीक रखने के लिए बहुत जरूरी है। आइये आपको बताते हैं कि विटामिन बी 6 के क्या लाभ हैं और किन आहारों से मिल सकता है ये विटामिन।

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विटामिन बी6 की कमी के लक्षण

  • भूख न लगना
  • नींद की कमी या इंसोम्निया।
  • जीभ में सूजन और दर्द रहना।
  • चलने फिरने में दिक्कत होना।
  • अक्सर थकान और सुस्ती रहना।
  • हाथ-पैरों में झनझनाहट और जलन।
  • चेहरे और उसके आसापास सूजन आना।
  • स्किन का ड्राई होना, बालों का झड़ना, होंठों का फटना। 
  • चिड़चिड़ापन और चीजों को याद करने में दिक्कत होना, आदि।

विटामिन बी6 से संयुक्त आहार 

अगर आप भी हमेशा इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि विटामिन बी6 का सेवन किन आहारों से किया जाए तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। मांसाहारी पदार्थों में विटामिन बी कॉम्पलेक्स की भरपूर मात्रा होती है, परन्तु शाकाहारी लोगों को विशेष रूप से अपने भोजन पर ध्यान देना चाहिए। विटामिन बी कॉम्पलेक्स के कुछ मुख्य स्रोत है। हमें डेरी उत्पादों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए जैसे दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन, सोया मिल्क आदि। इसके अलावा जमीन के भीतर उगने वाली सब्जियों जैसे आलू, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर आदि में भी विटामिन बी आंशिक रूप से पाया जाता है।

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ग्रीन टी नहीं अब पीजिए रेड टी, मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 27, 2018

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QUICK BITES
  • रेड टी अनार के दानों से बनती है।
  • रेड टी पीने से पाचन संबंधी परेशानी दूर होती है।
  • अनार में ढेर सारे फायदेमंद तत्व और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।
 

अक्सर जब फायदेमंद चाय की बात आती है, तो आप ग्रीन टी का नाम सुनते होंगे मगर क्या आपको पता है कि ग्रीन टी के बजाय रेड टी का सेवन भी आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। रेड टी सामान्य ग्रीन टी के जैसी कड़वी नहीं होती है इसलिए इसे वो लोग भी पी सकते हैं जिन्हें ग्रीन टी का स्वाद कड़वा लगता है। आइये आपको बताते हैं कि आप रेड टी कैसे बना सकते हैं और इससे आपको क्या लाभ मिलते हैं।

अनार से बनती है रेड टी

रेड टी बनाने के लिए अनार के ताजे दानों का प्रयोग किया जाता है। अनार सेहत के लिए फायदेमंद होता है- ये आप भी जानते होंगे मगर इसकी चाय भी सेहत के लिए बहुत फायेदमंद होती है। अनार में मुख्य रूप से विटामिन ए, सी, ई, फोलिक एसिड और एंटी ऑक्सीडेंट पाये जाते हैं। अनार रक्त में आयरन की कमी को दूर करता है और एनीमिया जैसी बीमारियों से छुटकारा दिलाता है।

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कैसे बनाएं रेड टी

  • रेड टी बनाने के लिए सबसे पहले 2-3 कप अनार के बीज लें।
  • इन्हें चीनी के साथ मिलाकर ग्राइंडर में अच्छी तरह पीस लें।
  • अब इस पेस्ट को किसी जार में भरकर फ्रिज में रख दें ताकि इसका बाद में भी इस्तेमाल कर सकें।
  • चाय बनाने के लिए एक कप गर्म पानी में दो चम्मच पेस्ट मिलाएं।
  • अगर आपको चीनी से परहेज है, तो इसमें शहद मिला सकते हैं।
  • आपकी चाय तैयार है।

रेड टी पीने के फायदे

  • गर्मियों में सही खान-पान के लिए अनार की चाय को भी अपने आहार में शामिल करना चाहिए। इससे पाचन संबंधी समस्याओं में तो आराम मिलता ही है, साथ ही इसके नियमित सेवन से धमनियां भी ठीक रहती हैं।
  • गर्भवती महिलाएं जो अनार के चाय का सेवन करती हैं, उनका बच्चा हेल्दी और स्वस्थ होता है।
  • अनार में ऐसे गुण हैं जो कैंसर से शरीर को बचाते हैं। खास तौर पर ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और फेफड़ों के कैंसर में अनार की चाय का सेवन करने से बहुत फायदा मिलता है।
  • विटमिन सी और एंटी ऑक्सीडेंट तत्वों से भरपूर यह फल हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाता है। एंटी ऑक्सीडेंट तत्वों की अधिकता होने के कारण यह खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से शुरुआती दौर में ही रोक देता है।
  • इसमें फॉलिक एसिड भी होता है, जिससे उच्च रक्तचाप और एनीमिया का खतरा कम होता है। हीमोग्लोबिन की कमी में अनार का सेवन अच्छा माना जाता है, मगर डायबिटीज के रोगी इसे न लें।
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मानसून में खाएं ये 6 चीजें, स्वस्थ रहने के साथ इम्यून सिस्टम भी होगा मजबूत

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 27, 2018

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QUICK BITES
  • इस मौसम में प्रदूषित पानी की अधिकता रहती है। 
  • भोजन के साथ सलाद का उपयोग अधिक से अधिक करें।
  • इस मौसम में अपनी डाइट का विशेष ख्याल रखना चाहिए।
 

मानसून में प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर होने और अस्वास्थ्यकर आहार से पाचन संबंधी विकार जैसे कब्ज, पेचिश, अपच, उल्टी, फूड पॉइजनिंग आदि की समस्‍या हो सकती है। इसके अलावा गैस्ट्रो आंत्र संक्रमण जैसे टाइफाइड, हैजा, मलेरिया, पीलिया और वायरल संक्रमण जैसे सर्दी और खांसी जैसी बीमारियों बहुत ही आम हैं। इसलिए हमें इस मौसम में अपनी डाइट का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

साफ पानी है सबसे जरूरी

इस मौसम में प्रदूषित पानी की अधिकता रहती है। इसलिए पानी से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए स्वास्थ्य विषेशज्ञ साफ पानी पीने की सलाह देते हैं। इसलिए मानसून में आप सिर्फ फिल्टर्ड और उबला हुआ पानी ही पियें। इसके अलावा आप स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र से क्‍लोरीन की गोलियां लेकर उसे पानी में डाल सकते हैं। इससे भी पानी शुद्ध हो जाता है। 

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सलाद लें अधिक

भोजन के साथ सलाद का उपयोग अधिक से अधिक करें। सलाद का सेवन पाचन क्रिया को दुरुस्‍त बनाये रखने में मदद करता है। ककड़ी, टमाटर, मूली, गाजर, पत्तागोभी, प्याज, चुकंदर आदि को सलाद में शामिल करें। इनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद नमक हमारे लिए पर्याप्त होता है। ऊपर से नमक न डालें। साथ ही अंकुरित अनाज (जैसे मूंग, मोठ, चना आदि) तथा भीगी हुई दालों का भरपूर मात्रा में सेवन करें। अनाज को अंकुरित करने से उनमें उपस्थित पोषक तत्वों की क्षमता बढ़ जाती है। ये पचाने में आसान, पौष्टिक और स्वादिष्ट होते हैं।

कच्चा नहीं होना चाहिए खाना

मानसून में शरीर भोजन को जल्दी नहीं पचा पाता है। और कच्‍चा या अधपका खाने का मतलब है, कई बीमारियों को दावत देना। इसलिए मानसून में अपने खाने को अच्‍छे से पकाकर खाना चाहिए। यहां तक कि सलाद भी नहीं खाना चाहिए।

प्याज और अदरक

इस मौसम में प्याज और अदरक का सेवन ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए। साथ ही भोजन में रेशेदार फलों का सेवन इस मौसम में लाभदायक रहता है। इसके अलावा नींबू के सेवन से विटामिन सी मिलता है और इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। और पुदीना के सेवन से पाचन तंत्र मजबूत रहता है। 

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फास्ट फूड को कहें ‘नो’

वैसे तो मानसून में स्ट्रीट फूड से खुद को दूर रख पाना थोड़ा मुश्किल काम है। लेकिन फिर भी जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके इससे बचें। स्ट्रीट फूड में कई तरह के बैक्‍टीरिया होते हैं, जो बीमारियों को जन्म देते हैं। मानसून में ज्यादा तेल मसाला खाने से परहेज करना चाहिए। साथ ही खट्टी चीजे, इमली, अचार आदि भी नही खाना चाहिए। क्‍योंकि इससे शरीर में पानी की मात्रा में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है। जबकि करेला, नीम, तुलसी, मेथी व हल्दी, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहयोग करती हैं।ऐसे

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कोलेस्ट्रॉल कम करना है तो खाएं ये 5 फल, दूर होंगी दिल की बीमारियां

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 25, 2018

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QUICK BITES
  • नाशपाती को अपने आहार में शामिल करें।
  • नींबू सहित सभी खट्टे फलों में कुछ ऐसे घुलनशील फाइबर होते हैं।
  • प्रोटीन और विटामिन से भरपूर सेब कोलेस्ट्रॉल घटाता है।
 

कोलेस्‍ट्रॉल एक तरह का वसायुक्‍त तत्‍व है, जिसका उत्‍पादन लिवर करता है। यह कोशिकाओं की दीवारों, नर्वस सिस्‍टम के सुरक्षा कवच और हार्मोंस के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। ये 2 तरह का होता है, गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल। भोजन के साथ जो वसा हम लेते हैं, उन्‍हें परिवर्तित कर हमारा शरीर कोलेस्‍ट्रोल का निर्माण करता है। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए हमें सीमित मात्रा में वसा का सेवन करना चाहिये। दिल के मरीज में अगर कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाए तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिये जरुरी है कि कोलेस्‍ट्रॉल के लेवल को हमेशा नियंत्रित रखा जाये खासकर जब आपके टेस्‍ट में इसका लेवल बहुत ज्‍यादा आया हो तो। ऐसे कई फल हैं जिनके सेवन से आप अपने शरीर का बैड कोलेस्ट्रॉल आसानी से घटा सकते हैं।

नाशपाती

नाशपाती में मौजूद पैक्टिन नामक पानी में घुलनशील फाइबर रक्त कोलेस्ट्रॉल और सेलूलोज के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते  है। इसलिए नाशपाती को अपने आहार में शामिल करें। साथ ही नाशपाती में हमारे शरीर के लिए जरूरी सभी प्रकार के प्राकृतिक विटामिन, मिनरल, एंजाइम पाये जाते हैं। इसके अलावा नाशपाती में एंटीऑक्सीडेंट भी पाये जाते है जो एलडीएल को कम करते है।

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नींबू का प्रयोग

नींबू सहित सभी खट्टे फलों में कुछ ऐसे घुलनशील फाइबर होते हैं, जो खाने की थैली में बैड कोलेस्‍ट्रॉल को रक्‍त प्रवाह में जाने से रोक देते हैं। ऐसे फलों में मौजूद विटामिन सी रक्‍तवाहिका नलियों की सफाई करता है। इस तरह बैड कोलेस्‍ट्रॉल पाचन तंत्र के जरिये शरीर से बाहर निकल जाता है। खट्टे फलों में ऐसे एंजाइम्‍स पाए जाते हैं, जो मेटाबॉलिज्‍म की प्रक्रिया को तेज करके कोलेस्‍ट्रॉल घटाने में सहायक होते हैं।

सेब है फायदेमंद

प्रोटीन और विटामिन से भरपूर सेब कोलेस्ट्रॉल घटा कर रक्तचाप को सामान्य बनाए रखता है इसलिए इसे सेहत का खजाना कहा जाता है। सेब में पेक्टिन के घुलनशील रेशे होते हैं, जो रक्त में कोलेस्ट्राल का स्तर घटाते हैं और शरीर के लिए बैक्टीरिया रोधी एजेंट की भूमिका निभाते हैं।

पपीता

पपीते में फाइबर, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है जो आपकी रक्त-शिराओं में कोलेस्ट्रोल के थक्कों को  बनने देता। कोलेस्ट्रोल के थक्के दिल का दौरा पड़ने और उच्च रक्तचाप समेत कई अन्य ह्रदय रोगों का कारण बन सकते हैं।

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टमाटर

टमाटर रक्तवाहिनियों में थक्का जमने से रोकता है। इससे हार्ट अटैक (हृदयाघात) एवं स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। रक्तवाहिनियों में बनने वाला खून का थक्का रक्त के बहाव में रुकावट पैदा करता है जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा होता है। एस्पिरिन की अपेक्षा टमाटर के बीजों का रस इन बीमारियों की रोकथाम में ज्यादा कारगर साबित होता है।

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बारिश में खान-पान में बरतें ये सावधानियां, नहीं होगी कोई बीमारी

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 25, 2018

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QUICK BITES
  • बारिश के मौसम में भारतीय मसालों का प्रयोग जरूर करें।
  • हरी सब्जियों के प्रयोग में सावधानी बरतें और दाल का सेवन ज्यादा करें।
  • मांसाहारी आहारों के सेवन से बचें क्योंकि इस समय बैक्टीरिया हावी होते हैं।
 

बारिश का मौसम कई लोगों को बहुत खूबसूरत लगता है मगर ये अपने साथ ढेर सारी बीमारियां भी लाता है। बारिश में होने वाली ज्यादातर बीमारियां पेट और त्वचा से जुड़ी होती हैं। इसके अलावा इस मौसम में संक्रमण का भी खतरा बढ़ जाता है। इन बीमारियों से बचाव के लिए आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और अपने खान-पान की आदतों में थोड़े बदलाव करने चाहिए।

मसालों का करें प्रयोग

आमतौर पर आपने सुना होगा कि मसालों का ज्यादा प्रयोग सेहत के लिए नुकसानदायक है। मगर आपको बता दें कि भारतीय मसालों में कई ऐसी चीजें हैं, जो आपको गंभीर बीमारियों के साथ-साथ संक्रमण से बचाते हैं। अपने रोज के खाने में लहसुन, अदरक, प्याज, हींग, जीरा, अजवायन, धनिया, हल्दी, काली मिर्च और हरी मिर्च शामिल करें। इन सभी चीजों में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, एंटी-पेन और एंटी- इंफ्लेमेट्री गुण होते हैं।

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पानी उबाल कर पिएं

बारिश में बीमारियों की एक बड़ी वजह पानी से होने वाले संक्रामक रोग हैं। इसलिए आपको या तो आर. ओ. का पानी पीना चाहिए या पानी उबालकर पीना चाहिेए। दरअसल पानी के द्वारा कई तरह के संक्रमण और बैक्टीरिया आपके शरीर में पहुंच सकते हैं। इसलिए पानी के इस्तेमाल में विशेष सावधानी बरतें।

दालों का सेवन करें

बरसात के मौसम में मौसमी फल और सब्जियों में भी कई तरह के संक्रमण हो सकते हैं। इसलिए फलों और सब्जियों के प्रयोग में सावधानी बरतने की जरूरत होती है। किसी भी फल या सब्जी को बिना अच्छी तरह धोए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हरी पत्तियों वाली सब्जियों की अच्छी तरह जांच कर लेनी चाहिए। इस मौसम में दाल का सेवन ज्यादा करना चाहिए क्योंकि दालों में कई तरह के प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो आपको स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

तरल पदार्थों का ज्यादा सेवन करें

बरसात के मौसम में ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन अच्छा रहता है। दिनभर में कम से कम 4-5 लीटर पानी पीना चाहिए। पानी शरीर में मौजूद हानिकारक तत्वों को बाहर निकालता है और शरीर को हाइड्रेट रखता है। इसके अलावा गर्म सूप, जूस, छाछ और दूध का सेवन भी करना चाहिए।

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मांसाहारी भोजन कम करें

बरसात के दिनों में बैक्टीरिया हर जगह हावी होते हैं। मांसहारी भोजन में इन बैक्टीरिया की संभावना बढ़ जाती है इसलिए मॉनसून में मांसाहारी भोजन का सेवन कम कर देना चाहिए। केवल ताजे मांस का प्रयोग करें, जो धीमी आंच में देर तक अच्छे से पकाया गया हो। बाजार में मिलने वाले मांसाहारी फूड्स से पेट संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। मछली और झींगा जैसै मांसाहारी आहारों से पूरी तरह बचना चाहिए।

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स्वाद ही नहीं सेहत से भी भरपूर है हैदराबादी बिरयानी, जानें रेसेपि

By Atul Modi,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 25, 2018

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बिरयानी और हैदराबाद एक दूसरे की पहचान हैं। स्वाद और खुशबू से भरी सबसे अच्छी बिरयानी के लिए हैदराबाद की पहचान विदेशों में भी है। खाने में इस साल बिरयानी भी काफी पॉपुलर रही है। बिरयानी मुख्य रूप से नॉनवेज के रूप में बनाई जाती है लेकिन इसके स्वाद से वेजिटेरियन भी खुद को दूर नहीं रख पाए इसलिए वेज बिरयानी भी आजकल खूब खाया जा रहा है। हैदराबादी बिरयानी एक खास तरीके से बनाई जाती है। इसकी लोकप्रियता का आलम ये है कि मंहगे रेस्टोरेंट्स से लेकर गली चौराहों तक आपको हैदराबादी बिरयानी की कई वैरायटीज मिल जाएंगी। आइए जानते हैं इसे बनाने के लिए किन सामग्री की आवश्यकता पड़ती है और क्या है इसे बनाने की विधि-

सामग्री

1 किलो मटन, 750 ग्राम बासमती चावल, 1 टीस्पून नमक, 1 टीस्पून अदरक-लहसुन पेस्ट, 1 टीस्पून लाल मिर्च पेस्ट, 1 टीस्पून हरी मिर्च पेस्ट, फ्राई किए हुए प्याज, 1/2 टीस्पून गुलाब की पत्तियों का पाउडर, 3-4 स्टिक दालचीनी, 3-4 बड़ी इलायची, 3-4 छोटी इलायची, थोड़ा सा जायफल, 1 टीस्पून जीरा, 4 लौंग, 2 टीस्पून नींबू रस, 250 ग्राम दही, 250 ग्राम देसी घी, 4 टीस्पून बटर, 1 टीस्पून केसर, 1 टीस्पून गुलाबजल, 2 लीटर पानी, 1/2कप तेल, धनिया

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बिरयानी मसाला तैयार करने के लिए

घी को एक पैन में गर्म करके दालचीनी, तेज़पत्ता, जायफल, लौंग और इलायची के बीज़ डालें। इसके बाद इसमें प्याज़ डालकर भूनें। फिर इसमें टमाटर डालकर तैयार किया चिकन का मिश्रण डालें। पैन को ढक कर चिकन को हल्की आंच पर 10 मिनट के लिए पकाएं। जब ग्रेवी गाढ़ी हो जाए, तो एक बाउल में एक लेयर चावल की और एक लेयर बनाए गए चिकन की डालें। ऐसे ही चार से पांच लेयर तैयार करें। ऊपर से उबले हुए अंडे को चार हिस्सों में काटकर काजू और किशमिश के साथ ग्रार्निशिंग के लिए इस्तेमाल करें। आपकी बिरयानी तैयार है इसे सर्व करें।

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विधि

1. मटन धोकर उसमें अदरक-लहसुन पेस्ट और दही के साथ सभी मसालों को डालकर अच्छी तरह मिलाएं। 30 मिनट के लिए मैरिनेट करें।

2. बासमती चावल को अधपका पकाएं। अब एक बड़े बर्तन में पहले मीट की लेयर बिछाएं और फिर एक लेयर चावल की। ऐसी दो लेयर तैयार करें।

3. थोड़े से गर्म पानी में केसर, घी, गुलाबजल, जायफल पाउडर को डालकर चावल पर फैलाएं और ऊपर से गरम मसाला पाउडर छिड़कें। अब इसे प्लेट से ढककर अच्छी तरह सील कर दें। मीडियम आंच पर 15 मिनट तक पकाएं।

4. हैदाराबादी बिरयानी को प्लेट पर निकालकर कटी हुई अदरक और ब्राउन प्याज से गार्निश करें। इसे सालन या रायते के साथ खाएं।

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लिवर की गंदगी को साफ कर बीमारियां दूर करते हैं ये 7 हेल्‍दी फूड

By Atul Modi,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 25, 2018

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QUICK BITES
  • अधिक दबाव पड़ने पर लिवर विषाक्त पदार्थों को बाहर नहीं निकाल पाता।
  • लिवर की सफाई करने के लिए हरी सब्जियां सबसे अच्छा आहार है।
  • साबुत अनाज में विटामिन बी कॉमप्‍लेक्‍स अच्‍छी मात्रा में पाया जाता है।
 

लिवर हमारे शरीर का सबसे मुख्‍य अंग है। इससे बने बाइल जूस से खाना पचाने में मदद मिलती है। जरूरत से ज्‍यादा खाने, ज्‍यादा तेलयुक्त खाने, ज्‍यादा शराब पीने और कई अन्‍य कारणों से लिवर अतिभारित हो जाता हैं। अधिक दबाव पड़ने पर लिवर सही तरीके से विषाक्त पदार्थों को बाहर नहीं निकाल पाता। लेकिन कई ऐसे खाद्य पदार्थों है जो स्वाभाविक रूप से लिवर को साफ कर सकते हैं। प्राकृतिक क्षमता इन खाद्य पदार्थों के सेवन से शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ किया जा सकता है।

हरी सब्‍जियां

लिवर की सफाई करने वाला सबसे शक्तिशाली आहार हरी सब्जियों को माना जाता है। इन पत्तेदार सब्जियों को आप कच्‍चा, पका या जूस के रूप में सेवन कर सकते हैं। यह लिवर से विषैले तत्‍वों को बाहर निकालने में काफी मददगार साबित होती हैं। इसमें मौजूद क्‍लोरोफिल तत्‍व लीवर में खतरनाक रसायनों के प्रभावों को कम करत है।

लहसुन है फायदेमंद 

लहसुन की एक छोटी सी सफेद कली में लीवर एंजाइम को सक्रिय करने की क्षमता होती है। जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलवाने में मदद करती हैं। साथ ही लहसुन में उच्‍च मात्रा में मौजूद ऐलिसिन और सेलेनियम, दोनों ही तत्‍व लीवर की सफाई करने में मदद करते हैं।

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ग्रेपफ्रूट में एंटीऑक्‍सीडेंट

एंटीऑक्‍सीडेंट और विटामिन सी से भरपूर ग्रेपफ्रूट लीवर की प्राकृतिक रूप से सफाई करता है। एक छोटा गिलास ग्रेप्‍फ्रूट का  सेवन लीवर में कार्सिनोजिन को इकठ्ठा होने से रोकता है और अन्य विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलवाने में मदद करता हैं।

चुकंदर और गाजर

चुकंदर और गाजर दोनों ही फ्लेवोनॉइड और बीटा कैरोटीन से समृद्ध होते हैं। इन दोनों को खाने से लिवर  की कोशिकाओं की मरम्‍मत होती हैं और लीवर ठीक से कार्य कर पाता है। साथ ही यह लीवर के सभी कार्यों को सुधारता भी है। ब्रोकोली विटामिन और मिनरल से भरपूर होता है। इसमें ग्‍लूकोसिनोलेट्स मौजूद होते हैं। यह तत्‍व लीवर में एंजाइम को पैदा करते हैं, इस एंजाइमों की मदद से लीवर के अंदर की सारी गंदगी बाहर निकल जाती है।

साबुत अनाज

साबुत अनाज में विटामिन बी कॉमप्‍लेक्‍स अच्‍छी मात्रा में पाया जाता है। विटामिन बी कॉमप्‍लेक्‍स फैट को बैलेंस और लीवर के फंक्शन को सही रखता है। ब्राउन राइस, मल्‍टी ग्रेन और सोया आटा लीवर के लिये बहुत अच्‍छे माने जाते हैं।

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सेब है खास

लिवर को मजबूत रखने के लिए रोज एक एंटीओक्सिडेंट से भरपूर सेब को खाएं। हम रोजमर्रा में जो कुछ भी जहरीले पदार्थ खाते हैं उसे लीवर शरीर से साफ करता है। इसलिए लिवर  का मजबूत होना और साफ होना बहुत जरूरी है। सेब में मौजूद पेक्टिन नामक तत्‍व शरीर को शुद्ध और पाचन तंत्र से विषाक्त पदार्थों को रिलीज करने के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण होता है।

वोकाडो में है मोनोसैचुरेटेड फैट

एवोकाडो में ग्‍लूटाथोनिन तत्‍व और मोनोसैचुरेटेड फैट दोनों मौजूद होते हैं। इन तत्‍वों से लीवर की सफाई के साथ कोशिकाओं और ऊतकों को नया बनाने में मदद मिलती है। इसका नियमित रूप से सेवन करने से बाइल बनने में सुधार होता है और लीवर स्‍वस्‍थ रहता है।

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चाहिए अच्छा डाइजेशन, तो अपनी डाइट में जरूर शामिल करें छोले

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 24, 2018

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QUICK BITES
  • -छोले प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है।
  • -छोले कैंसर और हार्ट प्राब्लम्स से बचाता है।
  • -छोले रोजाना खाने से भूख नियंत्रित होती है।
 

लेग्यूम फैमिली यानी फलियों के परिवार से ताल्लुक रखने वाले छोले हजारों सालों से हमारी डाइट का हिस्सा हैं। लेकिन हाल के दिनों में ही इसमें पाए जाने वाले उपयोगी तत्वों का पता चला है। यह विटामिन, मिनरल और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है। यह डाइजेशन को इंप्रूव करता है, वजन संतुलित रखता है और कई बीमारियों से निजात दिलाता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ छोलों को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। 

न्यूट्रिशनल प्रोफाइल

छोले कैलोरीज के बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं। प्रत्येक 28 ग्राम छोले में 46 कैलोरी, 31 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 2 ग्राम फाइबर, 3 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसके अलावा छोलों में फोलेट, आयरन, फोसफोरस, काॅपर, मैंग्नीज भी मौजूद है। इस लिहाज से देखें तो छोले में सभी महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं।

भूख कंट्रोल करे

प्रोटीन और फाइबर होने की वजह से यह भूख को नियंत्रित करने में सहायक होता है। दरअसल प्रोटीन और फाइबर धीरे-धीरे डाइजेस्ट होता है, इसलिए हमेशा पेट भरे का अहसास कराता है।  एक अध्ययन से इस बात की पुष्टि भी हुई है। अध्ययन में कुछ लोगों को 12 हफ्तों तक 104 ग्राम छोले खाने को दिया गया। इन लोगों को छोले खाने के बाद कम भूख लगी है, जिस वजह से इनके खानपान में जंक फूड की कमी देखी गई। हालंाकि अभी इस क्षेत्र में और भी अध्ययन होने बाकी है। 

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पर्याप्त प्रोटीन

जो लोग नान-वेज नहीं खाते, उनके लिए यह बेहतरीन खाद्य पदार्थ है। वेजीटेरियन लोगों के लिए छोले प्लांट बेस्ड प्रोटीन का मुख्य स्रोत है। इसमें उतना ही प्रोटीन पाया जाता है, जितना कि ब्लैक बीन्स में होता है। इसे खाने से वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है।

ब्लड शुगर कंट्रोल

छोलों में कई तरह के प्रापर्टीज होते हैं, जिस वजह से ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहता है। सबसे पहले बात तो छोलों में ग्लाकेमिक इंडेक्स या जीई काफी कम होता है, जो खाना खाने के बाद ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाता है। डाइटीशियन की मानें तो जिन आहार में लो-जीई होता है, वह बेहतरीन तरीके से ब्लड शुगर को कंट्रोल कर पाते हैं।

बेहतर पाचनतंत्र

छोले में फाइबर भी काफी मात्रा में पाया जाता है, इसलिए इसे डाइजेस्टिव हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता है। छोले में मौजूद फाइबर सोल्यूबल यानी घुलनशील होता है। सोल्यूबल फाइबर की वजह से हेल्दी बैक्टीरियर की संख्या बढ़ती है, जो पाचनतंत्र को बेहतर बनाने में उपयोगी है।

हार्ट प्राब्लम से छुटकारा

छोले को कई गंभीर बीमारियों में कारगर उपाय के रूप में देखा जाता है जैसे हृदय संबंधी बीमारियां। असल में छोले में मैग्नीशियम और पोटाशियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो हृदय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। 12 हफ्तों तक 45 लोगों पर एक अध्ययन किया गया। इस अध्ययन से पता चला कि जो लोग रोजाना 728 ग्राम छोले प्रत्येक सप्ताह खाते हैं, उनके कोलेस्ट्रोल का स्तर घटता है। इस तरह यह हार्ट को हेल्दी रखता है।

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कैंसर से आराम

छोला कैंसर जैसी घातक बीमारी में आरामदायक साबित हुआ है। एक अध्ययन से इस बात का पता चला है कि रोजाना छोले खाने से शरीर फैटी एसिड का उत्पादन होता है। यह फैटी एसिड कोलोन सेल में जलन जैसी समस्या को घटाता है। इसी वजह से यह कोलोन कैंसर की आशंका को कम करता है। इसी तरह छोले डायबिटीज में भी कारगर है।

वैरायटी

छोलों को अपनी डाइट में शामिल करने की एक और वजह है। यह है कि इससे आप तरह-तरह की डिशेज बना सकते हैं, जो खाने में स्वादिष्ट होती हैं। मसलन इसे उबालकर या ग्रेवी बनाकर खाया जा सकता है।

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आपकी बढ़ती तोंद की वजह हैं ये 5 सबसे खराब फूड

By Meera Roy,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 24, 2018

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  • पोटेटो चिप्स से बढ़ता है बेली फैट।
  • नान वेज खाना भी सही नहीं है।
  • फ्रेंच फ्राइज हर चार साल में वजन बढ़ाता है।
 

हम अपने वजन को नियंत्रित करने के लिए और अपने बेली फैट को कम करने के लिए न जाने क्या-क्या करते हैं। डाइटीशियन से अपना डाइट चार्ट बनाते हैं, जिम में घंटों पसीना बहाते हैं। इसके बावजूद अगर आपका वजन कम नहीं होता या फिर आपकी बेली फैट उभरी हुई है, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि ऐसा क्यों? असल में इसके लिए आपको एक बार अपनी डाइट की ओर नजर दौड़ानी होगी। कई बार हम चाहे-अनचाहे ऐसे फूड्स अपनी डाइट में शामिल कर लेते हैं, जो हमारे बेली फैट को बढ़ा देता है। जानिए, इन फूड्स के बारे में।

पोटेटो चिप्स

हार्वर्ड रिसचर्स का मानना है कि पोटेटो चिप्स बेली फैट के लिए सबसे खराब फूड आइटम है। सिर्फ इसलिए नहीं कि इसमें सेचुरेटेड फैट है बल्कि इसलिए भी क्योंकि यह एब्डोमिनल फैट को बहुत तेजी से बढ़ाता है। इतना ही नहीं इसमें बहुत ज्याद कैलोरी होती है, जो बेली के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। महज मुट्ठी भर पोटेटो चिप्स की वजह से आपका वजन आसानी से बढ़ सकता है। सो, इसे अपनी डाइट से जितना जल्दी हो, निकाल बाहर करें। इसके बजाय आप चाहें तो ब्राउन राइस से बने चिप्स खा सकते हैं। स्नैक टाइम में इसे खाया जा सकता है।

डाइट सोडा

माना जाता है कि डाइट सोडा में लिमिटेड कैलोरी होती है। ऐसा है भी। इसके बावजूद डाइट सोडा पीने की वजह से तेजी से बेली फैट बढ़ जाता है। ऐसा हाल के दिनों में हुए अध्ययनों से सामने आया है। शोकर्ताओं का मानना है कि लोग डाइट सोडा को यह सोचकर पीते हैं कि इसमें कम कैलोरी होती है। इस वजह से वे अनगिनत डाइट सोडा की गिलासेस पी जाते हैं। नतीजतन असंख्य कैलोरी वह अपनी बेली फैट में जमा कर चुके होते हैं। डाइट सोडा के बजाय व्हाइट टी पीना बेहतर विकल्प होता है। न्यूट्रीशन एंड मेटाबालिज्म स्टडी के मुताबिक व्हाइट टी स्टोर्ड फैट को कम करने में सहायक होता है।

पिज्जा

शायद ही कोई ऐसा युवा हो, जो पिज्जा खाने का शौकीन न हो। इसका स्वाद सबको अपनी ओर आकर्षित करता है। लेकिन पिज्जा में बहुत ज्यादा मात्रा में सेचुरेटेड फैट पाया जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि अन्य फैट की तुलना में सेचुरेटेड फैट पेट में ज्यादा तेजी से स्टोर होता है। इसका मतलब साफ है कि अगर आप पतले बेली की चाह रखती हैं, पिज्जा से तौबा करना ही होगा।

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फ्रेंच फ्राइज

यह भी फैट से लदा हुआ होता है। वजन बढ़ाने में तेजी से आपकी मदद करता है। 20 साल तक हार्वर्ड द्वारा हुए एक अध्ययन के मुताबिक जो लोग रेग्युलरली फ्रेंच फ्राइज खाते हैं, उनका हर चार साल में 3 पाउंड से ज्यादा वजन बढ़ जाता है। इसका मतलब साफ है कि फ्रेंच फ्राइज से बेली फैट बहुत आसानी से बढ़ सकता है। इसके बजाय घर का बना स्वीट पोटेटो फ्राइज खा सकते हैं। लेकिन इसे कोकोनट आयल स्प्र से बनाएं। इसके साथ अपनी डाइट में सलाद भी शामिल करें।

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नान वेज

कई अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हुई है कि सिमित मात्रा में नान-वेज खाना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। लेकिन अगर रोजाना नान-वेज यानी मांसाहारी खाया जाए, तो यह स्वास्थ्य को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है। एक चाइनीज रिसच से इस बात का खुलासा हुआ है कि रोजाना फैटी, फ्रेश रेडी मीट खाते हैं, तो इसका मतलब है कि एब्डोमिनल ओबेसिटी को न्योता दे रहे हैं। यानी आप नान-वेज जरूर खाएं, लेकिन सिमित मात्रा में।

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रोज इस तरह पिेएं टमाटर का हेल्दी जूस, मिलेंगे ये 5 फायदे

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 24, 2018

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  • टमाटर का जूस आसानी से घर पर बनाया जा सकता है।
  • टमाटर विटामिन सी का अच्छा स्रोत है।
  • टमाटर  का जूस वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।
 

टमाटर एक ऐसा फल है जिसका प्रयोग लगभग हर घर में और हर मौसम में होता है। सब्जी, सलाद, चटनी, सॉस और न जाने कितने सारे फूड्स में आप रोजाना टमाटर का इस्तेमाल करते हैं। मगर क्या आपको पता है कि टमाटर का जूस आपकी सेहत के लिए कितना फायदेमंद है? टमाटर का जूस आसानी से घर पर बनाया जा सकता है। इसमें ढेर सारे पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं। इसके अलावा टमाटर में कई एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो शरीर को गंभीर रोगों से बचाते हैं।

क्यों फायदेमंद है टमाटर का जूस

टमाटर विटामिन सी का अच्छा स्रोत होने के साथ–साथ जैविक सोडीयम, फासफोरस, कैल्शियम, पोटैशियम, मैगनीशियम और सल्फर का अच्छा स्रोत है। टमाटर में मौजूद ग्लूटाथियोन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और प्रोस्ट्रेट कैंसर से भी शरीर की सुरक्षा करता है। टमाटर का जूस इस खोई ऊर्जा को लौटाने में ज्‍यादा मददगार होता है। क्‍योंकि टमाटर में कई महत्‍वपूर्ण रसायन मौजूद होते हैं जो व्‍यायाम के बाद मांसपेशियों के खिंचाव को कम करता है और रक्‍त प्रवाह को सामान्‍य बनाता हैं।

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कैंसर का खतरा करे कम

हाल में हुए एक शोध में माना गया है क‌ि मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए टमाटर का अधिक सेवन ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करता है। आहार में टमाटर के अधिक सेवन से महिलाओं के हार्मोन्स पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और यह फैट्स और शुगर को न‌ियंत्रित करने में मदद करता है।

वजन कम करे टमाटर का जूस

टमाटर लो कैलोरी फूड है इसलिए इसके खाने से आपका वजन घटता है। टमाटर वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। अगर आप वजन कम करने के लिए आहार और व्‍यायाम की योजना पर हैं तो अपने रोजमर्रा के भोजन में टमाटर शामिल करें। टमाटर में ढेर सारा पानी और फाइबर होता है, इसीलिये इसे वजन नियंत्रण करने वाला ‘फिलिंग फूड’ कहते हैं। यह वो आहार है जो जल्‍दी पेट भरता है वो भी बिना कैलोरी या फैट बढ़ाये।

मिलेंगे विटामिन और कैल्शियम

टमाटर में मौजूद विटमिन और कैल्शियम हड्डियों के टिशूज़ की मरम्मत करने और उन्हें मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसका नियमित सेवन ब्रेन हैमरेज को रोकने में भी बहुत प्रभावी होता है।

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खाना पचेगा आसानी से

टमाटर से पाचन शक्ति बढ़ती है। इसमें मौजूद क्लोरीन और सल्फर के कारण लिवर बेहतर ढंग से काम करता है और गैस की शिकायत दूर होती है। यह प्रभावी ढंग से शरीर से विषाक्त पदार्थों की सफाई करने में सहायक होता है। अपच, कब्ज़, दस्त जैसी स्थिति में इसका सेवन फायदेमंद है।

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मांसपेशियों और हड्डियों के लिए फायदेमंद है साबूदाना, ऐसे करें ब्रेकफास्ट में शामिल

By Anurag Gupta,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 22, 2018

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QUICK BITES
  • साबूदाना खाने से आपकी हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  • साबूदाने की खीर और खिचड़ी बहुत स्वादिष्ट और सुपाच्य होती है।
  • एक कप साबूदाना खाने से आपको 45% कार्ब्स मिलते हैं।
 

साबूदाना की खिचड़ी, खीर और पापड़ आपने भी खाए होंगे। हमारे यहां व्रत-त्योहारों में साबूदाना का विशेष महत्व है और इसके ढेर सारे डिशेज बनाए जाते हैं। साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, सोडियम, कोलेस्ट्रॉल, प्रोटीन और फाइबर भरपूर होता है। इसके अलावा इसमें विटामिन बी-कॉम्पलेक्स, पैंटोथेनिक एसिड, फॉलेट, विटामिन बी-6, आयरन, मैग्नीज, कैल्शियम, कॉपर और सेलेनियम होता है। अगर आप रोज एक कप साबूदाना खाते हैं, तो इससे आपको 45% कार्ब्स मिलते हैं। अपने रोज के नाश्ते में साबूदाने को शामिल करें, आपके शरीर को मिलेंगे ये स्वास्थ्य लाभ।

एनर्जी बढ़ाता है साबूदाना

कई बार शरीर में एनर्जी और जोश के लिए लोग तरह-तरह के मल्टीविटामिन्स और एनर्जी ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं मगर इन सभी पदार्थों का कुछ न कुछ दुष्प्रभाव आपके शरीर पर पड़ता है। भरपूर एनर्जी के लिए आपको पौष्टिक तत्वों से भरपूर नाश्ता और खाना, खाना चाहिए। साबूदाना खाने से आपके शरीर में एनर्जी आती है क्योंकि इसमें काफी मात्रा में कार्ब्स यानि कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। इससे आपका पेट देर तक भरा रहता है और जल्दी थकान नहीं होती है।

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मांसपेशियां और हड्डियां रहेंगी मजबूत

साबूदाना खाने से आपकी हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। दरअसल साबूदाने में कैल्शियम की मात्रा भरपूर होती है इसके अलावा इसमें आयरन, विटामिन और प्रोटीन भी खूब पाया जाता है इसलिए ये हड्डियों की कमजोरी को दूर करता है और उन्हें मजबूत बनाता है। साबूदाने में मौजूद तत्व मांसपेशियों को भी मजबूत बनाते हैं।

शरीर में खून और हीमोग्लोबिन बढ़ाता है साबूदाना

साबूदाना खाने से आपको कभी भी एनीमिया की बीमारी नहीं होगी क्योंकि ये शरीर में खून और हीमोग्लोबिन बढ़ाता है। साबूदाना में मौजूद तत्व शरीर में रेड ब्लड सेल्स का निर्माण करने में मदद करते हैं। इसके सेवन से आपके शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है।

हाई ब्लड प्रेशर में फायदेमंद साबूदाना

 

अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो साबूदाना खाना आपके सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। साबूदाना शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को अच्छा बनाता है और धमनियों में जमे प्लाक को धीरे-धीरे कम करता है। इसलिए हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नाश्ते में साबूदाना जरूर खाना चाहिए।

पाचन में आसान

साबूदाना आपके पाचन तंत्र के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। यह कब्ज, अपच, सूजन और पेट फूलना जैसी पाचन संबंधी समस्‍याओं को दूर करने में मदद करता हैं। इसके अलावा यह आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियं‍त्रण में रखता हैं।

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कैसे करें नाश्ते में शामिल

अगर आप नाश्ते में साबूदाने का सेवन करना चाहते हैं तो इससे ढेर सारी डिशेज बना सकते हैं। साबूदाने की खीर और खिचड़ी बहुत स्वादिष्ट और सुपाच्य होती है। इसके अलावा साबूदाने से आप वड़ा, उपमा, नमकीन, टिक्की, पकौड़े, पोहा, कटलेट आदि भी बना सकते हैं।

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प्रेग्नेंसी में इस तरह पीएं पानी, शिशु की त्वचा में भी आएगा निखार

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 22, 2018

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QUICK BITES
  • गर्भवती स्त्री की भोजन की थाली सतरंगी होनी चाहिए।
  • कुछ सुपरफूड्स हैं, जो प्रेग्नेंसी के दौरान जरूर लेने चाहिए।
  • दालों में प्रोटीन, फाइबर, आयन, फोलेट, जिंक जैसे तत्व होते हैं।
 

गर्भवती को न सिर्फ अपने लिए बल्कि भावी शिशु के सही विकास के लिए भी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। कुछ सुपरफूड्स हैं, जो प्रेग्नेंसी के दौरान जरूर लेने चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था में जो भी भोजन किया जाता है, उसका शिशु के विकास पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए यह जरूरी है कि प्रेग्नेंसी में पर्याप्त पोषक तत्व मिलें। कुछ ऐसे सुपरफूड्स हैं, जिन्हें प्रेग्नेंसी में नहीं भूलना चाहिए।

  • पानी की महत्ता से कौन इंकार कर सकता है। यह न सिर्फ शरीर के भीतर से टॉक्सिक पदार्थों को बाहर करता है, बल्कि यूटीआइ जैसे संक्रमणों से भी बचाता है। यह प्रेग्नेंसी में होने वाली आम समस्या है। इसके अलावा नारियल पानी या ऑरेंज जूस भी डिहाइड्रेशन और कई अन्य संक्रमणों से बचाने में सहायक होता है।
  • हेल्दी फैट्स से भरपूर मेवे प्रेग्नेंसी में जरूरी हैं। इनमें अनसैच्युरेटेड फैट्स होते हैं। यह एक ओर पेट भरे होने का एहसास कराते हैं, साथ ही शिशु के मस्तिष्क का विकास करने में भी सहायक हैं। मुठ्ठी भर मेवे रोज खाएं और जब भी क्रेविंग हो, बिस्किट-नमकीन के बजाय इसे खाएं।
  • हरी पत्तेदार सब्जियों तो सभी के लिए जरूरी हैं। खासतौर पर पालक प्रेग्नेंसी में बहुत फायदेमंद है। यह फोलिक एसिड और फोलेट का महत्वपूर्ण स्रोत है। यह प्री-टर्म लेबर से रोकने के अलावा प्रीइक्लेंप्सिया से भी बचाव करता है। पालक में विटमिंस, मिनरल्स और कैल्शियम की भरपूर मात्रा होती है।
  • यह न सिर्फ प्रोटीन का स्रोत है, बल्कि इसमें दूध से भी ज्य़ादा कैल्शियम होता है। यह संक्रमणों से बचाता है। अब तो मार्केट में विटमिन डी, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटमिन बी और जिंक युक्त दही मिलने लगा है। लेने से पहले लेबल जरूर चेक करें।
  • मल्टीग्रेन आटा, ओटमील, ब्राउन राइस में फाइबर और अन्य पोषक तत्वों की प्रचुर मात्रा होती है। इसलिए प्रेग्नेंसी में इनका सेवन जरूर करें। साबुत अनाज में फोलिक एसिड और विटमिन बी, जिंक, आयन की प्रचुरता होती है।
  • राजमा, उड़द, काबुली चना और लाल मसूर दाल को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। ये फाइबर और प्रोटीन के पावरहाउस हैं, यानी प्रेग्नेंसी में परफेक्ट कॉम्बो। फाइबर पेट संबंधी परेशानियों से बचाता है, जबकि प्रोटीन से ऊर्जा प्राप्त होती है और यह पेट भरने का एहसास भी पैदा करता है। दालों में प्रोटीन, फाइबर, आयन, फोलेट, कैल्शियम, जिंक जैसे तत्व होते हैं।
  • गर्भवती स्त्री की भोजन की थाली सतरंगी होनी चाहिए। भोजन के अलावा मौसमी फल भी जरूरी हैं। अलग-अलग रंग के फल पोषक तत्वों, विटमिंस, एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं। हरे, पीले, नारंगी, लाल, बैगनी रंग के फल व सब्ज़्िायों का नियमित सेवन करें। विटमिन सी युक्त नीबू, आंवले या संतरे का सेवन भी ज़्ारूर करें क्योंकि यह गर्भावस्था में त्वचा संबंधी परेशानियों को दूर करते हैं।

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घीया-तोरी से बनाएं ये स्वादिष्ट डिश, उंगलियां चाटते रह जाएंगे घरवाले

By Rashmi Upadhyay,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 22, 2018

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QUICK BITES

 

 

गर्मियों में कुछ गिनी-चुनी सब्जि़यां ही मिलती हैं और उनसे भी जल्द ही मन ऊबने लगता है। ऐसे में समझ नहीं आता कि नया क्या बनाया जाए, पर इस मौसम में कई ऐसी सब्जि़यां आसानी से मिल जाती हैं, जिनसे स्वादिष्ट कोफ़्ते तैयार किए जा सकते हैं। आप भी तैयार हो जाएं अपने घर की थाली में लज़ीज़ कोफ़्ते परोसने के लिए।

कटहल की गोली

  • सामग्री : कटहल -300 ग्राम, आलू – 2 (मध्यम आकार के)
  • हरी मिर्च – 2 (बारीक कटी हुई)
  • अदरक-लहसुन का पेस्ट- 1 टीस्पून
  • बेसन- 2 टेबलस्पून (धीमी आंच पर भुना)
  • बारीक कटा हरा धनिया -1 टेबल स्पून
  • नमक- स्वादानुसार
  • तलने के लिए तेल- आवश्यकता अनुसार

विधि : छीलकर कटे हुए कटहल के टुकड़ों और आलू को प्रेशर कुकर में एक सीटी आने तक पकाएं। आलू छीलने के बाद इन दोनों चीज़ों को अच्छी तरह मसल लें। फिर इस मिश्रण में हरी मिर्च, अदरक, हरा धनिया, नमक और बेसन मिलाकर मध्यम आकार की गोलियां बना कर तल लें।

ग्रेवी के लिए सामग्री

  • प्याज-1 (मध्यम आकार का)
  • टमाटर – 2 (मध्यम आकार के)
  • हरी मिर्च – 2-3
  • लहसुन-अदरक का पेस्ट -1 टीस्पून
  • दालचीनी – 1 टुकड़ा
  • हल्दी पाउडर -1/2 टीस्पून
  • धनिया पाउडर -1 टीस्पून
  • लाल मिर्च पाउडर – 1/4 टीस्पून
  • गरम मसाला -1/4 टी स्पून
  • बारीक कटा हरा धनिया – 1 टीस्पून
  • नमक- स्वादानुसार

ग्रेवी की विधि : प्याज, लहसुन और अदरक घिस लें। टमाटर और हरी मिर्च को ग्राइंडर में पीसें। कड़ाही में 2 टेबलस्पून तेल डाल कर गरम करें। गरम तेल में साबुत दालचीनी डाल कर चटकाएं। घिसा प्याज डाल कर हलका गुलाबी होने तक धीमी आंच पर भूनें। प्याज के साथ लहसुन-अदरक का पेस्ट मिलाकर दो मिनट तक भूनें। फिर उसमें टमाटर का पेस्ट डालकर गाढ़ा होने तक पकाएं। अब इसमें धनिया और लाल मिर्च डालकर तब तक भूनें, जब तक कि मसाला तेल न छोडऩे लगे। भुने हुए मसाले में एक ग्लास पानी और नमक मिलाएं। ग्रेवी गाढ़ी होने तक पकाएं। गरम मसाला पाउडर डाल कर आंच बंद कर दें। फिर इसमें तले हुए कोफ़्ते डालकर ढक दें। को$फ्ते पर बारी$क कटा हरा धनिया छिड़कें और इसे गर्मागर्म रोटी या चावल के साथ परोसें।

केले के कोफ़्ते

  • सामग्री : कच्चे केले- 5
  • बेसन -2 टेबलस्पून (धीमी आंच पर भुना हुआ)
  • हरी मिर्च – 2-3 (बारीक कटी हुई)
  • अदरक – 1 टीस्पून (घिसा हुआ)
  • बारीक कटा हरा धनिया – 1 टेबलस्पून
  • तेल – आवश्यकता अनुसार
  • नमक- स्वादानुसार

कोफ्ते की विधि : उबले केले को छील कर मसल लें। बेसन, बारी$क कटी हरी मिर्च, अदरक, हरा धनिया और नमक डाल कर केले को अच्छी तरह मसल लें और मध्यम आकार के कोफ्ते बनाकर ब्राउन होने तक तलें।

ग्रेवी के लिए सामग्री

  • टमाटर 3-4 (मध्यम आकार के)
  • प्याज -2 (मध्यम आकार के)
  • लहसुन-अदरक का पेस्ट-1 टीस्पून
  • हरी मिर्च 2-3
  • काजू 10-15 (पानी में भिगोए हुए)
  • मलाई या क्रीम- 2 टेबलस्पून
  • हल्दी पाउडर- -1/2 टीस्पून
  • धनिया पाउडर- 1 टीस्पून
  • लाल मिर्च पाउडर- 1 टीस्पून
  • गरम मसाला पाउडर- -1/4 टीस्पून
  • नमक- स्वादानुसार

ग्रेवी की विधि : प्याज़, लहसुन, टमाटर, हरी मिर्च और अदरक का पेस्ट बना कर रखें। काजू और मलाई को भी ग्राइंडर में पीस लें। कड़ाही में तेल डाल कर गरम करें। फिर ताज़ा मसालों का पेस्ट, हल्दी और धनिया पाउडर दो मिनट तक भूनें। काजू-मलाई का पेस्ट और लाल मिर्च पाउडर डाल कर मसाले को तेल छोडऩे तक भूनें। एक कप पानी डाल कर ग्रेवी गाढ़ी होने तक पकाएं। फिर उसमें नमक और गरम मसाला पाउडर छिड़क कर अच्छी तरह मिला लें। तरी में को$फ्ते डाल कर 5 मिनट तक घीमी आंच पर ढककर रखें। फिर इसे गर्मागर्म सर्व करें।

लौकी के कोफ्ते

कोफ़्ते के लिए सामग्री

  • लौकी- 500 ग्राम (कद्दूकस की हुई)
  • भुना बेसन- 1/2 कप
  • हरी मिर्च- 2 (बारी$क काटी हुई)
  • अदरक-लहसुन का पेस्ट —1/2 टी स्पून
  • लाल मिर्च पाउडर —1/2 टी स्पून
  • नमक- स्वादानुसार
  • तेल- आवश्यकता अनुसार

विधि : लौकी को छील कर घिस लें। एक बर्तन में घिसी हुई लौकी, हरी मिर्च, लहसुन-अदरक का पेस्ट, लाल मिर्च, हरा धनिया बेसन और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें। मिश्रण को ढंककर को 10 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें। मोटे तले की कड़ाही में तेल डाल कर गरम करें। फिर मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियां बना कर सुनहरा होने तक तल कर अलग रख लें।

ग्रेवी के लिए सामग्री

  • टमाटर – 2-3 (मध्यम आकार के)
  • हरी मिर्च -2-3
  • अदरक-लहसुन का पेस्ट-1/2 टीस्पून
  • दही -1/2 कप
  • क्रीम या मलाई – -1/2 कप
  • हल्दी पाउडर- 1/4 टीस्पून
  • धनिया पाउडर – 1 टीस्पून
  • गरम मसाला – 1/4 टीस्पून
  • लाल मिर्च पाउडर -1/4 टीस्पून
  • हरा धनिया— 1 टेबलस्पून (बारी$क कटा)
  • नमक— स्वादानुसार

विधि : टमाटर, हरी मिर्च और अदरक को ग्राइंडर में बारी$क पीस लें। कड़ाही में तेल गरम करके उसमें जीरा डालें। फिर हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। टमाटर का पेस्ट डाल कर मसाले को तब तक भूनें जब तक कि मसाले के ऊपर तेल न तैरने लगे। दही और मलाई फेंटकर मसाले के साथ 3-4 मिनट तक भूनें। मसाला भुनने के बाद एक गिलास पानी मिला दें। उबाल आने के बाद नमक और गरम मसाला डालें और उसे गाढ़ी होने तक पकाएं। ग्रेवी में पहले से तैयार किए गए को$फ्ते डालकर पांच मिनट तक धीमी आंच पर रखें। रोटी या चावल के साथ गर्मागर्म सर्व करें।

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इस व्यक्ति ने 1 महीने तक पीया ऊंटनी का दूध और हो गया ये कमाल

By Gayatree Verma ,  ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 19, 2018

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QUICK BITES
  • ऊंटनी के दूध में कई सारे विटामिन्स और एंटीबॉडीज़ होते हैं।
  • एक लीटर ऊंटनी के दूध में 52 यूनिट इंसुलिन की मात्रा होती है।
  • इस कारण इसक नियमित सेवन से मधुमेह रोग ठीक होता है।
 

राजस्थान के टोंक गांव में रहने वाले हनुमान बलि पिछले तीन साल से मधुमेह से पीड़ित थे। हजारों रुपये उनके इलाज में खर्ज हो गये थे जिसका आंकड़ा लाखों तक पहुंचने वाला था। तभी उनके दोस्त ने उन्हें ऊंटनी का दूध ट्राय करने बोला। हनुमान बलि ने सोचा जब इतने पैसे और इतनी दवाईयां ट्राय कर ही चुके हैं तो ये उपाय भी अपना ही लेता हूं। ये सोचकर हनुमान बलि ने ऊंटनी का दूध पीना शुरू किया। अभी उसे ऊंटनी का दूध पीते हुए एक महीने ही हुए थे कि उनका शुगर कंट्रोल हो गया और एक महीने बाद ही उनकी डायबीटिज पूरी तरह से ठीक हो गई। आज हनुमान बलि की डायबीटिज और मोटापा पूरी तरह से कंट्रोल में है और वो पहले की तरह हर चीज खा-पी रहे हैं और मेहनत कर रहे हैं। जबकि डायबीटिज और दवाई लेने के दौरान उसे कई चीजों से परहेज करनी पड़ती थी और वो ज्यादा शारीरिक क्रियाएं भी नहीं कर पाता था। आज वो पूरी तरह से तंदुरुस्त है और पहले से अधिक मेहनत करता है।  

ऊंटनी का दूध मधुमेह जैसी जटिल बीमारी ठीक करने के अलावा अन्य कई सारी बीमारियां भी ठीक कर देता है। इसका दूध लगातार एक से दो महीने तक पीने से शरीर की कई सारी बीमारियां ठीक हो जाती हैं। आइए इस लेख में जानें ऊंटनी के दूध के फायदे और उनसे दूर होने वाली बीमारी।

ऑटिज्म भी करे ठीक

मानसिक बीमारी दूर करने के लिए ऊंटनी का दूध रामबाण इलाज है। बीकानेर के राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र ने हाल ही में एक स्टडी कराई जिसमें इस बात की पुष्टि की गई कि ऊंटनी का दूध मंद बुद्धि बच्चों के लिए अमृत के समान होता है। जिस कारण ऑटिज्म जैसी बीमारियां और मानसिक विकार ठीक हो जाते हैं। इस कारण राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र ने ऊंटनी के दूध से बने कई तरह के उत्पाद भी बाजार में उतार दिए हैं और लोगों तक इसका फायदा पहुंचाने के लिए किसानों को मोटिवेट भी कर रहा है।
इस स्टडी में पंजाब के फरीदकोट में स्पेशल चिल्ड्रन के एक केंद्र में तीन महीने तक लगातार लगभग 10 मंद बुद्धि बच्चों को रोजाना सुबह-शाम 300 एमएल ऊंटनी का दूध पिलाया गया। इन बच्चों में बीमारी ठीक होने में दूसरे मंदबुद्धि बच्चों की तुलना में ज्यादा ग्रोथ पाई गई।

ऊंटनी के दूध के फायदे

  • यदि आप नमकीन होने की वजह से ऊंटनी के दूध से परहेज करते हैं तो सबसे पहले इसके फायदे जान लीजिए। इन फायदों को जानकर आप ऊंटनी का दूध पीने से खुद को रोक नहीं पाएंगे।
  • ऊंटनी का दूध कई सारे रोगों में फायदेमंद होता है। ऊंटनी का दूध शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है जिससे मौसमी बीमारियां शरीर में नहीं होती। मानसिक बीमारियां ठीक होती हैं।
  • रोजाना ऊंटनी का दूध पीने से बच्चों की मानसिक बीमारियां ठीक होती हैं। इसके अलावा सामान्य शख्स द्वारा रोजाना ऊंटनी का दूध पीने से उसमें सोचने-समझने की क्षमता सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा विकसित होती है। साथ ही यह बच्चों को कुपोषण से भी बचाता है और उनमें बौद्धिक क्षमता का विकास करता है।
  • जल्दी पचता है- ऊंटनी का दूध गाय की दूध की तुलना में तुरंत पच जाता है। इसमें दुग्ध शर्करा, प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट,सुगर, फाइबर ,लैक्टिक अम्ल, आयरन, मैग्निशियम, विटामिन ए , विटामिन  ई , विटामिन बी 2, विटामिन सी , सोडियम, फास्फोरस ,पोटैशियम, जिंक, कॉपर, मैग्नीज जैसे बहुत सारे तत्व पाए जाते हैं जो कि हमारे शरीर को सुंदर और निरोगी बनाते हैं।
  • हड्डियां बनाए मजबूत – ऊंटनी के दूध में कैल्शियम काफी मात्रा में होता है हड्डियां मजबूत बनाने में सहायक है।
  • कैंसर से रक्षा करे – इसके अलावा इस दूध में लेक्टोफेरिन नामक तत्व पाया जाता है जो कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ने के लिए शरीर को तैयार करता है।  
  • खून साफ करे – यह खून से सारे टॉक्सिन्स दूर कर लिवर को साफ करता है।
  • मधुमेह ठीक करे –  ऊंटनी का दूध मधुमेह के लिए सबसे रामबाण इलाज माना जाता है। इससे सालों का मधुमेह महीनों में ठीक हो जाता है। ऊंटनी के एक लीटर दूध में लगभग 52 यूनिट इंसुलिन की मात्रा होती है। जो कि अन्य पशुओं के दूध में पाई जाने वाली इंसुलिन की मात्रा से काफी अधिक है। इंसुलिन शरीर में प्रतिरोधक क्षमता तैयार करता है और मधुमेह जैसी बीमारियां ठीक करता है।
  • अन्य बीमारियां भी करे ठीक – ऊंटनी का दूध विटामिन और खनिज तत्वों से भरपूर होता है। इसमें एंटीबॉडी भी काफी मात्रा में मौजूद होते हैं। इसके नियमित सेवन से ब्लड सुगर, इंफेक्शन, तपेदिक, आंत में जलन, गैस्ट्रिक कैंसर, हैपेटाइटिस